JharkhandRanchi

7 लाख लंबित राशन कार्ड आवेदनकर्ताओं में से 65% को नहीं मिला राशन, 35% परिवार को ही मिला लाभ

Ranchi: जन वितरण प्रणाली के तहत बहुत से लाभूकों के आवेदन फिलहाल लंबित हैं. ऐसे में मात्र 35 प्रतिशत परिवार को ही दस किलो अनाज का लाभ मिल सका है. राज्य सरकार ने हाइकोर्ट में इस मामले से संबंधित पीआइएल के जवाब में ये बात स्वीकार की है.

सरकार ने 23 मार्च को घोषणा की थी कि ऐसे परिवार जो जन वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर हैं और जिनका राशन कार्ड का आवेदन लंबित है, उन्हें 10 किलो अनाज दिया जाएगा. सरकार के आंकड़ों के अनुसार लगभग 7 लाख ऐसे परिवार हैं. ऐसे मे 65 प्रतशित परिवार को राशन नहीं मिला.

इसे लेकर आप पार्टी के प्रदेश सचिव राजन कुमार सिंह की ओर से याचिका की गयी. राजन ने जानकारी दी कि याचिका की दूसरी सुनवाई गत 27 अप्रैल को हुई थी. सरकार की ओर से जो जवाब दाखिल किया गया था उससे असंतुष्टि होने पर राजन कुमार ने फिर एक रिमाइंडर दाखिल किया है. जिसपर हाइकार्ट ने 5 मई तक सरकार को विस्तृत जवाब देने को कहा है.

advt

इसे भी पढ़ें- लॉकडाउन, छात्र व मजदूरः समय पर जरुरी कदम नहीं उठाये गये, तो अराजकता फैलने का खतरा

21 दिन बाद भी स्पष्ट नहीं राशन कहां से मिलेगा

हाइकोर्ट मे सरकार की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद राजन ने कहा कि सरकार की योजना सराहनीय है. दुःख की बात है कि यह घोषणा सीमित रह गयी. घोषणा के 21 दिनों बाद इस योजना के लिए राशि आवंटित की गयी. और आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशन कहांं से मिलेगा, जन वितरण प्रणाली दूकान से, मुखिया के पास से या किसी सरकारी कर्मी से.

साथ ही, इससे सम्बंधित सरकारी आदेश में कहा गया कि ऐसे परिवार जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और जिन्होंने कार्ड के लिए आवेदन नहीं दिया है, उन्हें भी अनाज मिलेगा. लेकिन उन्हें इस लॉकडाउन में भी ऑनलाइन आवेदन करना पड़ेगा. यह गरीबों के साथ मजाक से कम नहीं तो और क्या है.

राजन ने कहा कि इसका मुख्य कारण यह है कि 2011 की आबादी को आधार मानकर सरकार हाइकोर्ट में कह रही है कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राज्य सरकार ने अपने 86% ग्रामीणों और 60% शहरी आबादी को राशन देने का लक्ष्य को 99% पूरा कर लिया है.

adv

जबकि सरकार ने कोर्ट को यह नहीं बताया कि 2011 में राज्य की आबादी 3.3 करोड़ थी और अभी कम-से-कम 3.8 करोड़ है. आज की आबादी के अनुसार राज्य में अभी 40-50 लाख लोग हैं जो जन वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर हैं.

इसे भी पढ़ें- केंद्र से तकरार के बीच कोटा में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए महाराष्ट्र से 70 बसें रवाना, झारखंड को नहीं मिली अनुमति

ये वक्त राजनीतिक आलोचना का नहीं

उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक इसका भी जवाब नहीं दिया कि आइसीडीएस योजना के तहत आंगनवाड़ी से छोटे बच्चों, गर्भवती-धात्री महिलाओं को मिलने वाला पोषक आहार तीन महीने से क्यों बंद है. ये वक्त राजनीतिक ओलचना का नहीं है. लेकिन लॉकडाउन के करीब 40 दिन बाद राज्य मे आपातकालीन स्थिति बन गयी है.

राज्य के विभिन्न जिलों में कई लोगों को राशन न मिलने की लगातार खबर आ रही है. सरकार से मांग करते हुए इन्होंने कहा कि बिना राशन कार्ड वालों को तत्काल स्व घोषणा के आधार पर कम से कम 5 किलो अनाज प्रति व्यक्ति-प्रति परिवार दिया जाये. राशन कार्ड के आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन से बदलकर तत्काल ऑफलाइन किया जाए. प्रत्येक आंंगनबाड़ी केंद्र या विद्यालयों में सामुदायिक रसोई शुरू की जाए. इसके अलावा उन्होंने कई अन्य मांग किये हैं.

इसे भी पढ़ें- कोरोना से निजी अस्पतालों में 25 से 40 फीसदी तक घटी मरीजों की संख्या, सावधानी बरतते हुए कर रहे एडमिट

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button