
Ranchi: शहर के निजी स्कूल लॉकडाउन के दौरान सिलेबस पूरा करने के लिए ऑनलाइन माध्यम से क्लासेस ले रहे हैं. स्कूल जिन ऐप्स की मदद से क्लास ले रहे हैं, वे सभी गूगल प्ले स्टोर से फ्री में डाउनलोड होता है. इसके लिए एक रुपये भी खर्च नहीं करना पड़ता है.
शहर के अधिकांश स्कूल गूगल क्लास, जूम ऐप जैसे एप्लीकेशन की मदद से क्लास ले रहे हैं. ऑनलाइन क्लासेस के सारे प्लेटफॉर्म फ्री में उपलब्ध हैं इसके बावजूद निजी स्कूल पैरेंट्स से फीस की डिमांड कर रहे हैं.
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लिखित नहीं मौखिक रूप से कर रहे हैं मांग
शहर में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 63, आइसीएसइ से मान्यता प्राप्त 39 स्कूल हैं. इसके अलावा 100 से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जिन्हें किसी भी बोर्ड से मान्यता नहीं मिली हैं. इन सभी स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लासेस चलाये जा रहे हैं. इनमें से आइसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त संत जेवियर्स स्कूल और संत थॉमस स्कूल की ओर से ऑनलाइन क्लासेस के बदले फीस की मांग की गयी है.
स्कूलों ने वीडियो से पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग के दौरान फीस की मांग की है. स्कूल की ओर से किसी तरह का नोटिस नहीं दिया गया है. इस संबंध में स्कूल की ओर से अभिभावकों को जो जानकारी दी गयी है उसके अनुसार इन दोनों स्कूलों में एक्ट्रामार्क ऐप से क्लास चलाया जाता है. इसके बदले एक्ट्रामार्क 500 रुपये लेती है. स्कूलों का कहना कि 500 रुपये की फीस में 200 रुपये स्कूल देगा और 300 रुपये अभिभावकों को देना है.
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स्कूलों का खर्च नहीं के बराबर
गौरतलब है कि सामान्य दिनों में स्कूलों में मेंटनेंस के नाम पर कई तरह के खर्च होते हैं. लेकिन एक माह से अधिक समय से स्कूल बंद होने से स्कूलों का खर्च निश्चित रूप से कम हुआ है. स्कूलों में साफ-सफाई, बिजली बिल, जेनरेटर खर्च, वाटर मैनेजमेंट, ट्रांसपोर्टेशन चार्ज के अलावा स्मार्ट क्लासेस पर होने वाले खर्च अभी नहीं के बराबर हो रहे हैं. इसके बाद भी स्कूल की ओर से ऑनलाइन क्लासेस के नाम पर फीस की मांग जायज नहीं है.
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अभिभावकों की परेशानी और खर्च भी बढ़ा
स्कूलों की ओर कराये जा रहे ऑनलाइन क्लासेस को लेकर घरों में कई तरह की परेशानी होने लगी है. जहां अभिभावकों के लिए इंटरनेट डेटा का खर्च बढ़ा है वहीं बच्चों में स्ट्रेस भी बढ़ रहा है.
अधिकांश घरों में एक या दो स्मार्टफोन हैं. स्कूलों की ओर से तीन से चार घंटे तक ऑनलाइन क्लासेस लिए जा रहे हैं. एक तरफ जहां कभी-कभी फोन बिजी रहता है तो वहीं दूसरी ओर छोटे स्क्रीन पर क्लास करने की वजह से बच्चों की आंखों पर भी असर होने लगा है.




