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निगम के खाली खजाने का सच: विकास के नाम पर जनप्रतिनिधियों ने बर्बाद किये करोड़ों, अब मांग रहे जनता से मदद

  • राज्य सरकार से मदद नहीं मिलने का मेयर का आरोप

Ranchi :  कोरोना को लेकर 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद राजधानी को व्यवस्थित रखने का पूरा जिम्मा रांची नगर निगम का है. इस दौरान निगम सभी वार्डों में साफ-सफाई करने का दावा भी कर रहा है. तो दूसरी तरफ मेयर आशा लकड़ा कह रही हैं कि निगम का खजाना पूरी तरह से खाली है.

उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार ने निगम को कोई मदद नहीं दिया है. इसे देखते हुए मेयर ने जहां राजधानी के लोगों से निगम को आर्थिक मदद देने की बात कही है. वहीं इन्होंने और डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने अपने नागरिक सुविधा मद से निगम को 1-1 करोड़ की आर्थिक मदद भी की है.

दरअसल निगम का खजाना खाली होने के पीछे की सच्चाई ये है कि, विकास के नाम पर निगम जनप्रतिनिधियों के किये बेवजह करोड़ों रुपये खर्च किये हैं. इन जनप्रतिनिधियों ने निगम क्षेत्र में ऐसे कई कामों में करोड़ो खर्च किये हैं, जिसका सही ढंग से अभी तक उपयोग ही नहीं किया गया है. अगर इस राशि को निगम के लिए बचाकर रखा जाता, तो शायद आज मेयर को यह नहीं कहना पड़ता कि निगम के पास राशि की कमी हो गयी है.

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दो ऐसी योजनाएं जिसमें 32 करोड़ तक हुए बर्बाद

रांची नगर निगम ने अपने क्षेत्राधिकार में दो ऐसी योजनाओं पर काम किया है, जिसमें करीब 32 करोड़ रूपये तक बेवजह बर्बाद कर दिये गये हैं. इसमें पहली योजना कांके में बना स्लॉटर हाउस और दूसरी बड़ा तालाब सौंदर्यीकरण की योजना है. इसमें पहली योजना स्लॉटर हाउस में कुल 18 करोड़ खर्च किये गये थे.

मीट काटने के लिए कई अत्याधुनिक मशीनें विदेशों से मांगयी गयी थीं. लेकिन योजना अभी तक अधर में लटकी है. जिस तरह से राजधानी के मीट कारोबारियों ने इसका विरोध किया है, उससे तय है कि योजना का भविष्य में भी सफल होना संभव नहीं.

बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण पर निगम अभी तक कुल 14 करोड़ खर्च कर चुका है. लेकिन तालाब के आसपास और उसके अंदर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है.

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नगर विकास विभाग ने भी लुटाये करोड़

इसी तरह से ऐसे कई उदाहरण हैं, जिसमें नगर विकास विभाग ने करोड़ों रुपये बेवजह खर्च किये हैं. तत्कालीन नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने निगम क्षेत्र के अंतर्गत कांके में बनने वाले अर्बन हाट (हालांकि पूर्ववर्ती सरकार ने यहां अब स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाने की योजना बनायी थी), कांटा टोली में बने प्लाईओवर जैसी योजनाएं शामिल हैं.

अर्बन हाट की योजना करीब 20 करोड़ की थी. इसमें कई करोड़ खर्च कर निर्माण काम भी शुरू कराया गया था. बाद में पूर्व सीएम रघुवर दास ने यहां निर्माणाधीन अर्बन हाट को स्किल डेवलपमेंट सेंटर के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया.

डीपीआर में संशोधन किया गया. योजना की लागत भी करीब 10 करोड़ से बढ़कर 30 करोड़ रुपये हो गया. हरमू प्लाईओवर निर्माण में भी लाखों खर्च कर पीलर निर्माण का काम शुरू हुआ. लेकिन ऐसी योजनाएं भी अब अधर में लटकी है.

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