
Akshay Kumar Jha
Ranchi: झारखंड सरकार के लाख वादों के बावजूद राज्य में बिजली की हालत किसी से छिपी नहीं है. दूसरी तरफ तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (टीटीपीएस) प्रबंधन ने एक ऐसा फरमान जारी किया है, जिससे इस ओर इशारा हो रहा है कि झारखंड की एक मात्र सरकारी थर्मल पावर स्टेशन बंद होने की राह पर है.
टीटीपीएस जब बना था तो इसकी बिजली उत्पादन करने की क्षमता 420 मेगावाट थी. लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में कारखाने की उत्पादन क्षमता घट गयी. टीटीपीएस के अधिकारी बताते हैं कि यहां से 350 मेगावाट बिजली आराम से उत्पादन किया जा सकता है. लेकिन प्रबंधन के शीर्ष अधिकारी की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया है.
नोटिस में अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि 3.6 मिलियन यूनिट यानि करीब 290 मेगावाट से ज्यादा का उत्पादन रोजाना ना हो. कहा गया है कि यूनिट वन से 150 मेगावाट और यूनिट टू से 140 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन किया जाए.
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कैसे है बंद होने की कगार पर
टीटीपीएस के हर महीने और सालाना का उत्पादन उपलब्धि (Performance) बनाया जाता है. जिसे प्लांट लोड फैक्टर कहते हैं. इसे तैयार कर सरकार के पास भेजा जाता है. अगर उत्पादन उपलब्धि 75 फीसदी से कम हुई तो कारखाने को अंडर परफॉमर माना जायेगा.
420 मेगावाट क्षमता वाले कारखाने का 75 फीसदी 315 मेगावाट होता है. जो कि 290 मेगावट से कम है. अगर टीटीपीएस प्रबंधन की बात मानकर अपनी उत्पादन क्षमता 290 मेगावट कर लेता है तो कारखाना अंडर परफॉमर माना जायेगा. जिससे कारखाना घाटे का माना जाने लगेगा.
ऐसा होने से कंपनी अपने कर्मियों को इनसेंटिव नहीं देगी. और सरकार में रिपोर्ट भी घाटे की जायेगी. घाटे में जाने की वजह से प्लांट के बजट में कटौती होगी और धीरे-धीरे इसे सफेद हाथी समझा जाने लगेगा और प्लांट बंद होने की कगार पर पहुंच जायेगा.
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सरकार ने किया था नये यूनिट का वादा, लेकिन बंद करने की हो रही कोशिश
टीटीपीएस के कुछ अधिकारियों का कहना है कि हमारे पास अभी कोयला है. कर्मी भी हैं. ऐसे में हम आराम से 350 मेगावाट का उत्पादन कर सकते हैं. अगर प्लांट के उत्पादन को 15 दिन रोककर इसके मेंटेनेंस पर काम किया जाए तो प्लांट सो फीसदी 420 मेगावाट का उत्पादन कर सकता है.
झारखंड सरकार ने प्लांट में एक नये यूनिट के विस्तार का वादा पिछले चुनावी सालों में किया था. लेकिन बीते पांच सालों में मुश्किल से प्लांट को एक एमडी मिल पाया. कई दौर के इंटरव्यू के बाद एनटीपीसी से रिटार्यड एके सिन्हा को प्लांट का एमडी बनाया गया.
लेकिन मौजूदा प्रबंधन का उत्पादन पर नकेल कसना प्लांट में एक तरह का भय का माहौल बना रहा है. कर्मी सकते में हैं कि कहीं प्लांट को धीरे-धीरे बंद ना कर दिया जाए.




