Ranchi: बोकारो जिला के सबसे बड़े कोविड अस्पताल में मरीजों को सिर्फ एडमिट किया जा रहा है. इलाज के लिए डॉक्टर पहुंच ही नहीं रहे. नर्सें दवा कागज में मोड़कर फेंककर देती हैं. कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज को छूना ही नहीं चाहता. परिजन मजबूरी में बिना किसी सुरक्षा के ही अपने कोविड पॉजिटिव मरीज की देखभाल करने को मजबूर हैं.
बोकारो के 72 वर्षीय सुबोध चटर्जी कोरोना पॉजिटिव पाये गये. कोविड वार्ड में वो 8 घंटे गिरे रहे और खुद को उठाने के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन किसी ने हाथ नहीं लगाया. उसी अवस्था में उन्हें दवा फेंककर दिया गया. खाना भी उसी हाल में परोसकर दे दिया गया.
इतना ही नहीं जब मरीज को आइसीयू में ले जाने के बाद खाना देने से भी मना कर दिया. पूछने पर बताया गया कि आइसीयू के मरीजों के लिए खाना घर से लाना पड़ता है. यह आरोप मरीज के बेटे ने बीजीएच पर लगाया है.
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PPE किट के बिना मरीज के साथ रहने को मजबूर परिजन
मरीज के बेटे ने बीजीएच प्रबंधन पर कई आरोप लगाये हैं. उन्होंने बताया कि शनिवार को मरीज को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था. वहां देखने जाने नहीं मिला. मरीज से फोन पर तीन बजे दोपहर तक बात हुई. उसके बाद उन्होंने फोन नहीं उठाया. जब जानकारी अस्पताल से ली गयी तो बताया गया कि सबकुछ ठीक है. रात को 10 बजे भी यही बताया गया.
लेकिन अचानक रात के 11 बजे फोन आया और कोविड अस्पताल बुलाया गया. जब वे पहुंचे तो देखा कि उनके मरीज गिरे पड़े हैं, दो वक्त का खाना भी वहीं पड़ा है. नर्सें कागज में लपेटकर दवा फेंककर दे रही हैं. उन्हें प्रबंधन ने खुद से मरीज को आइसीयू में शिफ्ट करने को कहा.
आइसीयू में भी नर्स ने उन्हें हाथ नहीं लगाया. परिजन को ही खुद से ऑक्सीजन लगाना पड़ा. वहीं दो दिन तक आइसीयू में एक बार भी डॉक्टर नहीं पहुंचे हैं. खाना भी नहीं दिया जा रहा. बताया गया है कि खाना आइसीयू में नहीं मिलता घर से लाना पड़ता है.
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