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ऑक्सीजन और टैंकर की उपलब्धता पर हाइकोर्ट ने 24 घंटे के अंदर मांगा जवाब 

Ranchi: सदर अस्पताल मामले में बुधवार को हुई सुनवाई में हाइकोर्ट ने ऑक्सीजन और टैंकर की उपलब्धता पर एडवोकेट जनरल से 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट मांगी है. साथ ही कोर्ट ने सलाह भी दी है कि सीसीएल, एचईसी, सेल जैसे कंपनियों के पास टैंकर हो तो सदर अस्पताल को उपलब्ध करायें.

कोर्ट ने कहा है कि सीसीएल, बीसीसीएल और एचईसी सेल जैसी कंपनियां ऑक्सीजन बनाती हैं. अगर ये बनाती हैं तो क्या इनके पास टेंकर है? कोर्ट ने सलाह देते हुए एडवोकेट जनरल से कहा कि इस मामले में भी 24 घंटे में रिपोर्ट कोर्ट को मिलनी चाहिये. अगर इन कंपनियों के पास टैंकर है तो सदर अस्पतालों में मुहैया कराना चाहिये.

ऐसे में कल फिर से कोर्ट में एडोवोकेट जनरल रिपोर्ट पेश करेंगे. फिलहाल कंपनियों के प्रबंधन को सुनवाई में शामिल होने का आदेश नहीं दिया गया है.

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चीफ जस्टिस की बेंच में हुई सुनवाई

मामला सदर अस्पताल के लिये दायर जनहित याचिका से जुड़ा है. सुनवाई चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की बेंच ने की. इस दौरान कोर्ट ने कहा कि अगले दस दिनों में बेड चालू करने का काम पूरा करें बिजेता कंस्ट्रक्शन. नहीं तो कोर्ट की ओर से कार्रवाई की जायेगी.

कंपनी से कोर्ट ने यह भी पूछा कि अस्पताल में कितने दिनों में ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था शुरू होगी. साथ ही कोर्ट ने कहा कि सेल बोकारो और केंद्र सरकार मामले में हस्तक्षेप करें और या तो व्यवस्था विकल्प के तौर पर करें या भाड़े में.

वहीं अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि न के सौ बहाने होते है. काम हो ये जरूरी है. अधिकारी तय करें.

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कोर्ट ने जतायी थी नाराजगी

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सदर अस्पताल में तीन सौ बेडेड सुविधा शुरू नहीं होने पर नाराजगी जतायी थी. कोर्ट ने कहा था कि सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है. जबकि ये बहुत ही गंभीर मामलों में है.

कोरोना काल में भी अस्पताल में उचित सुविधाएं नहीं है. सैंपलों की जांच नहीं होती. उपकरणों की कमी है. ऐसे में जनता को कोई सुविधा नहीं मिल पा रही.

कोर्ट ने कहा कि पांच मई तक अस्तपाल में सभी सुविधायें पूरी की जायें और इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट को दी जायें. ऐसा नहीं होने पर कोर्ट कार्रवाई कर सकता है.

वहीं अस्पताल में ऑक्सीजन बेड की कमी पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जतायी थी.

बता दें कि स्वास्थ्य सचिव और अन्य अधिकारी पर इस पहले ही मामले में हाईकोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है. जिसमें अस्पताल में सुविधाओं की कमी से लेकर बेड के मामलों को कोर्ट में उठाया गया.

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