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मायावती और अखिलेश से तेजस्वी की मुलाकात: महज शिष्टाचार या गठबंधन में बदलाव की कोशिश !

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Lucknow: यूपी में सपा-बसपा के साथ आने के बाद से देश की राजनीति गरमायी हुई है. एक ओर जहां कांग्रेस ने इस गठबंधन के बाद अकेले 80 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है. वहीं रविवार रात राजद नेता और लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने बसपा प्रमुख से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया. मायावती के बाद तेजस्वी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी मिले. हालांकि, इस मुलाकात को शिष्टाचार का नाम दिया जा रहा है. लेकिन सियासी गलियारे में अटकलों का बाजार गर्म है.

सपा-बसपा की होगी जीत- तेजस्वी

बिहार में महागठबंधन में कांग्रेस के साथ शामिल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार रात लखनऊ में मायावती से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम मायावती और अखिलेश यादव से एक शिष्टाचार मुलाकात करने आए हैं. हम सबसे छोटे हैं और सबका आशीर्वाद लेने आए हैं. उन्होंने कहा कि लालू जी ने यही कल्पना की थी कि उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन हो, मायावती और अखिलेश यादव मिलकर चुनाव लड़ें. साथ ही उन्होंने यूपी और बिहार में बीजेपी का खाता नहीं खोलने की बात कही.

अटकलें तेज

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तेजस्वी की मायावती और अखिलेश से मुलाकात पर सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या वाकई तेजस्वी महज गठबंधन की बधाई देने पहुंचे और ये मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार है. या फिर या फिर उनकी कोशिश अपने पिता के सपने को दोनों नेताओं के सामने रखते हुए गठबंधन में फेरबदल की है. इन अटकलों को हवा इसलिए मिल रही है, क्योंकि आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद पहले ही यूपी में सपा-बसपा गठबंधन पर अपनी सलाह दे चुके हैं. उन्होंने इस गठबंधन से कांग्रेस को बाहर रखने पर इस राष्ट्रीय राजनीति के लिए घातक बताया है. और सपा-बसपा को गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करने की नसीहत दी है.

वहीं बिहार महागठबंधन में शामिल हम (एस) के प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी कहा है कि अगर सपा-बसपा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अनदेखी करेंगे, तो उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है.

इसे भी पढ़ेंः सपा-बसपा गठबंधन को आरजेडी की नसीहत

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