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मैंने कोई गलती नहीं की, इसलिए माफी नहीं मांगूगा : त्रिवेदी

मुम्बई | कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने बुधवार को कहा कि उन्होंने कार्टून बनाकर कोई गलती नहीं की इसलिए वह कोई माफी नहीं मांगेंगे क्योंकि उन्होंने कोई गलती नहीं की। राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को बुधवार को रिहा कर दिया गया। इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के कार्यकर्ता त्रिवेदी पर लगाए गए आरोपों पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया के बाद मंगलवार को उन्हें जमानत दी गई थी।

त्रिवेदी को आर्थर रोड जेल में रखा गया था। उन्होंने जेल से रिहाई के तुरंत बाद कहा, “मैं कानून का सम्मान करता हूं लेकिन मैं उस कानून का सम्मान नहीं करता जो हमें यह महसूस कराता हो कि हम एक स्वतंत्र देश में नहीं रह रहे हैं।”

उनसे जब यह पूछा गया कि क्या ऐसा कार्टून बनाना उचित है कि 26/11 हमले के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को भारतीय संविधान पर पेशाब करते दिखाया जाए, त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने वही किया जो उन्होंने देखा और इसे अन्य तरीके से देखने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, “यह लड़ाई मेरी लड़ाई है, जो यहां समाप्त नहीं होती। हम तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत लगाए गए राजद्रोह के आरोप निरस्त नहीं किए जाते।”

उन्होंने कहा, “हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए यह लड़ाई जारी रखेंगे।”

त्रिवेदी की रिहाई के समय उनके स्वागत के लिए जेल के बाहर आईएसी कार्यकर्ता मयंक गांधी सहित करीब 50 लोग मौजूद थे।

आईएसी सदस्य करीब 10 मिनट तक जेल के बाहर नारे लगाते रहे और फिर त्रिवेदी की रिहाई के बाद एक छोटे जुलूस के रूप में वहां से रवाना हुए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इसी जेल में 26/11 के आतंकवादी हमले का दोषी अजमल कसाब बंद है।

त्रिवेदी ने बाद में उनकी लड़ाई में मीडिया से मिले समर्थन के लिए उसे धन्यवाद दिया। त्रिवेदी ने कहा कि वह उनका समर्थन करने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञ हैं।

पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिए जाने के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि सबसे पहले सरकार उन पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप हटाए।

उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि यह संदेश जाए कि मैं सहयोग नहीं कर रहा हूं लेकिन मैं यह भी चाहता था कि सरकार स्वीकार करे कि उसने मुझ पर राजद्रोह के आरोप लगाकर गलती की है। इसीलिए मैंने पहले जमानत पर रिहा होने से इंकार कर दिया था।”

उन्होंने कहा, “मैं सहयोग न करने वाला व्यक्ति नहीं हूं और जब आईएसी सदस्यों ने इस सम्बंध में मुझसे बात की तो मैंने जमानत स्वीकार कर ली।”

बम्बई उच्च न्यायालय ने संस्कार मराठे नाम के एक वकील द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला सुनाया था।

त्रिवेदी को पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और 24 सितम्बर को उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था।

उन पर दिसम्बर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान कार्टून बनाकर संविधान सहित राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में आगे आ गए। उन्होंने कहा कि कथित राजद्रोह के आरोप में त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर वह आश्चर्यचकित हैं और उन्हें लगता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।

आडवाणी ने बुधवार को अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दमन के मामले में हमेशा से आपातकाल के 1975 से 77 तक के समय को अब तक का सबसे बुरा समय मानते रहे थे।

उन्होंने कहा, “लेकिन राजनीतिक कार्टूनिस्ट व भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी असीम त्रिवेदी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं और मुझे लगता है कि क्या आज की राजनीतिक व्यवस्था आपातकाल से भी बुरी है।”

त्रिवेदी को बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी थी लेकिन उन्होंने तब तक रिहा होने से मना कर दिया है, जब तक उन पर लगाया गया राजद्रोह का आरोप न हटा लिया जाए।

उधर, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी त्रिवेदी का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने त्रिवेदी की खिंचाई करते हुए उन्हें आगे ऐसा न करने की चेतावनी भी दी।

ठाकरे ने मुम्बई पुलिस द्वारा त्रिवेदी पर लगाए गए राजद्रोह के आरोप को बहुत बड़ा आरोप बताया। लेकिन उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक, संविधान व संसद का कार्टूनों के जरिए मजाक बनाने के लिए त्रिवेदी की खिंचाई भी की।

उन्होंने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे सम्पादकीय में कहा कि त्रिवेदी ने निश्चित रूप से राष्ट्रीय चिह्नों का अपमान किया है लेकिन उन्हें राजद्रोह के आरोप में जेल में डालना सही नहीं है।

उन्होंने 11 साल पहले संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु की समानांतर चर्चा करते हुए कहा कि उसे मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद भी वह सरकार के आतिथ्य का आनंद ले रहा है, वहीं सिर्फ एक कार्टून बनाने वाले त्रिवेदी पर राजद्रोह के आरोप लगा दिए गए हैं।

खुद भी काटरूनिस्ट रह चुके ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी ने अपने कार्टून के जरिए घोटालों से ग्रसित संसद की वर्तमान दुखद स्थिति दिखाई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सीमाएं तोड़ सकते हैं।

ठाकरे ने कहा कि त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने देशभक्ति की भावना से भरकर यह कार्टून बनाया लेकिन उन्हें संसद का सम्मान करना चाहिए और उसका इस तरह अपमान नहीं करना चाहिए।

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