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कोनार डैम का टूटना क्यों न बने चुनावी मुद्दा? लगभग 25 सौ करोड़ की योजना को चूहों ने कुतरा था!

Ranchi: राज्य सरकार की महत्वकांक्षी कोनार सिंचाई परियोजना का डैम टूट जाना एक बड़ा मुद्दा है. विधानसभा चुनाव में क्या इसका असर होगा. इस परियोजना से 65-70 हजार किसान लाभान्वित हाने वाले थे. लेकिन डैम टूटने के बाद इन किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा.

42 सालों से लंबित कोनार नहर परियोजना का उद्घाटन 28 अगस्त को मुख्यमंत्री ने किया. लेकिन उद्घाटन के 12 घंटे के बाद ही कोनार नहर गिरिडीह के बगोदर में टूट गयी. जिससे लाखों की फसल बबार्द हुई. नहर के बहने से विष्णुगढ़ के 19, बगोदर के 35, डुमरी के 22, सरिया के 6, नवाडीह के 3 गांव की फसल बबार्द हुई.

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हालांकि जल संसाधन विभाग की ओर से चार इंजीनियरों को सस्पेंड किया गया. शुरूआत में योजना की कुल लागत 11 करोड़ रखी गयी, लेकिन साल-दर-साल काम पूरा करने में लगभग 25 सौ करोड़ रूपये इस पर खर्च हुए.

Sanjeevani

चूहों के कुतरने को माना गया था कारण

12 घंटों में डैम टूट गयी थी. जिसके बाद सरकार और अधिकारियों की ओर से चूहों के बांध को कुतरे जाने की दलील दी गयी थी. खुद आइपीआरडी ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि बांध चूहों के कुतरने से बही.

नहर टूटने के बाद अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया. जिसमें नहर के लगभग 400 मीटर बांध टूटने की बात सामने आयी थी. जिसके बाद जल संसाधन विभाग को रिपोर्ट तलब की गयी.

हालांकि इसके कुछ दिनों बाद नहर टूटने के मामले में चार इंजीनियरों को सस्पेंड किया गया. लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाइ नहीं की गयी और न ही किसी वरीय अधिकारी या मंत्री ने इसकी जिम्मेवारी ली.

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लगभग आठ लाख के धान और मूंगफली बर्बाद हुई

एक आंकड़े के अनुसार, नहर टूटने से धान और मूंगफली के लगभग आठ लाख रूपये के फसल बर्बाद हुई. डीसी की जांच रिपोर्ट के बाद किसानों की बर्बादी को लेकर एक भी सर्वे नहीं कराया गया.

जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन की ओर से किसानों की भरपायी के लिये अलग से कमेटी नहीं बनायी गयी. इस पर जल संसाधन विभाग का कहना है कि अलग से सर्वे की जरूरत नहीं थी, डीसी की रिपोर्ट ही काफी है.

स्थानीय किसानों से बात करने से जानकारी हुई किसानों को अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है. चुनाव को लेकर भले ही इस पर राजनीति शुरू हो चुकी है. इसके विरोध में कुछ महीनों पहले किसानों ने डैम मरम्मत कार्य भी रोक दिया था, लेकिन इसके बाद भी किसानों को अब तक मुआवजा राशि नहीं दी गयी. ऐसे में देखना है कि क्या यह मुद्दा विधानसभा चुनाव को प्रभावित करेगा.

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