
Kochi : पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा है कि प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है कि कांग्रेस अल्पसंख्यक साम्प्रदायिकता पर नरम है. उन्होंने कहा कि हम साम्प्रदायिकता जैसे मुद्दे पर सिलेक्टिव नहीं हो सकते हैं. पीएफआई या जमात-ए-इस्लामी की तरह ही आरएसएस की सांप्रदायिकता भी भारत के लिए खतरनाक है. उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षामंत्री ए के एंटनी की बातों को समर्थन करते हुए कहा कि हमें बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील नहीं होना चाहिए.
CAA किसी की नागरिकता छीनता नहीं
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर रमेश ने कहा कि यह किसी की नागरिकता छीनता नहीं है, लेकिन नागरिकता देने में सिलेक्टिव है जिसका विरोध किया जा रहा है. उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां भाजपा
ने शाहीन बाग और CAA जैसे मुद्दों के सहारे ध्रुवीकरण करने की कोशिश की, जिसे जनता ने नकार दिया, हालांकि यहां कांग्रेस के लिए भी अच्छे परिणाम नहीं आये हैं. यह चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए करॉना वायरस की आपदा के समान है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें स्पष्ट होना होगा कि हमें किसी की किसी भी धार्मिक भावना के लिए नहीं लड़ना है, यही वास्तविक धर्मनिरपेक्षता है.
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मैं एंटनी की बात से पूरी तरह सहमत हूं
केरल सरकार की ओर से आयाजित पुस्तक मेले में मौजूद जयराम रमेश ने कहा कि हम किसी भी तरह की साम्प्रदायिकता के खिलाफ हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनता के बीच प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है कि हम अल्पसंख्यकों के प्रति नरम हैं. हमें हर हाल में जनता के बीच भरोसा पैदा करना होगा. जयराम रमेश ने कहा कि बहुत साल पहले ही एके एंटनी ने कहा था कि हम बहुसंख्य की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील होकर सफल नहीं हो सकते हैं. मैं एंटनी की बात से पूरी तरह सहमत हूं.

राज्यसभा सांसद और पार्टी की नीतियां तैयार करने में अहम रोल निभाने वाले रमेश ने कहा कि साल 2014 में केरल की एक जनसभा में एंटनी ने कहा था कि कांग्रेस को लेकर गलत धारणा बन गयी है कि यह पार्टी कुछ समुदायों या संगठनों के प्रति उदार ह. जबकि कांग्रेस की नीति सभी के लिए समान न्याय है, लेकिन लोगों में इस बात को लेकर संदेह है. यह संदेह अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति पार्टी की निकटता से बनता है और ऐसी स्थिति केरल में सांप्रदायिक ताकतों के प्रवेश का रास्ता खोल देगी.
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस को RSS, पीएफआई और जमात-ए-इस्लामी सभी प्रकार की सांप्रदायिकता से लड़ना होगा, हम सिलेक्टिव नहीं हो सकते. हमें सांप्रदायिकता के खिलाफ खड़े होने में ईमानदार और निर्भीक होना होगा. अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता भारत के लिए उतनी ही खतरनाक है जितनी बहुसंख्यक सांप्रदायिकता. जवाहर लाल नेहरू ने ऐसा ही किया था वह हर किस्म की सांप्रदायिकता के खिलाफ थे.
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जनता के बीच मैसेज है कि पार्टी अल्पसंख्यकों की हितैषी है
लूम हो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें कहा गया था छवि के चलते हार मिली है. एके एंटनी ने कहा था कि जनता के बीच मैसेज है कि पार्टी अल्पसंख्यकों की हितैषी है, जिसके चलते बहुसंख्यकों ने इस पार्टी को वोट नहीं दिया. अब जयराम रमेश एंटनी की रिपोर्ट का समर्थन कर रहे हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि 2014 के चुनाव में हार के बाद भी पार्टी अपनी छवि बदलने में नाकाम रही है, इसी वजह से 2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बहुसंख्यकों के बीच इसी छवि का नुकसान उठाना पड़ा है.
नागरिकता धर्म के आधार पर नहीं होनी चाहिए
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा है कि अगर शाहीन बाग के लोगों को लगता है कि उनसे उनकी नागरिकता ले ली जायेगी तो उन्हें राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NPR) के खिलाफ आंदोलन चलाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि नई दिल्ली के शाहीन बाग में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ मौजूदा प्रदर्शन ने भाजपा के सांप्रदायिक हितों को पूरा किया है और सांप्रदायिक मुसलमानों के हितों को भी पूरा किया है. कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा कि शाहीन बाग में लोग क्यों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. क्या वो चिंतित हैं कि उनकी नागरिकता उनसे ले ली जायेगी?
उन्होंने कहा, यह उनका जायज डर है. तब तो उन्हें NPR और NPR के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए. वे केवल CAA के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं. रमेश ने कहा कि नागरिकता धर्म के आधार पर नहीं होनी चाहिए. यह हमारा बुनियादी रूख है जिसे हमारे संविधान निर्माताओं ने खारिज कर दिया था और यह हमारे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है.
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