
Ranchi: पुलवामा आतंकी हमले की दूसरी बरसी आज है. इसी दिन 14 फरवरी 2019 को दो साल पहले कश्मीर के पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद 40 सीआरपीएफ के जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था. आज ही के दिन पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. आज सारा देश उनकी शहादत पर नमन कर रहा है. हमले में शहीद होने वाले 40 जवानों में झारखण्ड के गुमला जिले का एक जवान विजय सोरेंग भी थे. उनकी शहादत को आज सारा देश याद कर रहा है और श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है.
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हेड कॉन्स्टेबल के पद पर थे विजय:
शहीद विजय सोरेंग सीआरपीएफ की 82 वीं बटालियन में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे. विजय सोरेंग 1993 में विजय सेना में भर्ती हुए थे और 1995 में उन्हें एसपीजी में कमांडो दस्ता में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ.
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परिस्थितिवश विजय ने दो शादियां की थी. उनकी पहली पत्नी कार्मेला बा रांची होटवार में झारखंड पुलिस टेंट में महिला बटालियन में कार्यरत हैं, जबकि दूसरी पत्नी बिमला अपने मायके सिमडेगा में रहती हैं. पहली पत्नी से एक बेटा है जिसे सीआरपीएफ ने नौकरी का प्रस्ताव दिया था. लेकिन, अरुण ने सिविल में नौकरी की मांग की है. शहीद के पिता ने मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपा है. दूसरी पत्नी से तीन बेटी और एक बेटा है.
मातृभूमि की रक्षा में बेटे की शहादत ने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया: वृष सोरेंग
विजय सोरेंग की शहादत के बाद परिजनों के लिए अब उनकी स्मृति शेष ही बच गयी है. उनके पिता वृष सोरेंग कहते हैं कि मैं सेना का जवान था. बेटा भी सैनिक बनना चाहता था. बचपन से ही उसमें देशभक्ति का भाव था. मैं जब तक जिंदा रहूंगा अपने बेटा के व्यवहार और संस्कार को भूल नहीं पाउंगा. उसकी देशभक्ति के भाव को हमेशा दिल में संजोकर रखूंगा. श्री सोरेंग कहते हैं कि मैं खुद भी फौज से रिटायर हुआ हूं और शहादत को अच्छे से समझ सकता हूं. मातृभूमि की रक्षा में बेटे की शहादत ने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया.
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