
धनबाद के आदिवासी बहुल गांव रेगुनिटांड़ में नहीं पहुंची विकास की कोई किरण, गांव के लोग पेयजल के लिए एक हैंड पम्प पर हैं निर्भर, पीएम आवास, उज्ज्वला योजना से हैं वंचित
Kumar Kamesh
Dhanbad: विकास की कोई किरण धनबाद के आदिवासी बहुल गांव रेगुनिटांड़ में नहीं पहुंची. तभी तो बिना अपराध विकास से कोसों दूर है धनबाद नगर निगम के वार्ड 23 का आदिवासी बहुल गांव रेगुनिटांड़. किस अपराध का दंश झेलने पर मजबूर हैं यहां के आदिवासी, वे नहीं समझ पाते.
धनबाद जिला मुख्यालय से महज 4 किमी की दूरी पर स्थित आदिवासी बहुल रेगुनिटांड़ गांव में पेयजल की भीषण समस्या है. एक चापानल और 60 मुंडा परिवारों का घर एक चापानल के भरोसे सालों से है. कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हैं. अगर हैंडपम्प खराब हो गया तो गांव में पेय जल की समस्या को सहज समझा जा सकता है.
यहीं से गुजरती हैं नेताओं की गाड़ियां
60 आदिवासियो का रेगुनिटांड़ आदिवासी बहुल गांव सड़क किनारे खपरैल घरों का बस्ती जैसा है. तंत्र के पदाधिकारियों से लेकर सभी पार्टी के नेताओं का काफिला भी इस रेगुनिटांड़ बस्ती से लगी सड़क से गुजरता है. आदिवासी के कथित ठेकेदार भी गुजरते हैं.
लेकिन किसी ने भी इस गांव के ग्रामीणों की सुधि लेने की कोशिश तक नहीं की. विडम्बना देखिये यहां बसे आदिवासियों को यह तक नहीं मालूम कि इंदिरा आवास क्या है, प्रधानमंत्री अवास योजना क्या है. इन ग्रामीणों को नही मालूम कि उन्हें अब उज्ज्वला गैस योजना का लाभ मिलना है. ग्रामीण आज भी लकड़ी पर खाना बनाते हैं.
सांसद, विधायक और मेयर, किसी ने नहीं दिया ध्यान
धनबाद से तीसरी बार सांसद बने भाजपा के पशुपति नाथ सिंह की आजतक धनबाद जिले के रेगुनिटांड़ पर नजर नहीं पड़ी. धनबाद विधायक राज सिन्हा भी यहां आने से गुरेज किये. मेयर चन्द्रशेखर अग्रवाल को रेगुनिटांड़ पर ध्यान तक नहीं. और सरकारी तंत्र को फुर्सत नहीं कि धनबाद जिले के रेगुनिटांड़ जैसी बस्ती पर नजर फेरे. तभी तो न बस्ती की तस्वीर बदली न यहां बसे आदिवासियों के हालात की तकदीर. सड़कों से जुड़े इस गांव की दुर्दशा अपने भाग्य को यह सोचकर कोसती है कि आजादी के 70 साल बाद भी इस गांव में मूलभूत सुविधाओं का विकास नही हो सका.
रेगुनिटांड़ के ग्रामीण क्या कहते हैं
ग्रामीण महिला फूल कुमारी और बेबी कहतीं हैं कि मूलभूत सुविधाओं का आभाव है. गांव में आठ चापानल हैं सात खराब हैं. पर कोई देखने-सुनने वाला नहीं. पेय जल की किल्लत झेलते हैं. ग्रामीण वार्ड पार्षद के पास लगातार चक्कर लगाने की बात कह रहे हैं. कहा कि वार्ड पार्षद सुधि नहीं लेते. जब वार्ड पार्षद पुष्पा देवी से संपर्क साधा गया तो वे नहीं मिल पायीं, उनका मोबाइल बंद मिला.
क्या कहते हैं अधिकारी
वहीं गांव में अब तक विकास नहीं होने के मामले और पेयजल के लिए एक हैंड पम्प पर निर्भर होने के मामले में उप नगर आयुक्त राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बस्ती की समस्या की जानकारी नहीं है. आपके माध्यम से जानकारी हुई है. जल्द ही समस्या का निराकरण के लिए विभाग काम करेगा.
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