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रांची के चर्च-9: इंग्लैंड की स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है संत पॉल्स कैथेड्रल

[क्रिसमस के पूर्व यह आगमन (यीशु के जन्मपर्व की तैयारी) का समय है. इन दिनों मसीही विश्वासी प्रार्थना और मनन चिंतन में समय बिता रहे हैं. पापों के प्रायश्चित के साथ वे बालक यीशु के आगमन की तैयारी में जुटे हैं. कोविड की वजह से ज्यादातर गिरजाघरों में ऑनलाइन प्रार्थनाएं हो रही हैं. यहां हम रांची के कुछ चर्चों के इतिहास के बारे में संक्षिप्त जानकारी दे रहे हैं.]

Ranchi : बहूबाजार स्थित संत पॉल्स कैथेड्रल इंग्लिश वास्तुकला का शानदार नमूना है. 1870 में इस शानदार इमारत की नींव छोटानागपुर के तत्कालीन कमिश्नर जनरल ईटी डाल्टन ने रखी थी. नींव रखे जाने के बाद तीन सालों में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ. इसका उद्घाटन कोलकाता के बिशप मिलमैन ने किया था. विधिवत संस्कार के बाद इसमें आराधना की जाने लगी.

यह चर्च गोथिक शैली का नायाब नमूना है. इसमें सरलता और भव्यता दोनों ही दिखते हैं. चर्च के सामने खड़े होने पर इसका विशाल गुंबज दिखता है. इसी में चर्च की विशाल घंटी भी लगी है. इसकी नींव 12 सितंबर, 1870 को छोटानागपुर के तत्कालीन कमिश्नर जनरल ईटी डाल्टन ने रखी थी.

इस चर्च के अंदर कई खास चीजें है. पहली चर्च की विशाल पाइप ऑर्गन है. यह करीब 140 साल पुरानी है. आज भी इस पाइप ऑर्गन को रविवारीय आराधना, क्रिसमस और खास अवसरों पर बजाया जाता है. इस चर्च में दूसरी खास चीज पीतल का बना ऊकाब (पक्षी) की शक्ल का एक स्टैंड है. यह काफी पुराना है और कलात्मक भी. इस पर आराधना के समय पवित्र ग्रंथों को रखकर पढ़ा जाता है. पादरी इसी स्टैंड पर से अपने संदेश को सुनाते हैं.

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इस चर्च के अंदर दो विशाल चेन पर झूमर लगे हुए हैं. इन झूमर पर पहले मोमबत्तियां लगायी जाती थीं, आजकल इसमें बल्ब लगाये गये हैं. इन झूमर से होकर रोशनी कैथेड्रल के अंदर अदभुत प्रभाव छोड़ती है.

छोटानागपुर में ईसाइयत को प्रभावी बनाने में इस चर्च का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसी चर्च में पहली बार 1873 में पांच देशी लोगों का डिक्कन के रूप में पदाभिषेक किया गया था. लोग अपने समय में चर्च सर्विस को संपन्न कराने में सहयोग करते थें.

1957 से पहले तक छोटानागपुर डायसिस में विदेशी बिशप रहे. परंतु 13 अक्टूबर, 1957 को पहले भारतीय बिशप के रूप में दिलबर हंस का पदाभिषेक किया गया. वर्तमान में छोटानागपुर के 11वें बिशप के रूप में बीबी बास्के अपना योगदान दे रहे हैं.

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