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शिक्षामंत्री के वायदे के तीन माह बाद भी नहीं हुई पारा टीचर्स के स्थायीकरण व वेतनमान की मांग पूरी, अब आंदोलन की तैयारी

Ranchi. राज्य के 65 हजार पारा टीचर्स के स्थायीकरण और वेतनमान को लेकर राज्य के शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो की ओर से किया गया वायदा तीन माह बाद भी पूरा नहीं हो पाया है. बीते 9 जून को पारा टीचर संघ और शिक्षा मंत्री के साथ बैठक हुई थी. इस बैठक में शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने पारा टीचर संघ को स्थायीकरण करने और वेतनमान देने का वायदा किया था. इसके लिए पारा टीचर की मांग को कैबिनेट में रखने की बात भी कही थी. लेकिन वायदे के तीन माह पूरा हो जाने पर भी पारा टीचर्स के हित में कोई निर्णय नहीं हो पाया है.

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सरकार के इस रवैये के बाद एकीकृत पारा टीचर संघर्ष मोर्चा की राज्य इकाई ने एक बार फिर आंदोलन की रास्ता चुनने की बात कही है. इस संबंध में एकीकृत पारा टीचर संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने सरकार से पारा टीचर्स के स्थायीकरण व वेतनमान की नियमावली को अविलंब कैबिनेट से पारित करने की मांग की है.

कभी विधि तो कभी शिक्षा विभाग में झूल रही फाइल
मोर्चा के पदाधिकारियों ने बयान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव पूर्व अपनी प्रत्येक सभामें सरकार गठन के 3 माह में स्थायीकरण व वेतनमान का वायदा किया था. इसे जेएमएम के घोषणा पत्र में भी शामिल किया गया है. फिर भी सरकार गठन के 8 माह बीत जाने के बावजूद स्थिति यथावत है. वहीं 5 फरवरी एवं 9 जून को उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक होने के बाद भी प्रस्तावित नियमावली विभागों के पेंच में उलझी है.

कभी विधि तो कभी शिक्षा विभाग में फाइल झूल रही है. मोर्चा ने कहा है कि बीते 17 -18 वर्षों से अपने भविष्य को लेकर सूबे के 65 हजार पारा टीचर इस सरकार से कल्याण की आस लगाये बैठे हैं. लगभग हर दिन कोई न कोई पारा टीचर की मृत्यु हो रही है. बिना किसी लाभ के सेवानिवृत्त हो रहे हैं. उनके परिजन दर दर की ठोकरें खाने को विवश हैं.

करेंगे चरणबद्ध आंदोलन
15 अगस्त के बाद राज्य इकाई का एक शिष्टमंडल शिक्षा मंत्री से मिलेगा. नियमावली सहित पारा टीचर्स की विभिन्न तात्कालिक समस्याओं पर बात रखेगा. यदि 4 सितंबर तक नियमावली कैबिनेट से पारित नहीं हुई तो बाध्य होकर 5 सितंबर 2020 से चरणबद्ध आंदोलन प्रारंभ किया जायेगा. आंदोलन कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा 15 अगस्त के बाद राज्य इकाई व जिला इकाई के अगुआ साथियों से व्यापक विचार विमर्श कर घोषित की जायेगी.

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