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lockDownEffect : लंबी दूरी की बसों के बंद होने से 2.50 लाख लोग बेरोजगार, 75 करोड़ से ज्यादा  आर्थिक नुकसान

Ranchi : कोरोना महामारी से बचाव के लिए लगाये गये लॉकडाउन ने कई उद्योग-धंधों को प्रभावित किया है. करीब दो माह से अधिक दिनों तक लगे लॉकडाउन के बाद अब कई उद्योग-धंधों को रियायत दी गयी है. धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में जीवन पटरी पर आ रही है. लेकिन अभी भी कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें उनके क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिले. इसमें लंबी दूरी के बस संचालक प्रमुखता से शामिल हैं.

सभी बस संचालकों का यही कहना है कि 80 दिनों से बसों का परिचालन बंद है. जिससे 75 करोड़ का कारोबार सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है. वहीं इससे जुड़े 2.50 लाख लोग सीधे तौर पर बेरोजगार हुए हैं.

संचालकों का कहना है कि आर्थिक नुकसान होने की वजह से आज सभी संचालक के सामने रोजी की समस्या है, जिससे जीवन पर संकट उत्पन्न हो गया है. बस संचालकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग का है कि एक तो उन्हें रियायत दें और जल्द बसों को चलाने के जल्द निर्देश भी जारी करें.

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बस को केवल तीन माह खड़ा ऱखें, तो खर्चा आता है 25.20 करोड़ रूपये

कोरोना संकट काल में लॉकडाउन से आर्थिक परेशानी झेल रहे बस ऑनर्स एसोसिएशन के अनीश बुधिया ने न्यूज विंग से बातचीत की. उन्होंने कहा कि अगर आप एक बस को खरीदकर केवल खड़ा भी कर देते हैं, तो सिर्फ उसके कागजात को अपडेट करने का खर्च ही हर दिन लगभग 800 रूपये  आता है. इस हिसाब से एक महीने का खर्च करीब 24,000 रूपये बनता है.

यानि तीन महीने तक का सिर्फ एक बस पर ये खर्च 72,000 रूपये बनता है. उन्होंने बताया कि राज्य में अभी रजिस्टर्ड बसों की संख्या करीब 3500 से ज्यादा है. यानि बसों को नहीं चलाने पर भी खर्च हर महीने करीब 8.4 करोड़ के आता है. यानि तीन महीने का ये खर्च करीब 25.20 करोड़ होता है.

इंस्टॉलमेंट भरना संचालकों के सामने दूसरी बड़ी समस्या

बस संचालकों के सामने दूसरी समस्या इंस्टॉलमेंट की है. देखा जाये तो राज्य में चलने वाली करीब 80 प्रतिशत बसें इंस्टॉलमेंट पर हैं. यानि 3500 बसों में से करीब 2400 ईएमआइ पर चल रही हैं. एक महीने ईएमआइ करीब 45000 रूपये के आसपास बनता है. इस हिसाब से 3 महीने का चार्ज करीब 1,35000 रूपये आता है. अगर 2400 बसों का चार्ज देखें, तो यह राशि करीब 32.40 करोड़ के करीब हो जाती है.

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2.50 लाख लोगों के समक्ष आ गया है संकट 

उन्होंने कहा कि बस नहीं चलाने से लाखों लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं. अगर रांची से सिमडेगा तक चलने वाली केवल एक बस की बात करें, तो इसमें सीधे तौर पर 15 व्यक्ति प्रभावित होते हैं. इसमें यात्री बुलाने वाले हॉकर, टिकट काटने वाले काउंटर संचालक, एजेंट, बस चालक, कंडक्टर और खलासी शामिल हैं.

वहीं एक राज्य से दूसरे राज्य में चलने वाली एक बस के संचालन में औसतन 20 से 25 लोग जुड़े रहते हैं. यानि बसों के नहीं चलने से 2.50 लाख से ज्यादा लोग आज संकट में हैं. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन पूरी तरह से खत्म होने के बावजूद लम्बी दूरी की बसों का परिचालन सामान्य रूप से होना इतना आसान नहीं है.

बस वालों को इस बात की आशंका है कि जिस तरह लोग सुरक्षात्मक उपाय ढूंढ रहे हैं.  वैसे में लंबी दूरी की बसों से दूर भागेंगे. बसों को सैनिटाइज करने के साथ ही लोगों को सुरक्षा देने में अतिरिक्त खर्च आएगा.

टैक्स और इंश्योरेंस का देना पड़ेगा 17 करोड़ रूपया: कृष्ण मोहन सिंह

रांची बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्य़क्ष कृष्ण मोहन सिंह ने भी ऐसी ही समस्या को बताया. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण लंबी दूरी यानि दो राज्यों में चलाने वाले बस संचालकों की स्थिति काफी खराब हो गयी है.

एक संचालक को दोनों राज्यों में हर तीन महीने में करीब 22000 (11000 – 11000) रूपये टैक्स देना पड़ता है. एक बस का प्रीमियम इंश्योरेंस करीब 1 लाख के करीब आता है. जो महीना का इंश्योरेंस का खर्च 8333 रूपये आता है.

यानि कि तीन महीने में टैक्स और इंश्योरेंस का ही खर्च करीब 47000 रूपये पड़ता है. अगर रजिस्टर्ड 3500 के करीब बसों को इससे जोड़ा जाये, तो सिर्फ तीन महीने में ही करीब 17 करोड़ का नुकसान पहुंचा है. उन्होंने ये भी बताया कि बसों के नहीं चलने से करीब 2.50 लाख लोग सीधे तौर पर बेरोजगार हो गये हैं.

रियायत देने की सीएम हेमंत सोरेन से लगा रहे फरियाद

लॉकडाउन के दौरान हुए करोड़ों के नुकसान को देखते हुए अनीश बुधिया ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रियायत देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि तीन महीने का जो टैक्स होता है, उसे सरकार माफ कर दे.

साथ ही जितना जल्दी हो, उन्हें भी बसों को चलाने की अनुमति दें. अनीश बुधिया ने कहा कि आज अधिकांश यातायात के साधनों को चलाने की अनुमति मिल गयी है. ऐसे में उनकी तरफ भी सरकार ध्यान दें. उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार के बनाये नियमों के तहत ही संचालक बसों को चलायेंगे.

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