
- 697443 परिवारों का आवेदन के बाद भी नही बना है राशन कार्ड, फिर ऑनलाइन आवेदकों को ही 10 किलो मिलेगा राशन, संभव है क्या?
Pravin/James
Ranchi: कुन्ती नगेशिया, चिन्तामनी देवी और अगस्ती गागराई, ये कुछेक उदाहरण मात्र हैं लेकिन राज्य में एक बड़ी आबादी है जो कोरोना के साथ-साथ भूख और कुपोषण से इस वक्त जंग लड़ रही है.
इनको राशन मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार ने हालिया संकल्प पत्र में जो कहा है उसके अनुसार पहले से ऑनलाइन आवेदन कर चुके 697443 परिवारों तथा दूसरे सुपात्र परिवारों को ऑनलाइन आवेदन कराते हुए एक रुपये की दर से प्रति परिवार 10 किलो खाद्यान्न अप्रैल व मई महीने का उपलब्ध कराना है.
अहम सवाल है कि परिवारों ने आवेदन के लिए मुखिया/डीलर/स्वयंसेवकों/दलालों को पैसे तो दे दिये, लेकिन परिवारों को ऑनलाइन की रसीद नहीं मिली. दूसरा, अभी लॉकडाउन में सभी तरह की दुकानें बंद हैं.
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विभाग ने 14 अप्रैल को जारी किया है संकल्प
झारखंड सरकार के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा 14 अप्रैल को संकल्प जारी करते हुए कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण एवं महामारी को देखते हुए जिनका राशन कार्ड नहीं बना है वैसे परिवारों को भी 10-10 किलो अनाज देने का संकल्प लिया गया है.
क्या इस संकल्प के मुताबिक वाकई वैसे जरूरतमंदों को, जिनका अब तक राशन कार्ड नहीं बना है, उन्हें राशन मुहैया हो सकता है? ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जहां विभाग का यह संकल्प जरूरतमंदों तक राहत पहुचांने में सक्षम नहीं है.
आखिर विभाग के अधिकारी यह क्यों नहीं समझते कि जब संपूर्ण देश में लॉकडाउन लागू है तो सुदूर गांव की अबस्तीन गगराई जैसे लोग ऑनलाइन आवेदन कैसे करेंगे?
बंद कमरे में बैठकर योजना बनाने से नही पहुंच सकती है गरीबों तक राहत. विभाग को कोई और प्रणाली विकसित करनी होगा तभी विभाग का संकल्प पूरा हो सकता है.
आखिर कोरोना संकट के वैश्विक महामारी में खाद्य संकट से जूझ रहे परिवारों को सरकारों के समक्ष अपनी गरीबी साबित करने के लिए और कितनी अग्नि परीक्षायें देनी पडेंगी?
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पढ़िये ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरते चंद परिवारों की कहानियां
लातेहार जिला

महुआडांड़ प्रखंड मुख्यालय से महज दो किलोमीटर की परिधि में रहने वाली अत्यंत गरीब विधवा महिला कुन्ती नगेशिया लॉक डाउन से पहले ही इटकी अरोग्य केन्द्र से टीबी का इलाज कराकर वापस घर आयी हैं.
जाने के पूर्व 02 अप्रैल 2019 को ही उसने राशन कार्ड बनवाने हेतु सभी कागजातों के साथ अनुमण्डल अधिकारी महुआडांड़ को सौंप दिया था.
आवेदन सौंपते वक्त कार्यालय कक्ष में ही अंचल अधिकारी एवं अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे. सीओ को भी उसने विधवा पेंशन के लिए उसी दिन आवेदन सौंपा था.
कुन्ती ऑनलाइन आवेदन कराने में असमर्थ थी क्योंकि उक्त प्रखण्ड में प्रज्ञा केन्द्र के सभी संचालक 50 रुपये प्रति सदस्य ऑनलाइन कराने का शुल्क वसूलते हैं जो देना कुन्ती नगेसिया जैसे सैकड़ों गरीबों के लिए संभव नहीं था.
आज उनके पास कार्यालय में समर्पित दोनों आवेदनों की पावती है, किन्तु एसडीओ ने एक वर्ष बीत जाने के बाद भी ऑननलाईन आवेदन की पावती आवेदिका को उपलब्ध नहीं करायी है.
लोहरदगा जिला
सेन्हा बांधटोली की रहने वाली महिला चिन्तामुनी देवी अकेली रहती हैं. वह अत्यन्त गरीब हैं. उन्होंने पीएच कार्ड जिसकी संख्या 202002191351 है, संभाल कर रखा है.
लेकिन राशन लेने जाने पर उससे कहा जाता रहा कि उसका कार्ड डिलिट हो गया है. चेक करने पर पता चला कि उस नंबर पर प्रमिला नामक किसी दूसरे परिवार को कार्ड निर्गत कर दिया गया है.
इनके पास भी राशन कार्ड हेतु ऑनलाइन की कोई रसीद नहीं है. लेकिन गरीबी के कारण दाने-दाने को मोहताज हो रही हैं.
पश्चिमी सिंहभूम
परिवार चलाने के लिए बाहर मजदूरी करने वाले अगस्ती गागराई लॉक डाउन के ठीक पहले किसी तरह सोनुवा प्रखंड की बारी पंचायत स्थित घर पहुंचे.
उनके घर में 3 बच्चों सहित पांच लोग हैं जिनके पास हमेशा खाद्य संकट रहता है. लेकिन सरकारी अधिकारियों ने उसे सफेद कार्ड थमा दिया है, जिसपर मिट्टी तेल के अलावे दूसरी कोई सामग्री नहीं दी जाती है. अब यह परिवार कार्ड के लिए आवेदन भी नहीं कर सकता है.
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