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कोरोना से निजी अस्पतालों में 25 से 40 फीसदी तक घटी मरीजों की संख्या, सावधानी बरतते हुए कर रहे एडमिट

Ranchi : कोरोना के खतरे की वजह से हुए लॉकडाउन का असर हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. बीते एक माह से अधिक होने के बाद कोरोना की वजह से सामान्य बाजार, शिक्षा, उद्योग पर तो असर पड़ा ही है. वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बुरा प्रभाव छोड़ा है. स्वास्थ्य के क्षेत्र पर पड़े असर ने न केवल अस्पतालों की परेशानी बढ़ायी है, बल्कि मरीजों को भी मुश्किल में डाल रखा है.

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सावधानी बरतते हुए कर रहे एडमिट

कुछ तो कोरोना का भय तो कुछ लॉकडाउन की वजह से आवाजाही नहीं होने से शहर के निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में बीते एक माह में कमी आयी है. वहीं चिकित्सा सुविधा की बात करें, तो कुछ निजी अस्पताल सावधानी बरतते हुए गंभीर मरीजों को भर्ती तो कर रहे हैं.  लेकिन कुछ ऐसे भी अस्पताल हैं, जो नये मरीजों को एडमिट कर ही नहीं रहे हैं. अस्पतालों का मरीजों को भर्ती नहीं लेने के पीछे का तर्क पहले से इलाजरत मरीजों की सुविधा का ध्यान रखना है.

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40 फीसदी तक अस्पतालों में कम हुए मरीज

कोकर चौक स्थित सैमफोर्ड अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वे सावधानी बरतते हुए मरीजों को एडमिट कर रहे हैं. पर इससे पहले उनसे तमाम जानकारी ली जाती है. उनकी ट्रैवल हिस्ट्री और ट्रिटमेंट हिस्ट्री दोनों पूछा जाता है. सेनेटाइज करने के बाद ही भर्ती किया जा रहा है.

चूंकि बाहर के मरीज नहीं आ पा रहे हैं, इस वजह से सैमफोर्ड अस्पताल में मरीजों की संख्या में 30 फीसदी तक की गिरावट आयी है.

वहीं ओरमांझी स्थित मेदांता अस्पताल प्रबंधन के जावेद का कहना है कि हम अपने यहां नये मरीजों की भर्ती कर ही नहीं रहे हैं. फिलहाल अस्पताल में लगभग 50 मरीज एडमिट हैं, उनका ही इलाज किया जा रहा है.

इसके अलावा अस्पताल के पुराने इलाजरत मरीजों को सलाह भी दी जा रही है. मेदांता में नये मरीजों को एडमिट नहीं किये जाने की वजह से अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में लगभग 40 फीसदी की कमी है.

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इसी तरह मेन रोड स्थित राज अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोरोना की वजह से मरीजों की संख्या में कमी आना लाजमी है. पर इलाज नहीं कर रहे ऐसा नहीं है. इतना जरूर है कि हम मरीजों की ट्रैवल हिस्ट्री जरूर पूछे रहे हैं.

हमारे यहां न्यूरो और हर्ट के मरीज ज्यादा आते हैं, लेकिन इन दिनों में कमी आयी है. वैसे मरीज जिन्हें लगता है कि दवा देकर छोड़ा जा सकता है, उन्हें एडमिट करने से बचा जा रहा है.

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निजी अस्पतालों में ओपीडी सेवा की जगह फोन परामर्श

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया के आह्वान पर संस्था के झारखंड इकाई के अध्यक्ष राज अस्पताल के चिकित्सक जोगेश गंभीर और सचिव रानी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के डॉ राजेश कुमार के अनुसार, लॉकडाउन के कारण शहर में सरकारी एवं प्राइवेट सारे ओपीडी बंद हैं.

शहर के लगभग सभी अस्पतालों ने निशुल्क टेलीफोन सलाह की व्यवस्था की गयी है. बहुत से रोगियों की शिकायत रहती है कि डॉक्टर उनका फोन अनजान नंबर समझ कर नहीं उठाते हैं. लेकिन अब जरूरत पड़ने पर इन नंबरों द्वारा सीनियर डॉक्टर से टेली कांफ्रेंस की सुविधा भी दी जा रही है.

इन अस्पतालों में फोन पर भी परामर्श

राज हॉस्पिटल, गुरुनानक हॉस्पिटल, भगवान महावीर मेडिका, आर्किड मेडिकल सेंटर, सेंटेविटा हॉस्पिटल, मेदांता देवकमल हॉस्पिटल, बाबा हॉस्पिटल, अरुण ऑर्थो हॉस्पिटल, शाम्भवी कैंसर सेंटर, रांची यूरोलॉजी सेंटर, आयुष्मान हॉस्पिटल, सिद्धार्थ चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, सिटी ट्रस्ट हॉस्पिटल, डी एन प्रसाद आई सेंटर, विवेकानंद हॉस्पिटल, रानी हॉस्पिटल में फोन करके मुफ्त डॉक्टरी सलाह ली जा सकती है.

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