
- पिछले तीन सालों में इन मजदूरों से चेकडैम, कंटूर, पिट, खुदाई, भवन निमार्ण आदि कराया गया
Ranchi : राज्य में भले ही पिछले पांच सालों में नये विश्वविद्यालय खोले गये. लेकिन साक्षरता की जानकारी अक्षर ज्ञान से होती है. जिसमें झारखंड अभी भी पिछड़ा हुआ है. इसका उदाहरण लातेहार जिला है. पिछले दिनों नीति आयोग की ओर से आकांक्षी जिलों की सूची जारी की गयी.
जिसमें लातेहार जिला को शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए देश भर में तीसरा स्थान मिला. लेकिन इसी जिला में पिछले दो साल में काम करने वाले मजदूरों में सब के सब अंगूठा छाप निकले. इसकी जानकारी एक आरटीआइ से हुई.
सामाजिक वानिकी वन प्रक्षेत्र लातेहार के तहत साल 2016 से 2019 में 9781 मजदूरों से काम लिया गया. जब इन मजदूरों का मास्टर रोल या हाजिरी आरटीआइ से उपलब्ध कराया गया, तो जानकारी हुई कि इसमें सभी मजदूरों ने अपनी हाजिरी में अंगूठा लगाया. गौरतलब है कि वन क्षेत्र पदाधिकारी राजीव कुमार रंजन के कार्यकाल में इन मजदूरों से काम लिया गया.
इसे भी पढ़ें – ओपेन जेल में बंद सरेंडर नक्सलियों के परिजनों ने पुलिस अफसरों से कहा- सरेंडर पॉलिसी से उठ रहा विश्वास
तीन साल में 9781 मजदूरों ने किया काम
आरटीआइ कर्ता रविकांत ने बताया कि मास्टर रोल या मजदूरों की हाजिरी का आंकड़ा तीन साल का है. ये आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 और 2018-19 का है. इस क्षेत्र में सामाजिक वानिकी वन प्रक्षेत्र के तहत कुल 9781 मजदूरों ने काम किया. रविकांत ने बताया कि इसके लिए कई स्तर पर आरटीआइ किया गया.



इस मामले की खुलासा तब हुआ, जब मजदूरों के नाम पर अवैध निकासी की गयी. इन मजदूरों से निर्धारित समय तक के लिए काम कराया गया. इनमें से कुल 77 ऐसे मजदूर हैं, जिनसे काम भी नहीं लिया गया और इनके नाम पर तीन लाख 70 हजार 828 रूपये की निकासी भी कर ली गयी. मजदूरों के नाम पर निकासी के इस मामले पर न्यूज विंग में खबर पहले भी प्रकाशित की गयी है.
वहीं सामाजिक वानिकी वन प्रक्षेत्र लातेहार के तहत बीते तीन सालों में कुल 9781 मजदूरों से चेकडैम, कंटूर, पिट, खुदाई, भवन निमार्ण आदि कराया गया.
इसे भी पढ़ें – हाल-ए #MNREGA : दुमका में मयूराक्षी नदी के किनारे बलुआई मिट्टी में बन रहे तालाब
क्या है आकांक्षी जिला
आकांक्षी जिला केंद्र सरकार की ओर से चलायी जा रही भावी योजना है. जिसमें देश के 115 ऐसे जिलों का चयन किया गया है, जो मानव विकास सूचकांक पर पिछड़े थे. इन जिलों में समावेशी विकास के लिए 49 संकेतकों पर काम किया जाता है.
जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी निवारण, कृषि, जल संसाधन, कौशल विकास समेत अन्य संकेतक हैं. इन्हीं में से बेहतर शिक्षा के लिए लातेहार जिला को देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ. गौरतलब है कि पहले स्थान पर त्रिपुरा का धलाई जिला है. जबकि ओडिशा के रायगढ़ जिले को दूसरा स्थान मिला है.
इसे भी पढ़ें – गलत तरीके से क्लर्कों व स्विचरमैन को जेई का प्रभार दिये 15 दिन हो गये, महाप्रबंधक ने नहीं लिया वापस




