
Bengaluru : कर्नाटक में सियासी घमासान चरम पर है. खबरों के अनुसार कांग्रेस-जेडी(एस) गठबंधन सरकार अपने 13 विधायकों को लेकर असमंजस की स्थिति में है. इन विधायकों में 10 कांग्रेस के और दो निर्दलीय हैं. बता दें कि ये विधायक लगातार दूसरे दिन भी विधानसभा के बजट सत्र से गायब रहे. अब सरकार को डर सता रहा है कि कहीं इन विधायकों की गैरमौजूदगी भाजपा के ऑपरेशन लोटस की सफलता की ओर इशारा तो नहीं कर रही. जानकारों के अनुसार अभी भी आंकड़े पूरी तरह पक्ष में नहीं होने से भाजपा भी ऑपरेशन लोटस की सफलता को लेकर संशय में है. भाजपा सूत्रों के अनुसार गायब विधायकों में से 12 मुंबई में हैं और एक विधायक हाल में ही में वहां पहुंचे हैं. एक पार्टी कार्यकर्ता के अनुसार 13 में से छह पवई स्थित रेनेसॉ होटेल में और बाकी सांताक्रूज के होटेल सहारा प्लाजा में है. इस मामले में महाराष्ट्र भाजपा के एक कैबिनेट मंत्री ने उन अटकलों को बढ़ावा दिया है कि पार्टी अभी भी आंकड़ों की तिकड़म लगाने की जुगत में है. हालांकि, अगर कम से कम 16 विधायक भाजपा नहीं जुटा पायी तो कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिराने का ऑपरेशन फेल हो जायेगा.
सिद्धारमैया ने पार्टी के बागी विधायकों पर कार्रवाई के संकेत दिये
कांग्रेस के चार बागी और कुछ असंतुष्ट विधायकों के कारण राज्य में कुमारस्वामी सरकार पर संकट बरकरार है. खबरों के अनुसार कर्नाटक में कांग्रेस के नेता व पूर्व सीएम दिये हैं. सिद्धारमैया ने कहा है कि वह एक याचिका दायर कर विधानसभा स्पीकर से पार्टी के चार विधायकों को निलंबित करने की मांग करेंगे. वहीं, कांग्रेस नेतृत्व के इस फैसले से पार्टी में हड़कंप मच गया है. बता दें कि कांग्रेस की ओर से जारी व्हिप के बावजूद भी पार्टी के चार विधायक बुधवार को बजट सत्र के पहले दिन सदन से गायब थे. इन विधायकों में कांग्रेस के बागी विधायक रमेश झारकिहोली, महेश कुमातल्ली, उमेश जाधव और बी. नागेंद्र संपर्करहित के नाम शामिल है. वहीं, कांग्रेस विधायक दल(सीएलपी) के नेता सिद्धारमैया ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये सदस्य शुक्रवार को सीएलपी की बैठक में शामिल नहीं होते हैं तो उन पर सख्त कार्रवाई की जायेगी.
सिद्धारमैया ने ऐसे लोगों पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की बात कही थी. कर्नाटक में जनता दल-सेकुलर(जेडी-एस) और कांग्रेस के महागठबंधन वाली सरकार है. सीएम एच.डी. कुमारस्वामी को शुक्रवार को अगले वित्तीय वर्ष(2019-20) के लिए बजट पेश करना है. ऐसे में सदन में सभी विधायकों की मौजूदगी जरूरी बताई गयी थी.




