
Ranchi: कोरोना संकट के बीच भाजपा और झामुमो का एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी है. झामुमो ने शनिवार को बयान जारी करते कहा था कि कोरोना संकट के बावजूद केंद्र से राज्य को मदद नहीं मिल रही. जीवनरक्षक दवाईयों के अलावा आर्थिक मदद में भी भेदभाव केंद्र कर रहा.
इस पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश ने रविवार को कहा कि झामुमो को झूठ की खेती बंद करनी चाहिए. राज्य शासन की यह मुख्य पार्टी है. ऐसे में इनके नेताओं को गैर जिम्मेदाराना बयान से बचना चाहिये. जनता के सामने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिये वह केवल केंद्र पर दोषारोपण करने में लगा है.
संसाधनों के प्रबंधन में राज्य सरकार फेलः
दीपक प्रकाश ने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में झारखंड को हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है. परंतु राज्य सरकार संसाधनों का प्रबंधन भी ठीक से नहीं कर पा रही है. परिणामस्वरूप जनता बेहाल है. मरीज तड़प-तड़प कर मरने को विवश हैं. झामुमो का आरोप बिल्कुल निराधार है. केंद्रीय सहायता का झारखंड सरकार श्वेत पत्र जारी करे. इससे दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाएगा.
केंद्र सरकार ने राज्य को 79 हजार रेमेडिसीवीर दिये हैं. झामुमो इसे महज 29 हजार बता कर झूठ फैला रहा है. राज्य में इस दवा की कालाबाजारी पर गिरफ्तारी हुई है जिसे राज्य सरकार केवल दिखावे के लिये सीआईडी जांच से रफा दफा करना चाहती है. यही हाल वैक्सीन का है. वैक्सीन रहते हुए भी सरकार ने गलत बयानी की. कुप्रबंधन की हालत ऐसी कि अस्पतालों में बेड, वेंटीलेटर की खुलेआम बोली लगाई जा रही. यह सरकार भर्ती मरीजों को भोजन और दवा भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है.
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राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स भी कुव्यवस्था से जूझ रहा हैः
राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स भी कुव्यवस्था से जूझ रहा है. रिम्स प्रबंधन को आवश्यक उपकरणों, दवाइयों की खरीद की शक्ति नहीं है. टेंडर प्रक्रिया में मरीजों की जान जा रही जबकि कोविड के इस दौर में राज्य सरकार को नियमों को शिथिल कर प्रबंधन को अधिकार देना चाहिये.
भ्रम फैला रहा झामुमोः
हेमंत सरकार वेंटीलेटर का रोना रोती है. सच्चाई यह है कि राजधानी रांची के सदर अस्पताल में 150 वेंटीलेटर एनेस्थेटिक की बाट जोह रहे हैं. रिम्स में एनेस्थेटिक हैं परंतु वेंटीलेटर नहीं. अब इसे सरकार की नाकामी मानी जाए या कुप्रबंधन, यह झामुमो ही बताये. पीएम केअर फण्ड से मिले अन्य ज़िलों के वेंटीलेटर में कबाड़ बने हुए हैं. अभी फिर से केंद्र सरकार ने राज्य को अतिरिक्त 1500 वेंटीलेटर दिए हैं. यही हाल ऑक्सीजन प्लांट का है.
एक साल बीत जाने के बाद भी ऑक्सीजन प्लांट चालू नहीं हुआः
सरकार मांग तो खूब करती है परंतु राज्य सरकार बताये कि चार जिलों में एक साल बीत जाने के बाद भी ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं चालू हुआ. आज केंद्र सरकार की सहायता से सभी जिलों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हो रहे हैं. ये ऐसी सरकार है जिसमें दिन रात जान की बाजी लगाकर मरीजों की सेवा कर रहे डॉक्टर्स कई महीनों से वेतन के लिये तरस रहे और यह सरकार उर्दू शिक्षकों के वेतन की चिंता कर रही. यह राज्य के लिये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.
प्रधानमंत्री को राज्य की पूरी चिंता है. केंद्र ने कोविड सुविधा के अतिरिक्त गरीबों के लिये फिर दो महीने के लिये मुफ्त अनाज की व्यवस्था की है. साथ ही पंचायतों के माध्यम से कोविड काल मे व्यवस्था केलिये झारखंड को लगभग 250 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराई है.




