
Newswing Desk : कुछ नेता लोग जातिवाद की भी राजनीति कर रहे हैं. कुछ छुटभैया लोग भी खड़े हैं. कि जात के हैं. कर रहे हैं ना. छुटभैया लोगों को बताओ. तुम मुखिया का चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं है औऱ लोकसभा का चुनाव लड़ने चले. कोयला में लटपट करके कमा लिया, उसका हिसाब-किताब करेगी सरकार. चुनाव होने दो. दो नंबर से पैसा कमाये हुए लोग, इनको भी. ये दोनंबरिया. कुछ छुटभैया.
ऊपर लिखी बातें मुख्यमंत्री ने चतरा संसदीय क्षेत्र के बालूमाथ में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही. उनके भाषण का यह अंश वीडियो की शक्ल में वायरल है. उनका इशारा चतरा लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी की तरफ था.
चतरा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे उस प्रत्याशी का कोयला कारोबार से गहरा जुड़ाव है. वह बहुत कम समय (पिछले दो-तीन) साल में ही अवैध कोयला कारोबार कर करोड़पति बना है.
साभार : टीम न्यूज विंग
मुख्यमंत्री अपने भाषण में दो बातें कह रहे हैं. कोयला में लटपट करके कमा लिया है. दूसरा यह कि चुनाव बाद सरकार हिसाब-किताब करेगी. सवाल यह उठता है कि झारखंड में पिछले चार साल व चार माह से तो भाजपा की सरकार है. वह भी जीरो टॉलरेंस वाली. फिर कोयला में लटपट करके कैसे कोई कमा लिया. सवाल यह भी उठ रहा है कि कोयला में लटपट करके कमाई करने की जानकारी मुख्यमंत्री को अब मिली है, या पहले से थी. पहले से थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
टंडवा से चल कर बालूमाथ व चंदवा रेलवे साइडिंग तक पहुंचने वाले कोयला से जंगल में कोयला उतार कर, फिर रात में उसे ट्रक पर लोड कर ईंट-भट्ठों व खुले बाजार तक पहुंचाने का काम पिछले कई सालों से चल रहा है. मीडिया में भी खबरें छपी. फिर भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की.
अवैध कोयला के कारोबारी का पुलिस के शीर्ष अधिकारियों व सत्ता शीर्ष तक इतनी पहुंच है कि लातेहार एसपी के ना चाहने पर भी अवैध कारोबार बेरोक-टोक चल रहा है. क्योंकि एसपी के नीचे के अफसर और एसपी के ऊपर के अफसर अवैध कारोबारियों के साथ हैं. वह भी तब जब झारखंड में कथित रूप से जीरो टॉलरेंस की सरकार है.
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