
Ranchi: झारखंड राय यूनिवर्सिटी (जेआरयू) अपने अनुसार डाटा तैयार कर उसकी रिपोर्ट यूजीसी, नैक एवं एनआईआरएफ को सौंपता है. बड़ी बात ये है कि राय यूनिवर्सिटी वस्तुस्थिति का सही ब्यौरा इन संस्थानों को नहीं सौंपता. बल्कि फर्जी रिपोर्ट का डाटा यूनिवर्सिटी द्वारा यूजीसी एवं नैक को दिया जाता है. और इस बात की तस्दीक करती है राय यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट जो नैक और यूजीसी को सौंपी गई है.
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यूनिवसिर्टी ने छात्रों के संख्या की गलत जानकारी रिपोर्ट के माध्यम से दी है. इसके अलावे यूजीसी को दी गई रिपोर्ट में राय यूनिवर्सिटी ने कहा कि सभी विभागों की अधारभूत संरचना पर 2013 से कार्य चल रहा है. जबकि यूनिवर्सिटी 2013 से तीन संस्थानों पर अपना कैंपस बदल चुकी है. जबकि रिपोर्ट में वर्तमान कैंपस स्थल पर कार्य करने की बात यूजीसी को दी गई है.
क्या है आंकड़ों का खेल
यूजीसी और नैक की रिपोर्ट में छात्रों के नामांकन संबंधित जानकारी अलग-अलग दी गयी है. यही नहीं झारखंड राय यूनिवर्सिटी ने एनआइआरएफ को इस संबंध में सही जानकारी नहीं दी है. जेआरयू नैक, यूजीसी एवं एनआइआरएफ को जो रिपोर्ट सौंपी है उसे यूजीसी के नियमों के अुनसार अपलोड किया है. यूनिवर्सिटी ने इस रिपोर्ट के माध्यम से डिप्लोमा, यूजी और पीजी में छात्रों के कुल नामांकन का ब्यौरा दिया है. इन रिपोर्ट में वर्ष 2012 में छात्रों का कुल नामांकन यूसीजी एवं नैक को 41 दिखाया गया है, 2013 में छात्रों का कुल नामांकन यूजीसी को 275 जबकि नैक को 285 दिखाया गया है, वही 2014 में छात्रों का नामांकन यूजीसी को 2349 जबकि नैक को 2608 दिया गया है.
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2015 में कुल छात्रों को नामांकन यूजीसी को 588, जबकि नैक को 931 बताई गयी है. तीनों रिपोर्ट 2016 के बाद यूजीसी, नैक और एनआइआरएफ को सौंपी गयी है. एनआइआरएफ रिपोर्ट की बात करें तो नैक और एनआइआरएफ के कुल छात्रों की संख्या में अलग-अलग है. अपनी खबर में हम 2015 के डाटा की बात इसलिए कर रहे हैं कि सारी रिपोर्ट जब 2016 के बाद सौंपी गयी, तो 2015 तक के कुल छात्रों की संख्या में अंतर क्यों है. 2016 बाद की रिपोर्ट में तीनों संस्था को यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार डाटा में बदलाव आ सकता है, लेकिन 2015 तक के डाटा में यूनिवर्सिटी ने क्यों बदलाव किये. ये जांच का विषय है.
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नैक ग्रेडिंग के लिए अलग डाटा का खेल
यूजीसी और नैक को अलग-अलग डाटा सौंपना यह स्पष्ट करता है कि झारखंड राय यूनिवर्सिटी नैक ग्रेडिंग के माध्यम से सरकार पर अनुदान का दबाव बनना चाहती है. रिपोर्ट को देखने से पता चलता है कि यूसीजी रिपोर्ट में झारखंड राय यूनिवर्सिटी छात्रों की संख्या कम दिखा रही और संसाधनों का रोना रो रही है, जबकि नैक की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी अपने को आत्मनिर्भर एवं अधिक बच्चों की संस्थान दिखा रही है.
अलग-अलग साल में सौंपी गयी है तीनों रिपोर्ट- जेआरयू
झारखंड राय यूनिवर्सिटी के पीआरओ प्रशांत जयवर्धन ने कहा कि नैक, यूजीसी एवं एनआइआरएफ की रिपोर्ट यूनिवर्सिर्टी ने अलग-अलग वर्ष में सौंपा है इसलिए छात्रों के कुल आंकड़े में बदलाव हो सकता है.
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