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जिनके भरोसे पूरे रांची की ट्रैफिक व्यवस्था, उस थाने का नहीं अपना भवन

Ranchi: रांची में ट्रैफिक समस्या को लेकर तो कई खबरें आती हैं, लेकिन पूरी रांची की ट्रैफिक व्यवस्था जिनके जिम्मे है, वो ट्रैफिक पुलिसकर्मी ही बदहाली से जूझ रहे हैं. हालात ये है कि ट्रैफिक थानों को अपना भवन तक मयस्सर नहीं है. मजबूरी में दूसरे भवन में ट्रैफिक थाना संचालित होता है. जिसके कारण पुलिसकर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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राजधानी में कुल पांच ट्रैफिक थाने- लालपुर, गोंदा, चुटिया और जगरनाथपुर हैं. किसी थाने का भवन जर्जर और खतरनाक स्थिति में है, तो कहीं ट्रैफिक थाना स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है. जबकि कहीं पुराने छोड़े हुए भवन के दो रूम में ही ट्रैफिक थाना चल रहा है.

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बुनियादी सुविधा तक का है अभाव

थाने का गंदा शौचालय

रांची के ट्रैफिक थाना में बुनियादी सुविधाओं का आभाव है. शौचालय की स्थिति कई जगहों पर खराब है, पानी की भी किल्लत होती है. इनमें से तो कई ऐसे भवनों में थाना चल रहा है कि, देखकर यह लगता है कि क्या यह ट्रैफिक थाना है ? सरकारें कहती है थानों को हाईटेक बनाया जाएगा लेकिन राजधानी रांची में ही ट्रैफिक थानों की स्थिति बदत्तर है.

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स्वास्थ्य केन्द्र में चल रहा यातायात थाना

गोंदा यातायात थाना पुराने स्वास्थ्य केन्द्र में चल रहा है. खंडहरनुमा इस भवन में कभी कोई हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है. वही चुटिया यातायात थाना, पुराने चुटिया थाना भवन में चलाया जा रहा है. दो कमरे के इस भवन में एक प्रभारी कक्ष, तो दूसरे में कार्यालय और बैरेक भी है. एस्बेस्टस का यह भवन काफी पुराना है.

यातायात थाना जगन्नाथपुर, जगन्नाथपुर थाना परिसर में ही पीछे के दो कमरों में दिया गया. यह एस्बेस्टस का कमरा काफी पुराना है. जिसमें एक प्रभारी कक्ष, दूसरे में बैरेक बनाया गया है. जबकि लालपुर यातायात थाना, रांची का सबसे पुराना ट्रैफिक थाना है जो आज भी छप्पर के भवन में चल रहा है. भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी हादसा हो सकता है. वर्तमान में सिर्फ लालपुर यातायात थाना का निर्माण कार्य चल रहा है.

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दो शिफ्ट के बदले एक शिफ्ट में होता है काम

रांची में वर्तमान में लगभग 300 ट्रैफिक पुलिस कार्यरत है. जबकि लगभग 650 पद स्वीकृत है. ट्रैफिक का काम दो शिफ्ट में होना चाहिए था, जो नहीं हो रहा है इस कारण पुलिसकर्मियों को काफी समस्या होती है. ट्रैफिक पोस्ट पर कहीं बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है. जवानों को हमेशा खड़ा होकर ड्यूटी करनी पड़ती है. ऐसे में गर्मी में धूप से तो बारिश में पानी से जवानों को खासी परेशानी होती है.

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बारिश में होती है अधिक समस्या

ट्रैफिक थाना में रहने वाले जवानों के लिए एक बैरेक तो दिया गया है. लेकिन ये भी काफी जर्जर और पुराना है. उसमें रहने वाले जवानों के बीच हमेशा भय का माहौल बना रहता है. बारिश के समय तो समस्या और भी विकराल हो जाती है. पुराने एस्बेस्टस का भवन होने के कारण पानी टपकने लगता है. रात को बारिश के समय, पानी टपकने से सोने तक की समस्या होने लगती है. किसी तरह रात गुजारने को ये पुलिसकर्मी मजबूर हो जाते है.

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