Opinion

स्त्री तुम खूबसूरत दिखो और खुद पर गर्व करते हुए जियो

Woman you look beautiful and live proud of yourself
Nidhi Nitya

हां तुम्हारा हक़ है कि तुम खूबसूरत दिखो पर किस शर्त पर? किसकी संतुष्टि के लिए? किस कीमत पर?

तुम खूबसूरत दिखो, क्योंकि तुमको अपनी खूबसूरती से इश्क़ है. तुम खूबसूरत दिखो क्योंकि तुम खुद से प्यार करती हो.

पर दूसरों की अपेक्षाओं पर बने रहने के लिए, दूसरों की नज़रों में “वाह” बने रहने के लिए, या एक खूबसूरत स्टेटस के लिए खूबसूरत बने रहना यदि तुम्हारी मनोदशा या मजबूरी है तो तुम ख़ुद पर दया करना बंद करो. खूबसूरत दिखना ही सम्मान या सफलता है, इस कुंठा से बाहर निकलो. खुद का सम्मान करो. समाज,परिवार और लोगों के सामने शो पीस बनकर नहीं बल्कि गरिमामय अर्थपूर्ण जीवन जीकर. ख़ुद पर गर्व करते हुए जियो.

सुनो स्त्री,

तुम सिर्फ एक गोरा या सांवला रंग नहीं, मोटा या छरहरा शरीर नहीं, सुंदर आकर्षक चेहरा और खूबसूरत ऊंचाई नहीं बल्कि एक खूबसूरत स्त्री हो. तुम हर रंग, हर आकार और हर उम्र में खूबसूरत हो. सराहनीय, आकर्षक और आदरणीय हो.

तुम्हारे लोग तुमसे इसलिए प्यार नहीं करते कि तुम एक खूबसूरत काया हो. बल्कि इसलिए प्यार करते हैं क्योंकि तुम उनका आदर करती हो, उनको प्रेम करती हो, तुम्हारा होना उनको पूर्ण करता है.

और जो तुम्हारे सुंदर शरीर से प्रेम करते हैं इसी क्षण उनका त्याग कर दो. प्रेम की आस्था कभी भी सुंदरता ,रंग, रूप और उम्र पर निर्भर नहीं करते, बल्कि मन के भावों और आत्मा के लगाव से होती है.

श्री देवी बेहतरीन अदाकार थी. उनपर भी खूबसूरत बने रहने का लगातार प्रेशर था. वे नॉर्थ और साउथ कैलिफोर्निया में रिंकल लिफ्टिंग के लगातार ऑपरेशन करवा रही थीं, ताकि उनके चेहरे पर झुर्रियां न दिखे. वो “हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरपी” करवा रही थीं. ताकि वो खूबसूरत दिखती रहें. वे एंटीएजिंग थेरेपी करवा रही थीं और ऐसी दवाएं ले रही थी जो उनकी भूख को कम करे.

इससे उनका रक्त चाप असमान्य हो चला था. इससे वे भीतर से बेहद कमज़ोर हो चली थीं. यही सब कहीं न कहीं उनकी मृत्यु का कारण बना.

क्या उनपर प्रेशर रहा होगा फैन्स के सामने सुंदर बने रहने का? क्या दबाव रहा होगा उनपर 54 की उम्र में भी छरहरा और आकर्षक बने रहने का? क्या उनकी बेटियों को ग्लैमरस मां चाहिए थी? या उनके पति ने अपनी संगिनी पर सदा स्वस्थ रहने की बजाय सदा सुन्दर बने रहने का दवाब बनाया होगा?

सब तो था उनके पास टैलेंट, आदर, सम्मान और प्रतिष्ठा, पैसा और राहत भी. फिर वो कौन सी ग्रंथि है, इस सामाजिक सोच की, जिसने उनको बेचैन किया ?  हम किस तरह के लोग हैं, जो प्रेम करते हैं उससे जो सुंदर है. हम देह के प्रेम तक ही सीमित रह जाते हैं. हम भूल जाते हैं कि प्रेम अपने आप सब सुंदर बना देता है.

मैं अपने प्रेमी और प्रिय जनों की हर कमज़ोरी से, भद्देपन से, कुरूपता से और अपूर्णता से प्रेम करती हूं.

लड़कियों,

संभल जाओ तुम्हारी ख़ूबसूरती तुम्हारे जीवन से अधिक खूबसूरत नहीं हो सकती. जो पर्दे पर खूबसूरत दिखाई देते हैं, उनको वैसा दिखाने के लिए दर्ज़न भर लोगों की एक टीम काम करती है. जो उनका खान-पान और दिनचर्या निर्धारित करती है. घंटों का मेकअप किया जाता और फोटोशॉप से एक-एक फोटो पर काम किया जाता है. जो उनकी हर फोटो को सुंदर दिखाता है.

छोड़ो उन जैसा बन जाना. तुम अपनी तरह बनो, अपना सम्मान करो, अपने आत्मविश्वास को बढ़ाओ. नए और ऊंचे लक्ष्य चुनो और साहसी बनो.

सुनो स्त्री,

तुम्हारे चेहरे पर सफलता की मुस्कान और आत्म गौरव की चमक ही तुम्हारी असली खूबसूरती है.

क्योंकि खूबसूरत दिखना तुम्हारा हक है.

डिस्क्लेमर : ये लेखिका के निजी विचार हैं.

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