
Surjit Singh
मोदी सरकार बैंकों का निजीकरण करने जा रही है. बैंकों में सरकार के शेयर को कम करने जा रही है. क्योंकि सरकार को पैसा चाहिए. सरकार चलाने के लिए. वेतन देने के लिए. और अपनी शाही रहन-सहन को कायम रखने के लिए.
पर, क्या यह एक आम आदमी, आपके लिए उतना ही फायदेमंद है. जितना की बताया जा रहा है. इसके लिए आपको जानना चाहिये. बैंकों का राष्ट्रीयकरण होने से पहले क्या व्यवस्था थी. और क्या होने जा रहा है.
पहले क्या था-कोई सामाजिक सरोकार नहीं
51 साल पहले तक बैंक का राष्ट्रीयकरण किया गया. उससे पहले भी बैंक थे. पर, बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी नहीं होती थी. तब कुछ कॉरपोरेट कंपनियां बैंकों का संचालन करती थी. जिन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं था कि बैंकों का लाभ हर किसी को मिलनी चाहिए. किसानों, कामगारों और गरीब लोगों को भी बैंक लाभ दे. वह सिर्फ फायदे के लिये काम करती थी. उसके बाद भी बैंक डूब जाते थे. कॉरपोरेट घरानों के उद्योगपति पैसा लेकर भाग जाते थे. तब देश का बचत और पूंजी लूटा जाता था. आपने कई हिन्दी फिल्मों में भी यह देखा है.
राष्ट्रीयकरण के बाद क्या हुआ
51 साल पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया. तब सरकार यह तय करने लगी कि बैंक कहां पूंजी लगायेंगे. मतलब किन्हें-किन्हें लोन देने होंगे. तब गरीबों, किसानों और छोटे कारोबारियों को भी लोन दिया जाने लगा. मतलब बैंकों का सामाजिक सरोकार तय किया गया. बैंकों के ब्रांच छोटे बाजारों तक खोले गये. यह सब ठीक निजी बैंकों का उल्टा था, जिसमें सिर्फ उन्हें ही लोन दिया जाता था, जिससे बैंक को फायदा होता था.
सरकारी बैंक को प्राइवेट करने के लिये क्या है तर्क
पहला- प्राइवेट बैंक अच्छी सुविधा दे रहे हैं. एसी कार्यालय होता है. किसी को भी मदद करने के लिए वहां बैंककर्मी मौजूद हैं. सरकारी बैंक में यह सब नहीं होता.
दूसरा- सरकारी बैंकों ने हजारों करोड़ रुपये का लोन ऐसे लोगों को दिया, जो अब लौटा नहीं रहे. एनपीए बढ़ रहा है. अगर पैसे डुबेंगे, तो आम लोगों का ही पैसा डुबेगा. इसलिये इसे बेच देने में ही भलाई है.
तीसरा- केंद्र सरकार को पैसे की जरुरत है. इसलिये बैंकिंग सेक्टर के शेयर बेचकर सरकार पैसा लाये और उसे लोगों पर खर्च करे.
तर्क के विरोध में जो तर्क दिये जा रहे
पहला- प्राइवेट बैंकों में जो सुविधा मिलती है, उसकी दो वजहें हैं. एक तो प्राइवेट बैंक में कम लोगों के खाते हैं. दूसरी यह कि वह ग्राहकों से ज्यादा फीस वसूलते हैं. अगर कोई व्यक्ति किसी लोन का मासिक किस्त देने में देर कर देता है, तो सरकारी बैंक जहां बहुत कम फीस लेते हैं, वहीं प्राइवेट बैंक हजारों रुपये का जुर्माना लगाते हैं. इस लेख को पढ़ने वाला हर व्यक्ति का यही अनुभव होगा. लिंक खराब होने की घटना प्राइवेट बैंक में भी होती है. पर, हमने सरकारी बैंकों के प्रति एक धारणा बना ली है.
दूसरा- यह सही है कि सरकारी बैंकों ने ऐसे लोन भी दिये, जो डूबने वाले हैं. पर, उन्हें ऐसा करने के लिए किसने मजबूर किया. सरकार ने ही नीति बनायी थी कि प्राइवेट कंपनियों को कर्ज दिया जाये. स्टील, माइनिंग समेत अन्य कंपनियों को सरकारी बैंकों ने तो केंद्र की नीतियों के तहत ही लोन दिये. जहां पैसे एनपीए हुए. इसलिये अगर गलती है, तो वह सरकारी बैंकों की नहीं, केंद्र सरकार और उसके लिये नीति बनाने वालों की. यह काम जितना यूपीए के शासनकाल में हुआ, उतना ही एनडीए और मोदी काल में हुआ.
तीसरा- पैसा कमाने के और भी रास्ते हैं. मसलन ज्यादा पैसे वालों और कॉरपोरेट घरानों से ज्यादा टैक्स वसूलना.
लेकिन सरकार अपने घर में रखे सोने को बेचने को कमाई बताने जा रही है.
यह भी याद रखिये
– इसी साल निजी बैंक Yes Bank डूब गया. बचाने के लिये कौन आया. सरकारी बैंक SBI. सरकारी बैंक ने ही उसे बैंक को दुबारा खड़ा करने के लिये कदम उठाया. सरकारी बैंक हैं इसलिये ही यह संभव हो पाया. और लोगों को पैसे को सुरक्षित रखा जा सका. अगर सरकारी बैंक नहीं होते तब लाखों लोगों के पैसे डूब जाते. आज भी सरकारी इंश्योरेंस कंपनी LIC ही Yes Bank के शेयर खरीद कर उसे बचाने का काम कर रही है.
क्या प्राईवेट बैंकों में घोटाले नहीं होते. ICICI बैंक के चंदा कोचर को भूल गये. उन्होंने कैसे पति के लिये बैंक के पैसे का इस्तेमाल किया. फिर उन्हें पद छोड़ना पड़ा.
पिछले दिनों मीडिया में खबर आयी है कि HDFC बैंक में भी वाहन लोन में गड़बड़ी हुई है. इसे लेकर बैंक आंतरिक जांच कर रहा है.
इन तथ्यों से क्या साबित होता है. बैंकों का निजीकरण किया जाना भले ही सरकार, नौकरीपेशा लोगों और कॉरपोरेट घरानों के लिए फायदेमंद हो. पर, आम लोगों, छोटे कारोबारियों, किसानों के लिए यह बहुत बड़ा सदमा होगा. वह बैंकिंग सेक्टर से बाहर हो सकते हैं. और एक बार फिर से उनका महाजनी प्रथा की चपेट में आने का खतरा बढ़ जायेगा. क्योंकि प्राइवेट बैंक का सिर्फ एक ही मकसद होता है, वह यह कि पैसा वहीं लगाओ, जहां से मुनाफा कमाया जा सके.





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