News Wing Ranchi, 18 October: ये सरकार नहीं सर्कस है. मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखंड के लिए अभिशाप बन गए हैं. मनमानी इतनी बढ़ गयी है कि राज्य का शीर्ष अधिकारी बीजेपी का एजेंट बन कर काम कर रहा है. अपने बेटे से राज्य के कंपनियों से ऊगाही करवायी जा रही है. बच्चे अनाज के बिना भूख से मर रहे हैं और सूबे के मुखिया लास वेगास का सैर कर रहे हैं. कुछ ऐसे ही अंदाज में विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन अपनी बातों को अपने आवास में संवाददाताओं के सामने रख रहे थे. क्या कहा हेमंत सोरेन ने प्वाइंट में जानिए.
अब नींद खुली है सीएम की
जब झारखंड की पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गयी. हर चीज कंट्रोल से बाहर चला गया तब जाकर सीएम की नींद खुली है. वो अब अधिकारियों के साथ आपात बैठक करने वाले हैं. राज्य की स्थिति को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं. जो होना संभव ही नहीं है.
भूख से मर रहे हैं लोग सीएम कर रह हैं विदेश में ऐश
जब राज्य में बच्ची भूख से मर रही है तो सीएम साहब विदेशों को सैर कर रहे हैं. वो लास-वेगास जाते हैं. मुझे जरा कोई बताए कि लास वेगास में आखिर कौन से निवेशक रहते हैं. वहां सिर्फ जुआ और शराब का काम होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि वो लास-वेगास निवेश लाने गए थे या ऐश करने.
राज्य के नहीं बहुराष्ट्रीय सीएम हैं रघुवर
राज्य में इतनी परेशानी है. लेकिन उसकी चिंता जरा सी भी सूबे के सीएम को नहीं है. वो राज्य में कम और विदेशों की सैर ज्यादा करते हैं. ऐसे में उन्हें बहुराष्ट्रीय सीएम कहा जाए तो कोई गलत नहीं है.
राज्य के बड़े अधिकारी के बेटे करते हैं वसूली
झारखंड की स्थिति क्या है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के एक बहुत बड़े अधिकारी के बेटे यहां की कंपनियों से वसूली का काम करते हैं. रकम नहीं दिए जाने पर सरकारी धमकी दी जाती हैं. इन सबके प्रमाण मेरे पास हैं. मैं सरकार से मांग करता हूं कि इन मामलों की सीबीआई जांच हो.
सरयू राय एक गंभीर मंत्री हैं, उनकी बात नहीं मानी जाती
सरयू राय एक गंभीर नेता हैं. लेकिन उनकी बात सरकार में नहीं मानी जाती है. कैबिनेट की बैठक में सरयू राय सीएस से कहते हैं कि राशन कार्ड कैंसिल उन्होंने करायी और सीएस कहती हैं कि उन्होंने ऐसा आदेश नहीं दिया है. सरयू राय जवाब में कहते हैं कि उनके पास इस बात की क्लिप है. जब ऐसी स्थिति सरकार और अधिकारी की हो जाए तो उस राज्य का भला आखिर कैसे हो सकता है. ऐसे भी सरयू राय की सरकार में नहीं सुनी जाती है. पीडीएस में डीबीटी का भी उन्होंने विरोध किया था. लेकिन उनकी नहीं सुनी गयी.




