
Ranchi: झारखंड सरकार 6.5 लाख साइकिल खरीदने की तैयारी में है. 122 करोड़ की लागत से खरीद होनी है. खरीदी गयी साइकिलों को 8वीं, 9वीं कक्षा के एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक वर्गों के स्टूडेंट्स के बीच बांटा जायेगा. इसका असल उद्देश्य स्कूलों से ड्रॉप आउट रोकना है. पर पूर्व सीएम रघुवर दास, सांसद महेश पोद्दार ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाये हैं. रघुवर ने कहा है कि उनकी सरकार में करप्शन रोकने को डीबीटी के माध्यम से बच्चों को राशि भेजना शुरू किया गया था. पर अब उल्टा है. करप्शन को प्रश्रय देने को साइकिल खरीद की योजना बनायी गयी है.

कमाई का खुला रास्ता
रघुवर दास ने ट्विटर पर भी अपनी बात रखी है. कहा है कि डीबीटी के जरिये पेमेंट करने से पैसे अभिभावकों के खाते में जा रहे थे. बच्चे अपनी पसंद के अनुरूप साइकिल की खरीद करते थे. पर अब सरकार ने कमाई का रास्ता खोल दिया है. अब फिर से टेंडर, मैनेज, कमीशन, घटिया सप्लाई जैसी खबरें दिखेंगी.
महेश पोद्दार ने भी साइकिल खरीद की व्यवस्था पर निराशा जाहिर की है. कहा है कि साईकिल वितरण में डीबीटी बंद करना ठीक नहीं. डीबीटी से पारदर्शिता भी बढ़ती है. पर इसे बंद किये जाने का मतलब यह है कि सरकार को आम जनता की तुलना में ठेकेदारों-बाबुओं पर ज्यादा भरोसा है.

आदिवासी कल्याण आयुक्त की निगरानी में होनी है खरीद
गौरतलब है कि कल्याण विभाग (झारखंड सरकार) 8वीं औऱ 9वीं के एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के 6.5 लाख छात्रों को साइकिल देने की तैयारी में है. चूंकि पिछले साल (2020-21) में साइकिल खरीद की योजना कोरोना के कारण संभव नहीं हो पायी थी. ऐसे में इस बार 2021-22 के साथ साथ 2020-21 के लिये भी साइकिल खरीद के लिये टेंडर की प्रक्रिया शुरू करेगी. 2019-20 तक इसके लिये पैसे डीबीटी के माध्यम से छात्रों को मिलते थे. अबकी ऐसा नहीं होगा. आदिवासी कल्याण आयुक्त की देखरेख में साइकिल खरीद की प्रक्रिया पूरी की जायेगी.




