
रांची के प्रो. एसए बनर्जी और मिस बनर्जी हार्ट के मरीज हैं. 90 और 82 वर्ष के इस पड़ाव में इन दोनों की जिंदगी दवाओं पर ही टिकी है. कार्तिक उरांव कॉलेज गुमला से सेवानिवृत्त हुए गोपाल कृष्ण पांडेय को एनीमिया है और उन्हें हर माह बल्ड चढ़वाना पड़ता है. इन्हें पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिली है. अब नौबत ये है कि इन्हें दवा के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ रहा है. लगभग 2900 लोग रांची विश्वविद्यालय के पेंशनर्स हैं. इन्हें पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिली है. इनकी भी स्थिति लगभग वैसी ही है, जो दवा के लिए दूसरों पर आश्रित हैं.
Md. Asghar Khan
Ranchi : रांची के प्रो. एस ए बनर्जी और मिस बनर्जी हार्ट के मरीज हैं. 90 और 82 वर्ष के इस पड़ाव में इन दोनों की जिंदागी दवाओं पर टिकी है. कार्तिक उरांव कॉलेज गुमला से सेवानिवृत हुए गोपाल कृष्ण पांडे को एनिमिया है और उन्हें हर महीना बल्ड चढ़वाना पड़ता है. ऐसी ही संख्या लगभग 2900 प्रोफेसर, थर्ड और फॉर्थ ग्रेड कर्मचारियों की है, जो रांची विश्वविद्यालय पेंशनर्स हैं. इन्हें पिछले तीन माह से पेंशन नहीं मिला है. अब नौबत ये है कि दवा तक के लिए दूसरे का मोहताज होना पड़ रहा है.
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इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है पेंशनरों को
प्रो बनर्जी आरयू से सेवानिवृत्त हैं और उन्हें ब्रेन हेमरेज भी हो चुका है. कई साल से बेड पर हैं. वे कहते हैं कि बच्चों के बाहर रहने के कारण मेरे लिए पेंशन ही जीने का सहारा है. प्रो पांडेय दो बार बल्ड चढ़वाने के लिए दूसरे से कर्ज ले चुके हैं. उधर यूनिर्वसिटी पहले ही सरकार को पत्र लिखकर अवगत करा चुकी थी कि पेंशन मद की राशि नहीं है. ये बात संज्ञान में आने के बावजूद भी सरकार की तरफ अबतक कोई व्यवस्था नहीं की गयी.
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राशन बंद है और बच्चा बेरोजगार
तृतीय तबके के सेवानृवित्त कर्मचारी मंतू राम का एक ही बच्चा है, जो बेरोजगार है. मंतू राम बताते हैं कि बेटा और उसके चार बच्चे समेत पूरे परिवार का खर्च मेरे दस हजार की पेंशन से ही चलता है. तीन माह से पेंशन नहीं मिलने की वजह से अब दुकानदार ने राशन भी देना बंद कर दिया है. यही हाल रहा, तो नौबत भुखमरी की आ जायेगी. आरयू के रिटायर्ड प्रो. विजय का कहना है कि पेंशन रुक जाने से कई सारी समास्याएं हो रही हैं. राशन-पानी से लेकर दवा तक के लिए परेशान हैं. वह बताते हैं कि ये समास्या उन तमाम पेंशनर्स की है, जिन्हें दिसंबर 2017 से पैसा नहीं मिला है.
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यूनिवर्सिटी के इंटरनल सोर्स से हो भुगतान
फेडरेशन ऑफ रिटायर्ड टिचर्स एसोसिएशन झारखंड के अध्यक्ष बबन चौबे कहते हैं कि ज्यादातर पेंशनर्स बूढ़े हैं और किसी न किसी बिमारी से ग्रस्त हैं. इन लोगों के समक्ष जीवन यापन के लिए संकट आ खड़ा हो गया है. पेंशन नहीं मिलने के कारण चारो तरफ से तकादा हो रहा है. हमलोग सरकार से अनुरोध करते हैं कि एक तारीख को पेंशन का भुगतान हो. पहले की तरह ही यूनिवर्सिटी के इंटरनल सोर्स से ही पेंशन दिया जाए ताकि इस तरह की दिक्कत का सामना नहीं करने पड़े.
क्या है समस्या
रांची विश्विद्लाय के अंतर्गत राज्य के विभिन्न कॉलेज से लगभग 29,00 पेंशनर्स हैं, जिनमें 1200 के आस-पास प्रोफेसर और टिचर्स हैं. जबकि इसके अलावा थर्ड और फॉर्थ ग्रेड के कर्मचारी पेंशनर्स हैं. पिछले तीन माह से इन्हें पेंशन नहीं मिला है, क्योंकि रांची यूनिवर्सिटी के पेंशनर्स मद में राशि नहीं है. आरयू में सैलरी और पेंशन दोनों के लिए अलग-अलग मद है, जिसमें सरकार के ट्रेजरी से पैसा दिया जाता है. पेंशन की समस्या इसलिए भी हो रही है क्योंकि अब इन पेंशनर्स को सरकार अपने ट्रेजरी से पेंशन दे रही है. जबकि इससे पहले इन्हें कॉलेज के इंटरनल सोर्स से पेंशन दिया जाता था. एचआरडी विभाग ने इस प्रक्रिया को मार्च 2017 से बंद कर दिया है.
सरकार ने नहीं दी अनुमति
इस समस्या के बारे में रांची यूनिवर्सिटी के कुलपति रमेश पांडे ने कहा कि दिसंबर 2017 में ही राज्य सरकार को पत्र लिखकर कह दिया था कि पेंशन मद में पैसा नहीं है. उन्होंने कहा कि मांग भी की थी, जबतक ये राशि सरकार उपलब्ध नहीं कराती है, तबतक हमें कॉलेज के इंटरनल सोर्स से पेंशन देने की अनुमति प्रदान की जाए. लेकिन पत्र का उत्तर प्राप्त नहीं हुआ. इसी कारण यूनिवर्सिटी इन्हें पेंशन उपलब्ध कराने में असमर्थ रही. उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार ने बिल बनाकर एचआरडी विभाग को जमा कर दिया है. जल्द ही सभी को पेंशन मिल जायेगा.
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