
Uday Chandra
New Delhi : ये कोई पहला मौका नहीं है जब भारत में बर्ड फ्लू आया हो. पिछले 14 वर्षों में यह दो दर्जन से अधिक बार भारत में कहर बरपा चुका है. भारत में बर्ड फ्लू का पहला मामला 2006 में सामने आया था. देश में इस बार बर्ड फ्लू को लेकर 7 राज्यों में हड़कंप मचा हुआ है. इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चार राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और केरल में मारे गये पक्षियों में बर्ड फ्लू होने की पुष्टि होने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली में एक कंट्रोल रूम बना दिया है, ताकि देश में बर्ड फ्लू की स्थिति पर नजर रखी जा सके.
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केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि सर्दियों के मौसम में आनेवाले प्रवासी पक्षियों के कारण ये बीमारी फैली है. अकेले केरल में पिछले कुछ दिनों में 12,000 बत्तखों की मौत हुई है, जिसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु सावधानी बरत रहे हैं. वहीं हिमाचल में भी हजारों पक्षी मृत मिले थे. जम्मू-कश्मीर और हरियाणा ने अपने-अपने राज्य में मृत पक्षियों के सैंपलों की जांच करनी शुरू कर दी है. हरियाणा के पंचकूला में पिछले 10 दिनों में चार लाख पोल्ट्री के पक्षियों की मौत हुई है. हालांकि, राज्य ने अभी तक फ्लू की पुष्टि नहीं की है. प्रशासन का कहना है कि इसकी जांच हो रही है. देश के सभी राष्ट्रीय अभ्यारण्यों और पार्कों को भी अलर्ट कर दिया गया है.

सामान्य फ्लू की तरह होते हैं लक्षण
लेकिन बर्ड फ्लू (H5N1) यानी बर्ड फ्लू को लेकर बहुत अधिक घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसे देश ने लगातार मात दी है. बस आपको थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है. देखा जाये तो बर्ड फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू की तरह होते हैं. अगर आप ये सोचते हैं कि कि ये सिर्फ पक्षियों का फ्लू है, तो आप गलत हैं. ये वायरस पक्षियों के अलावा मनुष्यों के लिए भी खतरा साबित हो सकता है. H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा के शिकार इंसान की मौत तक हो सकती है.
60 फीसदी है मृत्यु दर
बर्ड फ्लू आपके लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इंसानों में इस वायरस से मृत्यु दर करीब 60% है. बर्ड फ्लू के इंसानों में आये मामलों में देखा गया है कि यह सभी इस वायरस से संक्रमित किसी जीवित या मृत पक्षी के संपर्क में आये थे. इंसानों में बर्ड फ्लू का पहला मामला 1997 में पहली बार हॉन्ग कॉन्ग में सामने आया था.
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वैसे बर्ड फ्लू को आम तौर पर एवियन इन्फ्लूएंजा के रूप में भी जाना जाता है. प्रवासी पक्षियों के जरिए इस वायरस का एक देश से दूसरे देश में प्रसार होता है. पक्षियों के मल, नाक के स्राव, मुंह की लार या आंखों से निकलने वाले पानी के जरिए भी यह वायरस फैलता होता है. अक्सर हवा में उड़ते हुए भी जब पक्षी मल-मूत्र त्यागते हैं तो संक्रमण फैलाते चले जाते हैं.
साफ-सफाई का रखे पूरा ध्यान
H5N1 वायरस एवियन इन्फ्लूएंजा का सबसे खतरनाक स्ट्रेन है. इससे बचने का तरीका है कि आप साफ सफाई का ध्यान रखें. नॉन वेजिटेरियन हैं तो नॉनवेज को अच्छे से पका कर खायें. इसके अलावा समय-समय पर हाथ जरूर धोते रहें.
जानकारों के अनुसार अगर आपके क्षेत्र में बर्ड फ्लू फैला है और आपको सांस लेने में दिक्कत आ रही है, गले में कफ बना रहता है, सिर
में दर्द, गले में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, मितली आना महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना जैसी शिकायते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. मनुष्यों में यह बीमारी आंख, नाक और मुंह के जरिए फैलता है. ऐसे में इसका बचाव यही है कि आप संक्रमित पक्षियों खास कर मरे पक्षियों से दूर रहें और संक्रमणवाले क्षेत्रों में न जायें.
अगर आपको ऐसे लक्षण दिखते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. एक्सपर्ट बताते हैं कि बर्ड फ्लू (Bird Flu) के लक्षण दिखने के 2-3 दिन के अंदर डॉक्टर के पास पहुंच जाना चाहिए. नहीं तो ये घातक साबित हो सकता है. इंसानों में बर्ड फ्लू वायरस आंख, नाक और मुंह के जरिए फैलता है. इस वजह से इसका बचाव यही है कि आप संक्रमित पक्षियों खास कर मरे पक्षियों से दूर रहें, संक्रमण वाले क्षेत्रों में न जायें.




