
Ranchi: कोरोना महामारी के दौर में निजी अस्पतालों के रवैये को लेकर शिकायतें आती रही हैं. विधायक सरयू राय ने सीएम हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि निजी अस्पतालों के मामले में थोड़ी गंभीरता की जरूरत है. अस्पतालों की शिकायत पर उसके खिलाफ क्लिनिकल जांच चलाया जाना चाहिए. प्रशासनिक जांच चलने से अस्पताल के बंद होने की नौबत आ सकती है. साथ ही यह आपराधिक दंड विधान की कार्रवाई की ओर बढ़ती जाती है. इसका प्रतिकुल प्रभाव सरकार की छवि पर पड़ रहा है. बेहतर तरीका यह हो कि प्राइवेट अस्पतालों के संचालन और मैनेजमेंट के लिये एक मार्गदर्शिका बनायी जाये. इससे प्राइवेट अस्पतालों पर आवश्यक निगरानी बनी रहेगी. साथ ही अस्पताल जनहित में अपनी सेवा भी बनाये रख सकेंगे.
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111 सेव लाइफ अस्पताल का मामला
सरयू राय ने आदित्यपुर (सरायकेला खरसावां) स्थित 111 सेव लाईफ अस्पताल के बारे में सीएम को लिखा है. कहा कि ऐसा लग रहा है कि यह अस्पताल प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण बंद होने के कगार पर है. पिछले साल भी जमशेदपुर का मेडिका अस्पताल अकारण बंद हो गया था. सरकार, प्रशासन, टाटा स्टील नहीं बता पाये कि मेडिका के बंद होने की नौबत क्यों आई. विडम्बना है कि एक ओर कोरोना में अस्पतालों के बेड की संख्या एवं गुणवत्ता बढ़ाने की हर कोशिश हो रही है और दूसरी ओर अस्पतालों के बंद होने की स्थिति भी पैदा हो रही है. कोशिश हो कि सेव लाइफ अस्पताल के मामले में विवाद का हल निकाला जाये.
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मोमेंटम झारखंड के दौरान खुला था अस्पताल
27 अप्रैल, 2018 को तत्कालीन सरकार के मुख्यमंत्री के मोमेंटम झारखंड कार्यक्रम में देवघर में ग्लोबल इंवेस्टमेंट समिट हुआ था. इसी दौरान इस अस्पताल का शिलान्यास हुआ था. कहा गया था कि यह अस्पताल एक रोल मॉडल होगा. यह रोल मॉडल बिखर रहा है. पर इसे रोल मॉडल बनाने की घोषणा करने वालों को शायद पता नहीं कि यह रोल मॉडल आज किस स्थिति में पहुंच गया है. वे लोग अपने रोल मॉडल का बचाव करने से कतरा रहे हैं.
सरकार 111 लाईफ अस्पताल की जितनी गहन जांच कराना चाहती है, कराये. साथ ही जमशेदपुर-आदित्यपुर के अन्य अस्पतालों की भी इसी मापदंड पर जांच करा ले. आदित्यपुर के मेडिट्रिना अस्पताल में भी किसी प्रकार की जांच हुई है, परंतु सेव लाईफ अस्पताल को चलने दिया जाये. मेडिका की तरह इसे बंद नही करायें. आदित्यपुर के हित में यह सेव लाइफ अस्पताल चलना चाहिये. अस्पतालों की जांच प्रक्रिया में अस्पतालों के संचालन एवं प्रबंधन में सुधार हो न कि अस्पतालों के बंद होने की नौबत आये.
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