
Amit Jha
Ranchi : राज्य में गांवों में जाकर विकास कार्यक्रमों और उसकी जांच करने का पैटर्न अब पुराना हो गया. सरकार अब राजधानी रांची से ही बैठे-बैठे वेरिफिकेशन कराने में लग गयी है. राज्य की 4398 पंचायतों पर “सीधी नजर” रखने की इस मुहिम की सराहना हो रही है.
जूम एप्प, गूगल मीट औऱ ऐसे ही दूसरे साधन का उपयोग करते हुए योजनाओं की वास्तविक परख की जाने लगी है. पंचायती राज निदेशालय के साथ-साथ मनरेगा कमिश्नर के स्तर से हर सप्ताह ग्राम विकास की योजनाओं, मनरेगा कार्यक्रमों की सीधी मॉनिटरिंग की व्यवस्था शुरू किये जाने से अब सकारात्मक बदलाव भी दिखने लगा है.
ऑफलाइन नहीं, ऑनलाइन वेरिफिकेशन
पंचायतों में ली जानेवाली योजनाओं को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर लेते हुए उसकी एंट्री की जाती है. एंट्री की हुई स्कीम के आधार पर ही चयनित योजना पर काम होता है. राशि का लेने-देन होता है. पूर्व में किये गये कार्यों का फिजिकल वेरिफिकेशन विभागीय स्तर से किया जाता था.
हालांकि इस वेरिफिकेशन पर भी कई बार विवाद उठते रहते थे. रिपोर्ट तैयार करने में मिलीभगत की बात आती थी. योजना की क्वालिटी ऐसे वेरिफिकेशन के बाद भी पूरी तरह नहीं सुधरती थी. अब पंचायती राज निदेशालय ने कुछ दिनों पहले एक नया पैटर्न शुरू किया है.
ग्रामीण विकास विभाग और पंचायती राज निदेशक आदित्य रंजन ने इस दिशा में विशेष पहल की है. अब ऑफलाइन के बदले ऑनलाइन वेरिफिकेशन के जरिये योजनाओं की वास्तविकता को परखा जाने लगा है.
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एक दिन में 5 जिलों पर नजर
सप्ताह में पांच दिन ऑनलाइन वेरिफिकेशन निदेशालय स्तर से किया जाता है. इसके लिए हर दिन 5 जिलों को लिया जाता है. इसके लिए क्लस्टर बनाये गये हैं. जिलों को पहले से पता रहता है कि किस दिन और कब उनकी बारी आयेगी. वैसे एक सप्ताह में 24 स्कीमों को सेलेक्ट किया जाता है. इंटरनेट की उपलब्धता के अनुसार जरूरत पड़ने पर इसमें चेंज भी किया जाता है.
जिस योजना पर काम हुआ है, वहां टीम पहले से मौजूद रहती है. इसमें मुखिया या पंचायत प्रतिनिधि, पंचायत सचिव, प्रखंड समन्वयक, डीपीआरओ, डीपीएम, जेई और अन्य स्पॉट पर मौजूद रहते हैं.
अगर कोई लाभुक, लाभुक समिति और वेंडर स्कीम से जुड़ा है तो वह भी वहां रहेगा. निदेशालय स्तर पर पंचायती राज निदेशक, असिस्टेंट डायरेक्टर औऱ एक्सपर्टों की टीम रहती है.
ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये स्कीम की शुरुआत, काम में भुगतान, समय सीमा, व्यय और अन्य जानकारियों को स्पॉट पर मौजूद टीम से कंफर्म किया जाता है. काम में त्रुटि पाये जाने पर संबंधित पक्षों को एक सप्ताह में ठीक करके निदेशालय को सूचित करने की जिम्मेवारी मिलती है.
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गांवों की नयी तस्वीर गढ़ने का प्रयासः निदेशक
पंचायती राज निदेशक आदित्य रंजन कहते हैं कि गांवों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से कई स्कीम चलायी जाती है. पर कई बार जमीनी हकीकत अपेक्षित तौर पर नजर नहीं आती.
ऐसे में अब ऑनलाईन वेरिफिकेशन के जरिये ग्राउंड रियलिटी को परखने के साथ साथ समस्याओं का निदान किया जा रहा है. जिम्मेवार लोगों को कटघरे में खड़ा करने की बजाये उन्हें अपने दायित्वों के निर्वाहन में सजग औऱ ईमानदार बनाना है.
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