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नक्सली गजेंद्र उर्फ गज्जू की पत्नी ने लगाया आरोप, कहा पुलिस ने हथियार देकर कराया था फर्जी सरेंडर

Manoj Dutt Deo

Latehar :  झारखंड पुलिस का नक्सली सरेंडर अभियान एक बार फिर से विवादों में आ गया है. ऑपरेशन नई दिशा के तहत सरेंडर कराये गये नक्सली और उसकी पत्नी ने गंभीर आरोप लगाये हैं. नक्सली की पत्नी ने पुलिस के सीनियर अफसरों पर आरोप लगाया है कि पुलिस फर्जी सरेंडर कराती है और निहत्थे सरेंडर करने वालों को हथियार भी पुलिस ही देती है. 

 भाकपा माओवादी का सब जोनल कमांडर गजेंद्र साव उर्फ गुज्जू की पत्नी चन्द्रवती देवी ने बताया कि जब गजेंद्र ने सरेंडर किया था उस समय उसके पास कोई हथियार नहीं था और न ही उनपर कोई मुकदमा था. उनसे पुलिस के एक आला अफसर  ने सरेंडर करते समय कहा था कि हथियार के साथ सरेंडर करोगे तो उसके लिए और 70,000 रुपये अलग से मिलेंगे. सरेंडर किये ढाई वर्ष बीत गये. पर हथियार का रुपया नहीं मिला. वहीं इसी सरेंडर (हथियार के साथ) को लेकर छिपादोहर थाना में दर्ज केस में कोर्ट से दो साल तीन महीने की सजा भी हो गई. इस बाबत हजारीबाग ओपेन जेल में बंद भाकपा माओवादी के सब जोनल कमांडर गजेंदर साव उर्फ गुज्जू ने बताया कि मैं और दस्ता सदस्य कुलदीप मेहता ने साथ में सरेंडर किया था. हथियार लिए पैसे मिलने के बाबत पुलिस के एक आला अफसर की बातों में फंस गया. पुलिस ने मुझे भरपूर मदद करने की बात कही थी. पर जेल जाने पर मुझपर एक के बाद एक 36 केस लाद दिये गये. ढाई वर्षों में मात्र पांच मुक़दमे खत्म हुए हैं और 26 केस ट्रायल पर चल रहे हैं. वहीं पांच केस में अब तक चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है.

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हथियार का पैसा भी नहीं मिला

वहीं भाकपा माओवादी के दस्ता सदस्य कुलदीप मेहता ने बताया कि पुलिस ने पांच लाख रुपया देने का वादा करके सरेंडर करवाया था. मगर मिला मात्र ढाई लाख. सरेंडर के दौरान पुलिस के एक आला अफसर ने मेरे हाथों में हथियार थमाए थे और हथियार के एवज में पन्द्रह हज़ार रुपये देने कि बात कही थी. पर यह पैसा भी नहीं मिला. सरेंडर के पहले मुझपर कोई केस नहीं था. सरेंडर के दौरान पुलिस ने जो हथियार को थमाया था उस मामले में मुझे जेल भेजा गया. बाद में मुझपर पांच केस और डाल दिये गये. डेढ़ माह जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुआ और अभी भी सारा केस ट्रायल पर है. गौरतलब है कि वर्ष 2015 में लातेहार के भाकपा माओवादी के दो नक्सली सब जोनल कमांडर गजेंदर साव उर्फ गुज्जू साव तथा दस्ता सदस्य कुलदीप मेहता ने डीजीपी डीके पांडे के समक्ष सरेंडर किया था. ऑपरेशन नई दिशा के तहत नक्सलियों ने सरेंडर किया था.

 

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