
NewDehi : पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल को बुधवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें वापस कश्मीर भेज दिया गया. 1978 में लागू जम्मू कश्मीर पीएसए के जरिए सरकार किसी भी शख्स को बिना किसी ट्रायल के तीन से छह महीने की अवधि के लिए हिरासत में ले सकती है. अधिकारियों के अनुसार फैसल इस्तांबुल जाने वाले थे. उन्हें बुधवार सुबह हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया.
जान लें कि शाह फैसल जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी बनाने और राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटकर केंद्रशासित प्रदेश घोषित किये जाने के फैसले के बाद से ही आग उगल रहे हैं. वे व्यक्तिगत बयान देने के साथ-साथ मीडिया में भी बेहद भड़काऊ बयान दे रहे थे. सूत्रों के अनुसार सरकार को उनकी गतिविधियों पर नजर थी. इसलिए सरकार ने उनकी आवाजाही सीमित रखने की जरूरत महसूस की.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, भारत और चीन एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं का सम्मान करें
शाह फैसल 2010 बैच में आईएएस के टॉपर रहे थे
शाह फैसल 2010 बैच में आईएएस के टॉपर रहे थे. बता दें कि शाह फैसल ने इस वर्ष जनवरी में यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था कि बेगुनाह कश्मीरियों को मारा जा रहा है. यह भी कहा था कि देश में मुसलमानों के हितों की अनदेखी हो रही है. फैसल ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए सरकार की आलोचना करते हुए इसे राज्य में मुख्यधारा की राजनीति का अंत बताया था.
फैसल ने कहा था, मैं इसे हमारे सामूहिक इतिहास में एक भयावह मोड़ की तरह देखता हूं. एक ऐसा दिन जब हर कोई महसूस कर रहा है, यह हमारी पहचान, हमारे इतिहास, हमारी जमीन को लेकर हमारे अधिकार, हमारे अस्तित्व को लेकर हमारे अधिकार का अंत है. पांच अगस्त से एक नये आक्रोश की शुरुआत हुई
इस क्रम में उन्होंने 17 मार्च को श्रीनगर के राजबाग में आयोजित एक समारोह में नयी राजनीतिक पार्टी जम्मू ऐंड कश्मीर पीपल्स मूवमेंट बनाने की घोषणा की थी. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के सरकार का प्रस्ताव पेश करने से एक दिन पहले चार अगस्त को राज्य में पूरी तरह से बंदी थी. घाटी में मोबाइल, इंटरनेट और केबल टीवी कनेक्शन बंद कर दिया गया था.




