
Ranchi : फिकस्ड चार्जेस के मामले में अगले सप्ताह तक नियामक आयोग अपना निर्णय देगी. राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस संबध में जनसुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है. गौरतलब है कि ल़ॉकडाउन के बाद से ही फिकस्ड चार्जेस में छूट देने की मांग की जा रही थी. वहीं जेबीवीएनएल, डीवीसी जैसी वितरक कंपनियों ने इसके लिये मोहलत और एडजस्टमेंट की मांग की थी. ऐसे में नियामक आयोग की ओर से दिया गया निर्णय महत्वपूर्ण होगा. लंबे समय से चैंबर ऑफ कॉंमर्स समेत कई व्यापारिक संगठनों ने फिकस्ड चार्जेस में रियायत की मांग की थी.
छूट के लिए मुख्यमंत्री सहित विभाग को अलग अलग स्तर से पत्र लिखा गया. अंतत: मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और उर्जा सचिव के पत्र के बाद नियामक आयोग ने इस पर पहल की. बता दें कि सितंबर के शुरूआती दिनों में ही फिकस्ड चार्जेस के लिये जनसुनवाई पूरी कर ली गयी है. वैसे उम्मीद की जा रही है कि उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिल सकती है. अब आयोग के निर्णय का इंतजार है.
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उर्जा विभाग के पत्र को लेकर रहा है मतभेद
इस संबंध में सीएम के प्रधान सचिव और उर्जा सचिव की ओर से नियामक आयोग को पत्र लिखा गया. इस पत्र को लेकर उपभोक्ताओं और वितरक कंपनियों में जनसुनवाई के दौरान मतभेद देखा गया. वितरक कंपनियों ने जहां मोहलत देने की बात करते हुए अगले साल एडजस्टमेंट की बात की. वहीं उपभोक्ताओं ने कहा कि विभाग के पत्र में छूट देने की बात की गयी है. उपभोक्ताओं की ओर से कहा गया है कि विभाग की ओर से मार्च, अप्रैल, मई और जून तक फिकस्ड चार्जेस में छूट की सहमति मांगी गयी है. बता दें विभागीय पत्र के बाद नियामक आयोग, फिकस्ड चार्जेस में छूट देने या मोहलत इस पर निर्णय देगी. इस निर्णय के बाद वितरक कंपनियां इसे लागू करेगी.
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प्रधान सचिव के पत्र के बाद हुई कार्रवाई
फिकस्ड चार्जेज में छूट के लिये उर्जा सचिव एल ख्यांग्ते ने 16 अगस्त को आयोग को पत्र लिखा. जिसके बाद 24 अगस्त को प्रधान सचिव सह जेबीवीएनएल के एमडी राजीव अरूण एक्का ने नियामक आयोग को पत्र लिखा. जिसमें मार्च, अप्रैल, मई और जून तक फिकस्ड चार्जेज में छूट की मांग की गयी. वहीं आम जनता को राहत देने का भी जिक्र है. जिसके अनुसार अगर इन चार महीनों में घरेलू उपभोक्ताओं ने बिजली बिल नहीं दिया है तो, उनसे पेनाल्टी या सरचार्ज नहीं लिया जाएगा.
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