
Principal Correspondent
Ranchi: प्रदेश भाजपा अब कमर कस रही. साल के आखिर में झारखंड में असेंबली इलेक्शन जो हैं. इसमें यह भी तय है कि इलेक्शन तक पार्टी की कमान प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के ही हाथों रहेगी. मतलब उनकी कप्तानी में ही सियासी पिच पर प्रदेश भाजपा खेलेगी. भले लोकसभा चुनाव में बाबूलाल की मेहनत के बावजूद झारखंड में चौदहों सीट जीतने में भाजपा पिछड़ गयी हो. यहां तक कि 2019 के परिणाम (12 सीट, एक आजसू पार्टी) भी रिपीट वह ना कर सके हो. और बाबूलाल के लिए यह दावा हवा हवाई दावा नहीं, विधानसभा चुनाव के लिए नवनियुक्त प्रभारी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा झारखंड आकर कर दी है. उनकी इस घोषणा से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा को अब भी अपने बाबूलाल जैसे फेमस ट्राइबल लीडर पर भरोसा है. उसे लगता है कि सत्तारूढ झामुमो, कांग्रेस, राजद की सरकार को परास्त करने में बाबूलाल कारगर सूरमा साबित होंगे.
चार दर्जन से अधिक असेंबली सीट पर लीड
दरअसल भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रभारी (झारखंड) शिवराज सिंह चौहान और सह प्रभारी हिमंता विश्वा सरमा नयी जिम्मेदारी मिलने के बाद पहली बार झारखंड आए. रविवार को पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायकों संग बैठक की थी. इसके बाद मीडिया से बात करते शिवराज ने लोकसभा चुनाव में 9 सीटें जीतने पर खुशी जाहिर की थी. कहा था कि पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं ने घनघोर परिश्रम किया. इसका नतीजा यह भी रहा कि 52 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने लीड किया है. अब आगे असेंबली इलेक्शन में बाबूलाल ही चुनाव को लीड करेंगे. वे और सरमा बाबूलाल की टीम को सपोर्ट देंगे.
गुटबाजी मसला नहीं
लोकसभा चुनाव के बाद पिछले दिनों अलग अलग क्षेत्रों में भाजपा की समीक्षा बैठक हुई. इसमें आपसी गुटबाजी, विरोध, कलह की भी खबरें बाहर आयीं. देवघर में निशिकांत दुबे, नारायण दास के बीच आपसी कलह की खबर हो या दुमका कैंडिडेट सीता सोरेन का विधायक रणधीर सिंह और पूर्व मंत्री लुईस मरांडी पर उंगली उठाने का मसला हो, मीडिया में खुब सुर्खियां बनीं. इन सबके बीच रविवार को प्रदेश कार्यालय में शिवराज सिंह चौहान और हिमंता के सामने हुई बैठक महत्वपूर्ण रही. हालांकि हिमंता विश्व सरमा ने ऐसी बातों को मीडिया के सामने सिरे से खारिज किया. कहा कि विपरीत परिस्थिति के बावजूद एनडीए ने यहां 14 में से 9 सीटें जीती हैं. 41 विधानसभा सीटों पर जीत से यहां बहुमत मिलता है जबकि इस लोकसभा चुनाव में 52 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने लीड किया है. मतलब गुटबाजी मसला नहीं सो यह परिणाम मिला.
बाबूलाल को फ्री हैंड
शिवराज के भरोसे और दावे के बाद यह बात साफ है कि बाबूलाल मरांडी को विधानसभा चुनाव तक बड़ी जिम्मेदारी निभाने को फ्री हैंड मिलेगा. वे प्रभावी तरीके से चुनावी रणनीति और धरातल पर उसे उतारने, कैंडिडेट सलेक्शन और दूसरे मसलों पर अपना रोल प्ले करेंगे. इस हिसाब से विधानसभा चुनाव के बाद ही पता लगेगा कि झारखंड की सियासत में बाबूलाल कितने प्रासंगिक और धारदार लीडर साबित हो रहे हैं. यह उनके लिए लिटमस टेस्ट तो नहीं.
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