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देश को कर्ज नहीं, वित्तीय मदद की जरूरत, गरीबों के खाते में नगद पैसे डाले सरकार: राहुल गांधी

New Delhi :  कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि मौजूदा समय में देश को कर्ज नहीं बल्कि वित्तीय मदद की जरूरत है और ऐसे में सरकार गरीबों के खाते में छह महीने के लिए 7500 रुपये प्रति माह भेजे तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को आर्थिक पैकेज दिया जाए.

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सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर कांग्रेस की ओर से शुरू किए गए ‘स्पीकअप इंडिया’ अभियान के तहत एक वीडियो जारी कर उन्होंने सरकार से यह आग्रह भी किया कि वह मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए मुफ्त परिवहन सेवा उपलब्ध कराए और मनरेगा के तहत साल में 200 कामकाजी दिन सुनिश्चित करे.

गांधी ने कहा, ‘‘कोविड के कारण भारत में एक तूफान आया हुआ है. सबसे ज्यादा चोट गरीब जनता को लगी है. मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर भूखा-प्यासा और पैदल चलना पड़ रहा है. एमएसएमई हमारे देश की रीढ़ की हड्डी हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार देते हैं. ये एक के एक बाद बंद हो रहे हैं.’’

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उनके मुताबिक आज हिंदुस्तान को कर्ज की नहीं, पैसे की जरूरत है. गरीब आदमी को पैसे की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी सरकार से चार मांगे हैं. पहली मांग यह है कि हर गरीब परिवार के खाते में छह महीनों के लिए 7500 रुपये प्रति माह डाला जाए. मनरेगा को 200 दिन के लिए चलाया जाए. एमएसएमई के लिए तत्काल एक पैकेज दिया जाए. मजदूरों को वापस भेजने के लिए तत्काल सुविधा उपलब्ध कराई जाए.’’

कमजोर के साथ खड़े होने की जरूरत – प्रियंका

इधर, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि कोरोना वायरस की इस आपदा की घड़ी में  भारत के कमजोर वर्ग के साथ खड़े होने की जरूरत है. यह हम सबका कर्तव्य है. कांग्रेस कार्यकर्ता देश में उन लोगों के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं जो कोरोना संकट से घिरे हुए हैं.

प्रियंका ने भाजपा नेताओं से कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं है. यह समय एक साथ मिलकर काम करने का है. श्रमिकों की हालत देखकर इस देश की एक-एक मां रो रही है. हमारी भारत माता रो रही है, लेकिन प्रधानमंत्री मौन हैं. खामोश हैं. इनकी मदद के लिए आप आगे नहीं आ रहे हैं.

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