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स्टिंग में सांसदों ने कहा- तीन से 25 करोड़ तक खर्च कर जीतते हैं चुनाव (जानें कौन हैं ये सांसद)

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New Delhi : लोकसभा चुनाव के पहले ही राजनीतिक पार्टियों की सच्चाई सामने आने लगी है. ऐसी ही कुछ सच्चाई बीजेपी सांसदों की भी सामने आयी है. एक निजी टीवी चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन करके इस बात का खुलासा किया है. स्टिंग में सांसद अपराधिक और अनैतिक तरीकों से चुनाव जीतने की बात करते नजर आ रहे हैं. सात ही चुनाव के दौरान काले धन का इस्तेमाल किए जाने की बात भी कबूल कर रहे हैं. सभी सांसदों ने स्टिंग में बताया है कि उन्होंने चुनाव के दौरान कितने पैसे खर्च किए हैं और आगे कितना करने वाले हैं. जब उनसे पैसे चेक या कैश में लेने के बारे में पूछा गया तो सभी ने कैश में पैसे लेने की बात कही क्योंकि कैश का कोई रिकार्ड नहीं होता है जबकि चेक के जरिए पैसे लेना रिकार्ड में आ जाता है.

इनका स्टिंग आया सामने

जिन सांसदों का स्टिंग सामने आया है उसमें बीजेपी सासंद फग्गन सिंह कुलस्ते, उदितराज, रामदास तड़स, बहादुर कोली के साथ मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस सांसद एमके राघवन, महाबल मिश्रा, राजद सांसद सरफ़राज़ आलम, गोरखपुर से सपा सांसद प्रवीण निषाद, फुलपूर से सपा सांसद नागेंद्र पटेल, लोजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान और आम आदमी पार्टी सांसद साधू सिंह समेत कई अन्य दलों के सांसद शामिल हैं.

मधेपुरा सांसद पप्पू यादव, गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद, भाजपा सांसद उदित राज और भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते (ऊपर: बाएं से दाएं). आप सांसद साधु सिंह, कांग्रेस सांसद एपी राघवन, लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान और राजद सांसद सरफ़राज़ आलम (नीचे: बाएं से दाएं). (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

मधेपुरा सांसद पप्पू यादव, गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद, भाजपा सांसद उदित राज और भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते (ऊपर: बाएं से दाएं). आप सांसद साधु सिंह, कांग्रेस सांसद एमके राघवन, लोजपा सांसद रामचंद्र पासवान और राजद सांसद सरफ़राज़ आलम (नीचे: बाएं से दाएं). (फोटो साभार: द वायर)

मध्य प्रदेश के मंडला से भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का स्टिंग

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टीवी9 भारतवर्ष नाम के एक टीवी चैनल ने अपने स्टिंग में इस बात का दावा किया है कि बीजेपी सांसद व पूर्व स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्री फग्गन सिंह ने 2014 के चुनाव में 12 लाख रुपये खर्च करने की बात कही है. फग्गन सिंह ने कहा कि उन्होंने सिर्फ रैलियों पर दो करोड़ का खर्च किया है.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)
(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

इतना ही नहीं चुनवा प्रचार के दौरान उन्होंने विरोधियों के वोट काटने के लिए मतदाताओं में शराब बांटें. फग्गन स्टिंग में यह बात भी कहते हुए नजर आ रहे हैं कि करोड़ों की मोटी रकम सीधे उनके बंगले पर डिलिवर कराई जाए. साथ ही इस बार के चुनाव में उन्होंने 15 करोड़ रुपये खर्च करने की बात भी कही है.

फग्गन ने चुनाव के दौरान काले धन के इस्तेमाल को लेकर भी कई खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान वह कम से कम 10 करोड़ जरूर खर्च करते हैं जबकि चुनाव आयोग ने खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख ही रखी है. फग्गन ने डमी कैंडिडेट्स खड़े करवाने की बात भी कही है. जिसके लिए वह लाखों रुपये ब्लैकमनी खर्च करते हैं. साथ ही कहा की बीजेपी हेडक्वार्टर की ओर से जो उन्हें चुनाव के लिए फंड मिलता है वो भी तय सीमा से ज्यादा होता है. उन्हें यह फंड कैस में मिलता है.

यह कोई पहला मामला नहीं है जब फग्गन सिंह के बारे में इस तरह की बात सामने आयी है. इससे पहले भी 1999 में जब वाजपेयी की सरकार थी उस दौरान भी उनका नाम वोट फॉर नोट के मामले में सामने आया था. उस वक्त संसंद के अंदर नोटों की गड्डियां लहराने में वो भी शामिल थें. 2005 में अक न्यूज चैनल ने फग्गन को सांसद निधि के बदले कमीशन लेते हुए स्टिंग किया था. 22 जुलाई 2008 में लोकसभा में नोटों का बंडल लहराया था. इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा. लेकिन इतने के बाद भी उन्होंने सबक नहीं ली. 2017 में फिर से एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज को लेकर रिश्वत से जुड़े मामले में फग्गन सिंह के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत मिली थी. जिसके बाद मोदी सरकार ने फग्गन सिंह को केंद्रिय स्वास्थय राज्य मंत्री के पद से हटा दिया था

राजस्थान के भरतपुर लोकसभा सीट सांसद बहादुर सिंह कोली का स्टिंग

स्टिंग में राजस्थान के भरतपुर लोकसभा सीट के सांसद बहादुर सिंह कोली भी शामिल हैं. उन्होंने रैली में हुए खर्च की बात की. कोली ने बताया कि अगर रैली किसी बड़े नेता की होती है तो उसमें लगभग 80 रुपये खर्च हो जाते हैं. इतना खर्च रैली में लोगों की भीड़ जमा करने के लिए किया जाता है. वहीं उन्होंने पीएम मोदी की रैली में भीड़ के लिए 10-10 लाख रुपये दिये जाने की बात भी कबूली.

साभार: टीवी9 भारतवर्ष

वहीं चुनाव लड़ने के दौरान तीन करोड़ रुपये तक के खर्च की बात कोली ने कबूल की है. कोली ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान लगभग 800 गाड़ियों का काफिला होता है. जिसमें एक गाड़ी पर छह हजार रुपये तक का खर्च आता है.

कोली ने टीवी9 भारतवर्ष के स्पेशल इनवेस्टिगेटिंग टीम के सामने कबूला कि पार्टी से एक करोड़ तक की मदद मिल जाती है. लेकिन आधा पैसा यानी 50 लाख रुपये हवाला के जरिए उन तक पहुंचता है. जरूरत पड़ी तो लाखों की ये ब्लैकमनी एंबुलेंस या पुलिस की गाड़ी में भेज दी जाती है. नोटबंदी मामले में बात करते हुए कोली ने कहा कि लोकसभा चुनाव में नोटबंदी की वजह से कोई दिक्कत नहीं आयेगी.

दलित नेता और भाजपा सांसद उदित राज का स्टिंग

आज की तारिख में चुनाव सिर्फ और सिर्फ कालेधन के बदौलत ही लड़ा जाता है. उक्त बातें बीजेपी सांसद और दलित नेता उदित राज ने कही. उन्होंने कहा कि राजनीति में अब ईमानदारी नाम की कोई बात नहीं रह गयी है. जो खुद को ईमानदार बताता है उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं है. बात सिर्फ इतने पर खत्म नहीं हुई. उन्होंने स्टिंग के दौरान खुफिया कैमरे के सामने जनता को भी बुरा भला कहा. उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी से कालेधन पर लगाम तो नहीं लगा पूरी तरह से लेकिन हां देश का कारोबार जरूर तबाह हो गया है. उदित ने पिछले लोकसभा चुनाव 2014 की बात करते हुए कहा कि उस दौरान पांच से सात लाख रुपये खर्च हुए थे.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

पप्पू यादव का स्टिंग

बिहार के सांसद व जन अधिकार पार्टी के लोकतांत्रिक प्रमुख राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 2014 चुनाव के दौरान तीन से पांच करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही है. साथ ही अपनी पत्नी और कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सात से आठ करोड़ खर्च करने की बात कबूल की है. जबकि चुनाव आयोग के द्वारा 47 लाख ही खर्च किए जाने का ब्यौरा दिया गया है. गौरतलब है कि पप्पू यादव पर हत्या जैसे संगीन अपराध का मुकदमा भी चल चुका है.

पप्पू यादव ने कहा कि लोगों को पैसे बांटने में लगभग दो से ढ़ाई करोड़ रुपये का खर्च आएगा. एक-एक करके लोगों को पैसे बांटने होते हैं. और चुनाव के दौरान जिनता खर्च करेंगे उतना ही अधिक फायदा भी होगा. चुनाव प्रचार के दौरान यात्रा पर एक से सवा करोड़ खर्च हो जाता है जबकि रैलियों में होने वाला खर्च अलग से हैं. सिर्फ हैलीकाप्टर पर ही एक करोड़ का खर्च पप्पू यादव ने बताया. उन्हों पिछले चुनाव में हुए खर्च की बात तो कही ही साथ ही 2019 के खर्च के बारे में बात करते हुए कहा कि इस बार लगभग आठ करोड़ खर्च करने का प्लान है. बिहार में शराबबंदी मामले की खिल्ली उड़ाते हुए पप्पू ने कहा कि भले हीं यहां शराबबंदी हो लेकिन शराब के बिना कोई काम नहीं चलता है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी तो हर महीने 10-12 लाख रुपये का खर्च आता है.

स्टिंग में यादव ने इस बात को भी कबूल किया है कि उन्होंने नोट के दम पर गरीब जनता का फायदा उठाया है. चैनल के स्टिंग के अनुसार उन्होंने कहा कि आदमी किसी का नहीं होता कुछ भी कर लो. राजनीति का मतलब सेवा-धर्म नहीं दोगलई है. जितना अधिक दोगलई-तेगलई करोगे उतनी अच्छी राजनीति कर सकोगे. स्टिंग में पप्पू खुद की फंडिंग की बात तो कर ही रहे थे वह अपनी पत्नी रंजीता रंजन व मां के लिए भी फंडिंग की मांग कर रहे थे. उन्होंने बताया कि उनकी मां भी लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं ऐसे में कुल तीन सांसदों की फंडिंग का इंतजाम किया जाए.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

पंजाब के फरीदकोट से आप सांसद साधू सिंह का स्टिंग

टीवी9 भारतवर्ष के इस स्टिंग ऑपरेशन के मुताबिक पंजाब के फरीदकोट से आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद साधू सिंह भी पैसा लेने की बात कबूल करते कैद हुए हैं. सांसद ने पिछली बार की तरह इस बार भी चुनाव में जीत के लिए  कोई कसर नहीं छोड़ने की बात कही है. उन्होंने कहा कि जब वह पिछली बार चुनाव लड़ रहे थे तब आप पार्टी एक आंदोलन के रुप में थी लेकिन अब यह एक राजनीतिक पार्टी बन गयी है. पार्टी को चलाने के लिए पैसे की जरूरत होती है. तो इसके लिए पैसा लेना कोई गुनाह नहीं है. अगर चुनाव में मदद करनी है तो कैश में रकम दी जाए. जहां तक विरोधी पार्टियों का सवाल है वो चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च करते हैं. इसलिए मुझे भी चुनाव के लिए कम से कम तीन करोड़ रुपये जरूर चाहिए होंगे. हांलाकि साधू सिंह ने इस बात की पुष्टी जरूर की कि उनकी पार्टी वोट नहीं खरीदती है और ना ही लोगों को शराब बांटती है. लेकिन इसके बावजूद दो से तीन करोड़ रुपये का खर्च आता है. क्योंकि चुनाव के लिए रैली, बैनर, पोस्टर और झंडों की तैयारी करनी पड़ती है.

साधू सिंह ने बताया कि विरोधी पार्टी तो 27 करोड़ तक का खर्च करती है. इसी वजह से उन्हें भी तीन करोड़ रुपये तक का खर्च करना पड़ता है. वह चुनाव के लिए तीन करोड़ तक का कैश लेने को तैयार थे. लेकिन उन्होंने चेक लेने से मना कर दिया और कहा कि चेक से प्रॉब्लम हो जाएगी. साथ ही सांसद ने यह भी बात कबूल की है कि चुनाव जीतने के लिए उन्हें तीन-चार कैंडिडेट भी खड़े करने पड़ते हैं. जिसमें खर्च होता है.

गोरखपुर के समाजवादी पार्टी सांसद प्रवीण निषाद का स्टिंग

Praveen Nishad A

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

प्रवीण निषाद कालाधन लेने की बात करते हुए कैमरे पर कैद हुए हैं. उल्लेखनीय है कि टीवी9 के  रिपोर्टर्स ने सांसद प्रवीण निषाद के घर पहुंचकर बताया कि वो पॉलिटिकल फंड देने वाली कंपनियों से जुड़े हैं. लिहाजा उन्हें चुनाव में करोड़ों रुपये ब्लैकमनी मिल सकता है. इतना सुनते ही सांसद प्रवीण निषाद बताने लगे कि 2018 के उपचुनाव में कैसे उन्होंने दोनों हाथों से करोड़ों का कालधन लुटाया था?

इतना ही नहीं उन्होंने इस बार के चुनाव में भी कालाधन लुटाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि गोरखपुर चुनाव में पांच से छह करोड़ रुपये खर्च होते हैं. चैनल द्वारा फंडिंग की बात पूछे जाने पर निषाद ने कहा कि जितनी फंडिंग आप करा सकते हैं करा दें, क्योंकि हमारे पास दो लोकसभा सीट हैं. एक तो गोरखपुर सीट है ही और दूसरी उनके पिताजी की महराजगंज सीट है. गौरतलब है कि प्रवीण निषाद यूपी की सियासत में कई साल से सक्रिय निषाद दल के मुखिया संजय निषाद के बेटे हैं.

निषाद ने कहा कि मैं तो जीत रहा हूं 100 पर्सेंट, पिताजी का थोड़ा बहुत रिस्क रहेगा तो हम उनको राज्यसभा भेजेंगे. पिछले चुनाव में हुए खर्च के बारे में निषाद ने बताया कि 7-8 करोड़ खर्च हो गए थे. जिसमें लगभग 3.5 करोड़ हमने खर्च किया और 4 करोड़ के आसपास पार्टी ने किया था. चुनाव के दौरान छोटी पार्टियों को भी मैनेज करने के साथ-सात ग्राम सभाओं को भी मैनेज करना पड़ता है. रैलियों में शामिल होने वाली गाड़ियों पर 60 से 80 लाख का खर्च है. इसके अलावा लोगों को कपड़े भी बांटे जाते हैं.

नोटबंदी के बाद कैश मैनेज करने के बारे में जब स्टिंग में पूछा गया तो निषाद ने बताया कि पार्टी के अकाउंट के अलावा थर्ड पार्टी का अकाउंट होता है. साथ ही ट्रस्ट से भी इसे मैनेज किया जाता है. पैसे लेने की बात पर निषाद ने कहा कि कैश दी जाए क्योंकि चेक का ऑन रिकॉर्ड होगा. लेकिन अगर कैश होगा तो उसका कोई रिकार्ड नहीं होगा.

चैनल के अनुसार, ब्लैकमनी के लिए गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद की बेचैनी ऐसी थी कि वो ना केवल फौरन बताई हुई फर्जी कंपनी से मीटिंग के लिए तैयार हो गए, बल्कि चुनाव का हवाला देकर जल्दी मीटिंग का दबाव भी बनाने लगे. प्रवीण निषाद ने यह भी बताया कि चुनाव में अलग से मिलने वाले फंड के अलावा पार्टी भी फंड देती है.

राजद के अररिया लोकसभा का उपचुनाव जीतने वाले सरफराज आलम का स्टिंग

राजद पार्ट के टिकट पर अररिया लोकसभा से उपचुनाव जनते वाले सरफराज आलम ने भी चुनाव में 10-20 करोड़ खर्च होने की बात कही है. इतना ही नहीं अररिया उपचुनाव में 75 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया साथ ही बीजेपी पर भी 80 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान शराब की होम डिलीवरी करवानी पड़ती है. बात अगर पैसे तक ही रह जाती तो कोई बात होती लेकिन सरफराज ने तो कैश के हेरफेर के बीच में आने वाले को गोली मारने की धमकी तक दे दी.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

गौरतलब है कि सरफराज, लालू के खास रहे तसलीमुद्दीन के बेटे हैं. साल 2000 में बिहार के जोकीहाट से आरजेडी के विधायक बने सरफराज 2010 और 2015 में जेडीयू के सहारे विधानसभा पहुंचे लेकिन बाद में पार्टी ने उन्हें निकाल दिया और वो लालू की शरण में लौट आए.

वर्धा से बीजेपी सांसद रामदास तड़स का स्टिंग

वर्धा से भाजपा सांसद रामदास तड़स भी कैमरे पर कैद हुए हैं. पिछले चुनाव में तड़स ने दस करोड़ खर्च करने की बात कही. वहीं इस बार के चुनाव में 25 करोड़ खर्च करने जा रहे हैं. जब तड़क को चुनाव में मदद करने की बात कही गयी तो वह आठ करोड़ रुपये कैश लेने को तैयार हो गए. तड़स ने भी चेक के जरिये पैसे लेने से मना कर दिया साथ ही कैश के बदले संसद में फर्जी कंपनी के फायदे के लिए हर सवाल उठाने को भी राजी हो गए. उन्होंने कहा कि कैश उनके दिल्ली वाले सरकारी बंगले पर डिलिवर की जाए. इसके लिए वह पार्लियामेंट स्टिकर वाली कार तक मुहैया कराने को तैयार हो गए.

BJP सांसद लखन लाल साहू का स्टिंग

बीजेपी सांसद लखन लाल साहू ने चुनाव में खर्च को लेकर कहा कि 2014 में उन्होंने 15 करोड़ खर्च किए ते लेकिन इस बार के चुनाव में और भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. गौरतलब है कि 2014 में पहली बार लखन लाल बीजेपी सांसद बने थे. चुनाव के दौरान वह लोगों को पैसे बांटते हैं साथ ही 400 गाड़ियों का काफिला भी वो चलाते हैं. पैसे चाहे वोटरों को देना हो या फिर कार्यकर्ताओं को वो कैश में ही देते हैं. वह इस दौरान कई तकह की संस्थाओं को ब्लैकमनी बांटते हैं. और ये ब्लैकमनी वह अपने बेटे के जरिए मंगवाते हैं. वह खुद इस कालेधन को अपने कमरे में रखते हैं. वह ब्लैकमनी के लेन-देन के लिए अपने कार का भी बेखौफ होकर इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि भला कौन उनकी गाड़ी को रोकेगा ? वहीं देश के अगर बड़ें नेताओं की बात की जाए तो उनकी रैलियों में करोड़ो कालाधन खर्च होता है. लखन ने तो बातों बातों में यह तक कह डाला कि नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं उन्हें सीएम और पीएम का फर्क नहीं मालूम है. संसद में पैसे लेकर सवाल उठाने की बात भी सांसद ने कबूल किया.

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

कोझिकोड से कांग्रेस के सांसद एमके राघवन का स्टिंग

केरल के कोझिकोड से कांग्रेस के सांसद एमके राघवन का भी स्टिंग हुआ. राघवन स्टिंग में कैमरे के सामने चुनाव में अपनी जीत पक्की करने के 20 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कबूल की.

रामचंद्र पासवान का स्टिंग

रामचंद्र पासवान ने स्टिंग में कैमरे के सामने यह बात कबूला है कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पांच करोड़ खर्च किए थे. उल्लेखनीय है कि रामचंद्र पासवान बिहार के समस्तीपुर के सांसद और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के भाई हैं. वह तीन बार सांसद रह चुके हैं. और चौथी बार फिर से मैदान में उतरे हैं. पासवान ने यह भी दावा किया कि बिहार में छह सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी उम्मीदवारों पर पूरे 50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. रामचंद्र ने बताया कि चुनाव के लिए उन्हें पांच से दस करोड़ की जरूरत होती है. लेकिन अगर उनके पिछले चुनाव का ब्यौरा अगर देखा जाए तो मात्र 28 लाख 59 हजार का ही था.

वहीं, फर्जी कंपनी के नुमाइंदे बनकर जब टीवी9 भारतवर्ष के खुफिया रिपोर्टर ने उन्हें 5 करोड़ के इंतजाम करने का भरोसा दिया. शर्त ये थी कि बदले में कंपनी के प्रोजेक्ट में समस्तीपुर में कोई रुकावट न आए. साथ ही जरूरत पड़ने पर सांसद संसद में कंपनी की समस्याओं को उठायें. रामचंद्र पासवान ने इस पर बिना कोई देरी के पूरे सपोर्ट का भरोसा दे दिया. साथ ही कंपनी को फंड दिलाने को भी तैयार हुए. पैसे कैश में दें या चेक में देने के सवाल पर सांसद ने कैमरे पर कहा कि चेक में लफड़ा होता है, कैश दे दो, ईजी है. उन्होंने बताया कैश में वक्त नहीं लगता. पासवान दिल्ली या फिर नोयडा कहीं भी पैसे लेने तो तैयार थे.

उन्होंने पैसों को दिल्ली से बिहार पहुंचाने का रास्ता बताते हुए कहा कि पैसे पहुंचाने के लिए कार्यकर्ता सेट होते हैं. क्योंकि हवाला में दिक्कत होती है. लाखों लोगों का दिल्ली आना होता है. जिसमें हर तरह के लोग शामिल होते हैं. अमीर-गरीब, इन लोगों को पांच-दस लाख देकर पैसे भिजवा दिए जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के फूलपुर लोकसभा सीट सांसद नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल का स्टिंग

सांसद नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल भी कैमरे में कैद हुअ. नागेंद्र उत्तर प्रदेश के फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं. उन्होंने चुनाव के वक्त पैसे और शराब बांटने की बात कबूल की है. वहीं ब्लैकमनी की डिलीवरी के बारे में बात करते हुए नागेंद्र ने कहा कि अगर पैसे मिलना पक्का हो जाए तो दिल्ली से हवाई जहाज के जरिये रुपये उनके घर तक पहुंच जाएंगे. चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को झांसा देने के लिए वो अपने पैसों की हेरा फेरी करने से भी नहीं चूकते हैं. वहीं 2014 में सात करोड़ रुपये खर्च किए.

पंजाब के फिरोजपुर सांसद अकाली दल के शेर सिंह गुबाया का स्टिंग

शेर सिंह गुबाया तीसरी बार पार्टी बदलकर संसद पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं. इसके साथ ही इस बार के चुनाव में पिछली बार के मुकाबले ज्यादा खर्च भी करने को तैयार हैं. पिछले बार के चुनाव में उन्होंने 25 सै 30 करोड़ खर्च किए थे. शेर सिंह ने कहा कि इस बार उनके क्षेत्र में हरसिमरत कौर आ गई है, वो तो पैसे बांट देती है, क्योंकि वैसे तो उसे वोट मिलेंगे नहीं, इसलिए वो पैसे देगी, उसके चलते हमें भी कुछ करना पड़ेगा. शेर ने 10 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही.

मिथिलेश कुमार का स्टिंग

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

(फोटो साभार: टीवी9 भारतवर्ष)

शाहजहांपुर से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद, यूपी के पूर्व पंचायती राज्य मंत्री और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रह चुके मिथिलेश कुमार तीन बार विधायक रह चुके हैं. जब मिथिलेश से चुनाव में खर्च की बात पूछी गयी तो उन्होंने 15 करोड़ की मांग की. उन्होंने बताया कि 2009 चुनाव के दौरान उन्होंने साढ़े सात लाख रुपये खर्च किए थे. लेकिन अब खर्चा डबल हो गया है. वोट के लिए प्रधान से लेकर विधायक तक सभी को ब्लैकमनी देकर खरीदना पड़ता है. वहीं गाड़ियों और नेताओं को खरीदने में सबसे ज्यादा खर्च होता है. मिथिलेश का कहना है कि वह सीधे क्षेत्रीय नेताओं को खरीदते हैं ना की वोटर्स. अपनी जीत पक्की करने के लिए वह ब्लैकमनी से शराब खरीद कर बंटवाते हैं. तीन दिन में लगभग 50 हजार को तो सिर्फ शराब वो बंटवा देते हैं. मिथिलेश का दावा है कि उनका टिकट छह करोड़ रुपये में तय हुआ है. उन्होंने तो यहां तक बता दिया कि छह करोड़ में बसपा से जो टिकट का सौदा हुआ है, उसके लिए दो करोड़ रुपये एडवांस मांगे गए हैं. टिकट खरीदने के लिए उन्हें करोड़ो ब्लैकमनी चाहिए. वहीं काले घन को को कैसे लेंगे तो उन्होंने कहा कि वह पैसे हवाला के जरिए लेंगे. वह कालाधन लेकर लोकसभा में सवाल पूछने को भी तैयार हो गए.

महाबल मिश्रा का स्टिंग

कांग्रेस के बड़े नेता और पश्चिमी दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा के सामने दिल्ली में 100 करोड़ के एक प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा गया. जिसके बदले उन्हें चुनाव में फंडिंग दने की बात कही गयी. जिसके बाद मिश्रा ने कहा कि 2014 के चुनाव में उन्होंने 15 करोड़ खर्च किए थे. जबकि दिल्ली लोकसभा सीट से एक उम्मीदवार को ज्यादा से ज्यादा 70 लाख तक ही खर्च करने की छूट दी गयी है. इस मुताबिक मिश्रा का खर्च तय खर्च की रकम से 21 गुना ज्यादा थी. जब उनसे पैसे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके दोस्त और करीबी लोग पैसे का इंतजाम कर देते हैं. मिश्रा ने भी इस बात को कबूल किया कि वह चेन नहीं बल्कि कैश ही लेना पसंद करते हैं.

(नोट: न्यूज विंग ‘टीवी-9 भारतवर्ष’ समाचार चैनल के इस स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)

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