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Ranchi, 07 October: सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में, प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज अपना इलाज कराने आते हैं. लेकिन यहां आनेवाले मरिजों के लिए बेड की भारी कमी है. मजबूरन बरामदे में जमीन पर लगे बेड पर, कईयों को अपना इलाज कराना पड़ता है. यह तस्वीर है रिम्स के न्यूरो सर्जरी वार्ड की, जहां दर्जनों की संख्या में मरीज दर्द से कराहते हुए जमीन पर ही लेटे मिल जाएंगे. रिम्स में बेहतर व्यवस्था की बात करने वाले सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को भी इन बातों की जानकारी है, परंतु हालात जस के तस बने हुए हैं.
एमसीआई के मापदंड से तीन गुणा ज्यादा बेड : डॉ.आरके श्रीवास्तव
बेड की कमी पर पूछे गए सवाल के बाबत रिम्स के डीन डॉ.आरके श्रीवास्तव ने कहा की रिम्स एक शैक्षणिक संस्थान है और एमसीआई के मापदंड पर चलता है. रिम्स का न्यूरो सर्जरी विभाग सुपर स्पेशलिटी के अंतर्गत आता है. वहां एमसीआई के मापदंड के अनुसार जितने बेड की हमें आवश्यकता है, उससे तीन गुणा ज्यादा बेड है.
रोड एक्सीडेंट में वृद्धि के कारण बेड की कमी: डॉ.आरके श्रीवास्तव
रोड एक्सीडेंट में वृद्धि होने के कारण और बाकी जगह के सेंटर का संचालन सही ढंग से नहीं होने के कारण, रिम्स में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है. इसी के कारण रिम्स में भीड़ बनी रहती है. मजबूरन हमें बरामदे में ही इलाज करना पड़ता है. क्योंकि हम किसी भी मरीज को नकार नहीं सकते. मरीजों की ऐसी हालत पर हमें भी दुख होता है. रिम्स में मौजूद हमारे चिकित्सक बेहतर इलाज करते हैं. बता दें कि रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में बेड की संख्या 60 है लेकिन डेढ़ सौ की संख्या में मरीज यहां आते हैं.
जमीन पर इलाज करवाने में होती है समस्या ज्ञान प्रकाश (परिजन)
न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती मरीज के परिजन, ज्ञान प्रकाश ने कहा कि बेड खाली नहीं रहने के कारण तीन दिनों से बरामदे में ही इलाज करवा रहे हैं. जहां पर मरीज को रखा गया है, वहां गंदगी है. लोगों का आना जाना लगा रहता है. जिससे मरीज को परेशानी होती है.




