Opinion

पारा शिक्षकों के सरकारीकरण में तकनीकी अड़चन हो सकता है पर पैसा देने में नहीं

Brajesh Singh

पारा शिक्षकों की बहाली में सरकार द्वारा जो विज्ञापन पेपर में तथा विद्यालय में दिया गया था .उसमें स्थानीय महिला एससी,एसटी और ओबीसी के आरक्षण के अनुसार बहाल करना था. बहाली में सिर्फ ग्राम शिक्षा समिति ही नहीं थी, उसमें सचिव के रूप में प्रधान शिक्षक प्रखंड शिक्षा समिति में  BEO,BDO तथा जिला में परियोजना पदाधिकारियों के अलावे जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सह जिला शिक्षा पदाधिकारी का भी अनुमोदन आवश्यक था, उपायुक्त सर्वशिक्षा अभियान के अध्यक्ष थे.

यदि आज पंन्द्रह वर्षों के पश्चात सचिव कहते हैं, बहाली में नियमावली का अनुपालन नहीं हुआ या पारा शिक्षकों का सर्टिफिकेट आज तक जांच नहीं हुआ तो दोषी कौन है. पारा शिक्षक या अधिकारी  दोषी व्यक्ति को चिन्हित कर कार्रवाई होनी चाहिए.

रही बात टेट की तो टेट आज आया है. जिस समय बहाली हुई थी, उस समय जो योग्यता रखी गई  थी उसे पारा शिक्षक पूरा कर रहे थे. जैसे पहले बिना ट्रेनिंग के ही मैट्रिक पास लोगों की नियुक्ति प्राथमिक शिक्षक के पद पर की जा रही थी. इसलिए प्रारंभ में पारा शिक्षक मैट्रिक में बहाल हुए. बाद में योग्यता इण्टर प्रशिक्षित रखा गया, पारा शिक्षक उस अपहर्ता को भी प्राप्त किए जो नहीं कर पाये उन्हें विभाग ने हटा दिया. 2005 में नियमावली आया और पारा शिक्षक बनने की योग्यता प्राथमिक में आइएसी पल्स स्नातक मिडिल में विज्ञान स्नातक रखी गई. इसमें वही लोग बहाल हुए, जो इन अपहर्ताओं को पूरा करते थे.

फिर 2011 में टेट आया तो नियमतः यह 2011 के बाद नवनियुक्त शिक्षकों पर लागू होगा. पारा शिक्षक पूर्व से कार्यरत हैं. पर जबर्दस्ती इसे पारा शिक्षकों पर थोपा जा रहा है, इस परीक्षा को हर साल लेना है, लेकिन दुर्भाग्य से मात्र दो ही बार आयोजित किया गया. दोनों ही परीक्षाओं में पास करने वाले अभ्यर्थियों में अस्सी प्रतिशत पारा शिक्षक ही थे. पारा शिक्षकों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. यदि हर साल परीक्षा होती तो कई और भी लोग टेट उत्तीर्ण होते.

पारा शिक्षकों की यह उपलब्धि एपी सिंह जैसे मक्कार बेईमान अधिकारी को हजम नहीं हो रहा है .अब टेट के बाद भी एक परीक्षा लेना चाहता है, ताकि इनको अयोग्य साबित कर सके.,सचिव झूठ के पुलिंदे हैं. यदि आरक्षण के पालन में त्रुटि रह गया है तो आरक्षण का अनुपालन करके ही अधिकार दिया जाये. पारा शिक्षकों के सरकारीकरण में तकनीकी अड़चन हो सकता है पर पैसा देने में नहीं.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

 

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