
रिम्स में दवा के लिए दलाली जोरों पर है. रिम्स के ओपीडी में दवा दुकानों के दलाल आसानी से मरीजों की पर्ची पकड़ कर अपनी दुकान ले जाते देखे जा सकते हैं. ये यहीं नहीं रुकता है, यहां के डॉक्टर भी किसी एक दुकान पर ही मिलने वाली दवा लिखते हैं, जो किसी अन्य दुकान में आपको नहीं मिलेगी. डॉक्टरों ने उगाही के नाम पर दवा दुकानों से सेटिंग कर ली है. जहां से वे दवा लिखने के बदले दाम का बीस से चालीस प्रतिशत कमीशन के रूप में लेते हैं.
Ranchi : रिम्स में दवा के लिए दलाली जोरों पर है. रिम्स के ओपीडी में दवा दुकानों के दलाल आसानी से मरीजों की पर्ची पकड़ कर अपनी दुकान ले जाते देखे जा सकते हैं. ये यहीं नहीं रुकता है, यहां के डॉक्टर भी किसी एक दुकान पर ही मिलने वाली दवा लिखते हैं, जो किसी अन्य दुकान में आपको नहीं मिलेगी. डॉक्टरों ने उगाही के नाम पर दवा दुकानों से सेटिंग कर ली है. जहां से वे दवा लिखने के बदले दाम का बीस से चालीस प्रतिशत कमीशन के रूप में लेते हैं.
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डॉ जेनरिक नहीं ब्रांडेड दवा ही लिखते हैं

डॉक्टर जेनरिक दवा ना लिखकर ब्रांडेड कंपनी की महंगी से महंगी दवाई मरीजों को लेने के लिए मजबूर कर देते हैं. गरीब मरीज जब सस्ती दवा लिखने का आग्रह करता है, तो ना डॉक्टर सुनते हैं और ना ही जूनियर डॉक्टरों को इसकी कोई परवाह होती है. खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ता है या तो वे कर्ज में डूब जाते हैं, या फिर मरीज को उनकी दलाली की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.
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राजधानी मेडिकल से दवा लाने के लिए कहते हैं डॉक्टर
धनबाद जिले के भूली पंडरपाला के रहने वाले मनोज कुमार साहू ने कहा कि उनकी मां लीला देवी को लकवा मार दिया था. जिसके बाद उनका इलाज रिम्स मेडिसिन वार्ड में डॉ उमेश प्रसाद की यूनिट में चल रहा है. डॉक्टर काफी महंगी दवाई लिखते हैं और राजधानी मेडिकल से दवा खरीदने के लिए कहते हैं. उन्होंने कहा कि दो दिन में दस हजार रुपये की दवा खरीद चुका हूं, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है. मेडिसिन वार्ड के डॉक्टरों ने रिम्स की पर्ची में दावा न लिखकर छोटे से कागज के पुर्जे पर दवा का नाम लिखकर दिया है. उन्होंने डॉक्टरों से जेनरिक दवा लिखने की अपील की है, जिसे खरीदने में आसानी हो.
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