
Surjit Singh
झारखंड में मॉब लिंचिंग की नयी घटना सामने आयी. आदिवासी बहुत इलाका सरायकेला-खरसावां जिला के सरायकेला थाना क्षेत्र के धातकीडीह. 17 जून की रात भीड़ ने तबरेज अंसारी के साथ मारपीट की. कथित तौर पर जयश्री राम के नारे लगवाये. कुछ लोगों ने पूरी घटना का वीडियो बनाया. भीड़ की पिटाई से जख्मी तबरेज को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. उस युवक को चोरी करने के आरोप में ग्रामीणों ने पकड़ा था.
वीडियो वायरल हुआ. तब जाकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की. पुलिस का आधिकारिक बयान है कि घटना के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है. सभी को सजा मिलेगी.
सवाल उठता है कि भीड़ को इस हालात तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार कौन है. समाज, राजनीति या नफरत फैलाने वाले राजनेता. कौन यह सिखा रहा है कि दूसरे धर्म के लोगों को पकड़ कर पीटो. उसे धार्मिक नारे लगाने को मजबूर करो. कौन उकसा रहा है, भीड़ को.
भीड़ में शामिल लोग इतने डरे हुए क्यों हैं, जो एक निहत्थे और मरनासन्न हो चुके युवक को भी बचाने के लिये सामने नहीं आते. किससे डरे हुए हैं. या कहीं ऐसा तो नहीं भीड़ में शामिल सारे लोग हिंसक हो गये हैं, भीड़ की हिंसा का समर्थन करने लगे हैं और नफरत की आग में जल रहे हैं. यह घनघोर चिंताजनक है. आखिर लोगों को कौन इस हद तक उन्मादी बना रहा है.
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इस तरह की घटनाओं का असर क्या होगा. तात्कालिक राजनीतिक फायदा तो दिख रहा है. लेकिन आगे भी किसे कितना फायदा होगा, यह तो भविष्य की गर्त में है. पर, एक बात तय है कि नफरत की राजनीति ने समाज में जो नफरत की उन्मादी आग फैलायी है, उसने हमारे अपने को हत्यारा बना दिया. तबरेज अंसारी को पीटने वाले लोग भले ही उन्माद में इस पर जश्न मना लें, पर आने वाला कल में इसके लिये उन्हें रोना पड़ेगा.
भले ही वह कानून की नजर से बच जायें. पकड़े भी जायें, तो सजा से बच जायें. यह भी संभव है कि कल को कोई मंत्री-विधायक उनका स्वागत माला पहनाकर कर दें. पर, अब वे लोग समाज के सामने सामान्य नागरिक नहीं रह गये हैं. बल्कि एक हत्यारा बन गये हैं.
नफरत की राजनीति को महान बता कर उसका समर्थन करने वाले लोग यह भूल रहे हैं कि यही नफरत लोगों को उन्मादी बना रहे हैं. कल को उनके अपने बच्चे भी उन्मादी और हिंसक बन जायेंगे. ऐसे लोग अपने बच्चों को खास जाति और धर्म के प्रति नफरत की आग में झोंक रहे हैं. जो कल को धर्म, जाति के नाम पर हत्यारा बन जायेगा और एक ना एक दिन खुद को जला लेगा.
इसलिए जरुरत यह है कि समाज के रहनुमा, राजनीतिक दलों के नेता नफरत के इस माहौल को बदलने के लिये आगे आयें. सत्ता, पुलिस को उतनी छूट दे कि वह कानून के दायरे में कार्रवाई कर सके. तभी माहौल बदलेगा और ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी. अगर हम आज नहीं चेते तो आने वाले दिनों में हम अपने घरों को भी नहीं बचा पायेंगे.
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