Manish Jha
Ranchi ,06 November : रांची की हात्मा के डुहु बस्तू में रहने वाले युवा खिलाड़ियों महेश तिर्की, आसित कुजूर, गुलाब कुमार आईंद, मनीष चंद्र हेंब्रम और अमर रोशन बाड़ा ने आस्ट्रेलिया में होने वाले ऑस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल इंटरनेशनल कप-2017 में देश का प्रतिनिधित्व किया. इस टूर्नामेंट का आयोजन 5 से 20 अगस्त तक किया गया था. ये सभी युवा खिलाड़ी छोटे -मोटे काम करके अपना घर भी चलाते हैं.इसके अलावा खेती करके परिवार का भरण – पोषण करते हैं और साथ ही अपनी प्रैक्टिस भी जारी रखते हैं.
महेश तिर्की रांची का एकमात्र ऑस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल प्लेयर है
युवा खिलाड़ी महेश तिर्की रांची का एकमात्र ऐसा प्लेयर है जो ऑस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल खेलने में माहिर है. हाल ही में ऑस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से महेश का चयन मेलबर्न में होने वाले टूर्नामेंट के लिए हुआ था. इस टूर्नामेंट में वर्ल्ड के 25 देशों ने भाग लिया था. इस गेम को प्रमोट करने के लिए कोलकाता से कुछ लोग रांची आए हुए थे. इसमें ऑस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल में खेलने वाली इंडिया टीम के कैप्टन सुदीप चक्रवर्ती भी थे.
क्या है आस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल
यहां बता दें कि , आस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल ऑस्ट्रेलिया का पॉपुलर गेम है. इसे फुटबॉल या फुटी के नाम से जाना जाता है. 10 खिलाड़ियों की दो टीमों के बीच इसे खेला जाता है. 18 खिलाड़ियों के अलावा 10 एक्स्ट्रा प्लेयर होते हैं. इसका ग्राउंड क्रिकेट ग्राउंड जितना ही बड़ा होता है. इसमें हाथ और पैर दोनों का इस्तेमाल होता है. खिलाड़ी के नजदीक होने पर हैंड पास देते हैं, जबकि दूर होने पर किक से पास देते हैं. हैंड से गोल करने पर प्वाइंट नहीं मिलते और किक से गोल करने पर प्वाइंट मिलते हैं. यह पूरा गेम 120 मिनट का होता है. महेश तिर्की रांची का एकमात्र ऐसा प्लेयर है जो ऑस्ट्रेलियन रुल्स फुटबॉल में पहले भी मैच खेल चुका है और इनका कहना है कि, इस खेल को झारखंड खेल विभाग द्वारा अधिक से अधिक युवाओं के बीच जानकारी प्रकाशित करनी चाहिये.
खिलाड़ियों को सही प्लेटफॉर्म की है जरूरत
वहीं इस बारे में महेश के साथ ही अन्य खिलाड़ियों ने भी कहा कि, हमलोग अपने टीम के कोच और खिलाड़ियों के द्वारा खेल मंत्रियो से मुलाकात करके इस खेल से अवगत कराया. लेकिन हमें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. इसके साथ ही युवा खिलाड़ियों का कहना था कि , ऐसे कई युवा हैं, जो इससे जुड़ना चाहते हैं. लेकिन उन्हें कोई प्लेटफॉर्म नहीं मिल पा रहा है. अगर इस खेल के प्रति खेल- कूद युवा- कार्य विकास मंत्री थोड़ा भी ध्यान दें तो झारखंड के फुटबॉल खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो जायेगा.




