National

आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता पर बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है. बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने आधार कार्ड से आम जीवन प्रभावित होने की बात कहते हुए इसे खत्म कर देने की गुहार लगाई थी. आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं पर लगभग चार माह तक बहस चली थी. लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था.  आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में अपना रुख साफ किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में दाखिले के लिए आधार अनिवार्य नहीं है.

कोई भी मोबाइल कंपनी आधार कार्ड की डिमांड नहीं कर सकती. हालांकि आईटीआर भरने और पैन कार्ड के लिए आधार अनिवार्य होगा.  सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए भी आधार कार्ड जरूरी होगा. साथ ही अब बैंक खाते से भी आधार लिंक करना जरूरी नहीं होगा. CBSE, NEET परीक्षाओं में आधार की जरूरत अब नहीं होगी.  जस्‍टिस सीकरी ने आधार एक्‍ट, 2016 की धारा 54 को खत्‍म करते हुए कहा कि किसी निजी कंपनी को आधार डेटा मांगने का हक नहीं है. यह असंवैधानिक है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 99.76 फीसदी लोगों के पास आधार है.

इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार यह सुनिश्चत करे कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिल पाये. जस्टिस सीकरी ने केंद्र से कहा है कि वह जल्द से जल्द मजबूत डेटा सुरक्षा कानून बनाये  किसी को दिया जानेवाला आधार नंबर यूनीक होता है और किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता है.

advt

इसे भी पढ़ें : संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना का संरक्षण करना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी : मनमोहन सिंह

आधार कार्ड और पहचान के बीच एक मौलिक अंतर है

आधार इनरोलमेंट के लिए UIDAI द्वारा नागरिकों का न्यूनतम जनसांख्यिकीय और बायॉमीट्रिक डेटा लिया जाता है. अपने फैसले में जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार कार्ड और पहचान के बीच एक मौलिक अंतर है. जस्टिस सीकरी ने अपनी, सीजेआई दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की तरफ से फैसला सुनाया जबकि जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस ए भूषण की अलग-अलग राय थी.  जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ होने के मुकाबले अनूठा होना बेहतर है और आधार का अर्थ अनूठा है.  आधार से समाज के वंचित तबके को ताकत मिली है. कहा कि आधार दूसरे आईडी प्रूफ्स से काफी अलग है क्योंकि इसकी ड्यूप्लिकेसी नहीं की जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व अटर्नी जनरल के रूप में आधार केस में सरकार का पक्ष रखनेवाले मुकुल रोहतगी ने दलील रखी थी कि डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है. सरकार ने साफ कहा है कि वह डेटा की सुरक्षा करेगी.  बताया कि इस संबंध में एक कानून भी आ रहा है.  कहा कि इस फैसले का दूरगामी असर होगा,  क्योंकि कई सब्सिडीज में आधार की महत़्वपूर्ण भूमिका है. इस मामले की सुनवाई जनवरी में शुरू हुई थी. लगभग 38 दिन तक इस मामले में सुनवाई चली.

इसे भी पढ़ें : दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

adv

 सरकार ने बैंक अकाउंट , पासपोर्ट, पैन कार्ड आदि के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया था

केंद्र सरकार ने बैंक अकाउंट खोलने, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस पैन कार्ड बनवाने, सेलफोन सर्विस के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया था.  साथ ही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार अनिवार्य किया गया था. आधार कार्ड को पहचान और पते के प्रूफ के तौर पर मान्यता सरकार ने दी थी. केंद्र सरकार ने आधार कार्ड के पक्ष में सबसे बड़ी दलील थी कि इसकी वजह से सब्सिडी के लाभार्थियों को बिना गड़बड़ी के फायदा मिलता है. सरकार और आधार अथॉरिटी का कहना है कि यह पूरी तरह सेफ है और इसके साथ धोखाधड़ी नहीं की जा सकती है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनवाई के क्रम में टिप्पणी की थी कि सरकार वित्तीय जानकारी पा सकती है.  कहा कि आईटी रिटर्न आदि के बारे में भी सरकार विस्तार से जानकारी मांग सकती है. लेकिन मैं अगर अपनी पत्नी के साथ किसी रेस्टोरेंट में जाता हूं और खाना खाता हूं तो उस बारे में कोई कैसे जानकारी ले सकता है.  ऐसे मामले में दखल नहीं दिया जा सकता है

 

advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button