
NewDelhi : मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के पीएम को इतिहासकार रामचंद्र गुहा, अनुराग कश्यप सहित 49 हस्तियों के द्वारा पत्र लिखे जाने के बाद अब 61 सेलिब्रिटीज ने इस पत्र को सिलेक्टिव गुस्सा और गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिश करार दिया है. इन सेलिब्रिटीज में अभिनेत्री कंगना रनौत, लेखक प्रसून जोशी, क्लासिकल डांसर और सांसद सोनल मानसिंह, मोहन वीणा के वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट, फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर और विवेक अग्निहोत्री स्वप्न दास गुप्ता, अशोक पंडित, पल्लवी जोशी, मालिनी अवस्थी, मनोज जोशी, प्रोफेसर मनोज दीक्षित, संध्या जैन, डॉ. विक्रम संपत, प्रतिभा प्रहलाद जैसे लेखक, पत्रकार, लोक कलाकार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग शामिल हैं.
देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारों पर पर चुप थे
इस खुले पत्र में पीएम मोदी को पत्र लिखने वाले 49 कलाकारों और बुद्धिजीवियों को देश का स्वयंभू गार्जियन बता कर तंज कसा गया है. साथ ही उनके पत्र लिखने की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि उसका उद्देश्य राजनीतिक है. पीएम को पत्र लिखने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि नक्सली हमलों में आदिवासियों और गरीबों के मारे जाने पर ये लोग चुप थे.
इन 61 सेलिब्रिटीज ने कहा है कि कश्मीर में जब अलगाववादियों ने स्कूल बंद करा दिये, तब ये लोग कहां थे. जेएनयू में नारेबाजी प्रकरण को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि आखिर इन लोगों ने देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारों पर अपनी बात क्यों नहीं रखी थी
जान लें कि मॉब लिंचिंग पर पिछले दिनों कला, साहित्य और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी 49 हस्तियों ने पीएम को पत्र लिखकर मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर चिंता जताई थी. इस पत्र में अपर्णा सेन, कोंकणा सेन शर्मा, रामचंद्र गुहा, अनुराग कश्यप, शुभा मुद्गल जैसे अलग-अलग क्षेत्र के दिग्गजों के हस्ताक्षर थे. इनके अलावा श्याम बेनेगल, रिद्धि सेन, बिनायक सेन, सौमित्र चटर्जी, रेवती, अनुपम रॉय जैसी हस्तियां भी शामिल थीं. पीएम को संबोधित करते हुए चिट्ठी में लिखा गया था कि देश भर में लोगों को जय श्रीराम नारे के आधार पर उकसाने का काम किया जा रहा है
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