
Dr Mahfooz Alam
फुटपाथ पर सब्जी फरोश अब्दुल्लाह से जब पूछा गया कि वह इस चुनाव से कैसी सरकार बनाना चाहता है. अब्दुल्ला का बहुत सीधा जवाब था कि वह वैसी सरकार चाहता है जिसके रहते उसके बेटे को उसकी तरह फुटपाथ पर दुकान न लगानी पड़े. वह दिन गये जब मुस्लिम मतदाता पूरे देश में किसी एक पार्टी को वोट देते थे.
अब परिस्थितियां बदल गयी हैं. वह देश के ज्वलंत मुद्दे, अपनी समस्याएं और स्थानीय मुद्दे को आधार बनाकर अपने वोट का इस्तेमाल करता है. राजनीतिक के जानकारों का यह भ्रम भी दूर हो जाना चाहिए कि मात्र मुस्लिम मतदाता ही वोट बैंक हैं.
बल्कि हर जाति यहां वोट बैंक है. जहां तक मुस्लिम मतदाता के वोट बैंक का प्रश्न है तो मुस्लिम समाज की प्राथमिकताएं क्षेत्रवार बदलती रहती हैं. जैसे झारखंड में कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन, बिहार में कांग्रेस-राजद गठबंधन, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट, उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन आदि की ओर इनका झुकाव होता है. जब 2014 में केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी थी और इसके बाद माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया था तो मुस्लिम समाज में भी आशा की किरण जगी थी.
भाजपा के प्रति उनकी सोच में अनुकूल परिवर्तन आया था. लेकिन वहीं जब प्रधानमंत्री ने कश्मीर-पाकिस्तान, गोरक्षा और आतंकवाद के नाम पर अपने भाषणों और साक्षात्कारों का रुख बदला तो सारा भ्रम जाता रहा. इसके बाद दादरी से गुरुग्राम की घटनाएं बहुत कुछ कहती हैं. साथ ही घर वापसी, लव जेहाद, गाय-बीफ के नाम पर पूरे देश में जो आतंक मचाया गया, उससे प्रजातंत्र की भावना की रही सही कसर भी टूटती हुई दिखाई देने लगी.
आज देश में कई ज्वलंत मुद्दे खड़े हैं, उनमें बढ़ती बेरोजगारी और गरीबी एक अहम मुद्दा है. एनएसएसओ (नेशनल सैम्पल सर्वे ऑफिस) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2011-12 और 2017-18 के बीच कृषि के क्षेत्र में तीन करोड़ बेरोजगारी बढ़ी है. इसी प्रकार सीएमआईई (सेन्टर फार मानिटरिंग इण्डियन इकोनोमी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2018 में 1.1 करोड नौकरियां कम हुई हैं.
जिसमें 88 लाख महिलाएं और 22 लाख पुरुषों ने रोजगार गंवाये हैं. यही कारण है कि जन समस्याओं पर जवाब देने की अपेक्षा भाजपा संवेगात्मक मुद्दों को चुनावी मुद्दा बना रही है. लेकिन देश की जनता सब कुछ समझ रही है. भारत हैप्पीनेस इंडेक्स में 133वें स्थान पर आ गया है, जो पाकिस्तान से भी नीचे है.
जो भी राजनीतिक दल देश के विकास के लिए कार्य करेगा, तो मुस्लिम समाज उसे वोट देने में कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं करेगा. सच मायनों में देखा जाये तो आज की तारीख में मुसलमानों को बेहतर शिक्षा, बेहतर नौकरी और दूसरी बेहतर सुविधाओं के पहले जो चाहिए वो है सुरक्षा. मुस्लिम समाज आज जिस असुरक्षा और संशय के माहौल में जी रहा है, उसे देखते हुए यह बहुत हैरतजदा करने वाला भी नहीं है.
अब देखना है कि कांग्रेस या भाजपा किस तरह से मस्लिम वोटरों को अपनी ओर खींचती हैं. या कोई पार्ट इसकी जरूरत समझती भी है या नहीं. इन पार्टियों के उम्मीदवारों की लिस्ट को देखकर इसका अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है.




