न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सीएम के जवाब के बावजूद घटिया मोबाइल बांटने के मामले में सीएस को देना होगा जवाब

न्यूज विंग ने पहले ही घटिया मोबाइल बांटे जाने को लेकर प्रकाशित की थी खबर

2,760

– 2 साल पहले बंटा मोबाइल, प्रदीप यादव के सवाल के बाद विभाग हुआ रेस

 Ranchi: विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को सदन के अंदर जमकर हंगामा हुआ. हंगामे की वजह विधायक प्रदीप यादव का एक सवाल था. प्रदीप यादव ने अल्प सूचित प्रश्नकाल के दौरान महिला बाल विकास कल्याण विभाग से यह पूछा की राज्य के सात कुपोषित जिले के आंगनवाड़ी सेविकाओं को मोबाइल बांटे जाने की योजना थी. सभी को मोबाइल मिला. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद यह शिकायत आने लगी कि मोबाइल खराब हो गया है, और वह घटिया क्वालिटी के हैं. इस पर विभाग का क्या कहना है. जवाब देते हुए मंत्री लुईस मरांडी ने यह बात स्वीकारा कि जो मोबाइल आंगनबाड़ी सेविकाओं को बंटा है, वह निश्चित तौर पर घटिया क्वालिटी का है. कई आंगनवाड़ी सेविकाओं ने इस बात की शिकायत की है.

उन्होंने कहा की योजना केंद्र सरकार की है, लिहाजा इसमें किसी तरह की कार्रवाई राज्य सरकार की तरफ से नहीं की जा सकती. उन्होंने यह भी कहा कि मामले को लेकर मोबाइल बांटने वाली कंपनी को चिट्ठी लिखी गई है. चिट्ठी में साफ तौर से कहा गया है कि अगर कंपनी खराब मोबाइल को रिप्लेस नहीं करती है, तो कंपनी को काली सूची में डाल कर दी डीबार कर दिया जाएगा.

hosp1

चिट्ठी लिखी जाने की बात पर फंसा पेच, विधायक ने सवाल किया कि कब लिखी गई चिट्ठी

जिस तरह की बहस सदन में देखने को मिली, उससे यह साफ हो गया कि मोबाइल बांटे जाने को लेकर एक बड़ा घोटाला हुआ है. अभी यह कहना काफी जल्दबाजी होगी कि घोटाला केंद्र सरकार के स्तर पर हुआ है या राज्य सरकार के स्तर पर. लेकिन यह निचोड़ निकल कर सामने आया कि कंपनी ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को घटिया मोबाइल थमाया और दो साल से कल्याण विभाग मोबाइल खराब होने की शिकायत तो सुन रहा था. लेकिन कार्रवाई नहीं कर रहा था. विधायक प्रदीप यादव ने अध्यक्ष से मांग की कि सदन में इस बात का खुलासा हो कि आखिर विभाग ने कंपनी को चिट्ठी कब लिखी है. अध्यक्ष दिनेश उरांव के आदेश के बाद सदन पटल पर चिट्ठी रखी गई.

लेकिन अध्यक्ष महोदय ने चिट्ठी की तारीख बताने से सदन को मना कर दिया. लेकिन इशारों में कहा कि अक्सर ऐसा होता है कि विभाग के पास सवाल आने के बाद विभाग रेस होता है. इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ है. इस बात से साफ हो गया कि प्रदीप यादव की चिट्ठी आने के बाद ही विभाग ने कंपनी को खत लिखा और 10 दिनों के अंदर मामले पर जवाब देने को कहा.

सीएम ने दिया जवाब लेकिन अध्यक्ष ने कहा सीएस को देना होगा एक हफ्ते में जवाब

मोबाइल मामला यहीं पर आकर नहीं रुका. यह काफी हंगामेदार हो गया. कई बार मंत्री ने प्रदीप यादव को संतुष्ट करने के लिए जवाब दिया. लेकिन प्रदीप यादव इस बात पर अड़े रहे कि आखिर राज्य सरकार कंपनी पर केस क्यों नहीं कर सकती. प्रदीप यादव ने कहा कि जैसा मंत्री जी जवाब दे रही हैं कि अब बाकी मोबाइल राज्य सरकार खरीद कर आंगनवाड़ी सेविकाओं को देगी तो पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ.

प्रदीप यादव का साथ सत्ता पक्ष के मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर भी देते दिखे. उन्होंने कहा कि सिर्फ कंपनी से पैसा वसूलने या मोबाइल बदल देने से काम नहीं चलेगा. कंपनी पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए थी. मामले में सीपी सिंह ने भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि नियम के तहत ही किसी तरह की कोई कार्रवाई हो सकती है. कानून के तहत ही सरकार काम करेगी. इस बहसबाजी के बीच अध्यक्ष महोदय ने मामले पर कहा कि इस पूरे मामले पर मुख्य सचिव विचार करेंगे और चलते सत्र में ही अगले सप्ताह जवाब देंगे.

अध्यक्ष महोदय के इस तरह के नियमन के बाद सीएम ने कुछ कहने की अपनी इच्छा जताई. लेकिन अध्यक्ष दिनेश उरांव ने साफ तौर से उन्हें कुछ भी कहने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि नहीं आप अब नहीं बोल सकते, बोलना था तो नियमन के पहले बोलते. इस पर मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर ने अध्यक्ष से कहा कि सदन का नेता जब चाहे खड़ा होकर अपनी बात सदन में रख सकता है. सदन काफी हंगामेदार हो गया.

इस बीच अध्यक्ष ने सीएम रघुवर दास को अपनी बात रखने को कहा. रघुवर दास अपनी बात रखते हुए कहा कि खरीदारी का काम भारत सरकार का था. राज्य सरकार को जब मोबाइल के क्वालिटी के बारे पता चला, तो विभाग पत्राचार कर रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि विभाग भारत सरकार को एक्शन लेने के लिए भी लिखेगा और अनुरोध करेगा की कंपनी पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो. सीएम के जवाब देने के बाद मुख्य सचेतक ने फिर से कहा कि जब सीएम का जवाब मामले पर आ गया है, तो मुख्य सचिव का जवाब देना नहीं बनता है. इस पर अध्यक्ष ने साफ तौर से राधा कृष्ण किशोर को कहा कि जवाब तो सीएस को देना ही होगा. एक बार नियमन आ गया है उसे वापस नहीं लिया जा सकता. कहा कि अगर सीएस का जवाब इस मामले पर आता है तो दिक्कत क्या है.

इसे भी पढ़ें – पहले सखी मंडल को फोन बांट करायी किरकिरी, शिक्षकों को टैब का लॉलीपॉप,अब आंगनबाड़ी में फोन बांटकर एक और घपले को तैयार रघुवर सरकार

इसे भी पढ़ें – डिजिटल इंडिया के नाम पर ठगी गयी महिलाएं, काम नहीं करता सखी मंडल को दिया गया मोबाइल

इसे भी पढ़ें – स्मार्टफोन के नाम पर ग्रामीण महिलाओं को थमा दिया झुनझुना, बताया ही नहीं कैसे करेंगे इस्तेमाल

इसे भी पढ़ें – झारखंड में महिलाओं के उत्थान के नाम पर हुआ घोटाला, चुप है रघुवर सरकार

 

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: