न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

भाजपा सांसद रवींद्र पांडेय पहुंचे कांग्रेस नेता रणविजय सिंह के घर, होने लगी खुसुर-फुसुर

1,457

Dhanbad: बाघमारा के विधायक ढुल्ल महतो के दुर्व्यवहार से परेशान गिरिडीह के भाजपा सांसद रवींद्र पांडेय छठ में कांग्रेस नेता रणविजय सिंह के घर पर क्या गये, राजनीति के प्याले में सुनामी आ गयी. जितनी मुंह, उतनी बातें होने लगी. क्या, रवींद्र पांडेय कांग्रेस के दिग्गज नेता आरएनपी सिंह के सहारे रणविजय सिंह का सहारा लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा. अजय कुमार तक पहुंचना चाहते हैं? यह चर्चा इसलिए भी उछली कि गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र से भाजपा का टिकट शिवशक्ति बख्शी और ढुल्लू महतो को मिलने की चर्चा तेजी से चल पड़ी है. ढुल्लू लगातार गिरिडीह क्षेत्र का भ्रमण कर रहे हैं, इस कारण भी लोग गिरिडीह संसदीय क्षेत्र से ढुल्लू को भाजपा का संभावित उम्मीदवार मान रहे हैं.

इसे भी पढ़ेंः सात समंदर पार अमेरिका में भी बिहार-झारखंड के लोगों ने मनाया छठ

इधर, हाल का एक घटनाक्रम भी रवींद्र पांडेय की भाजपा से बढ़ती दूरी को प्रकट करता है. हाल ही में टुंडी में एक कार्यक्रम था, इसमें मुख्य अतिथि बनकर मुख्यमंत्री रघुवर दास को आना था. लेकिन ऐन मौके पर वह नहीं आये. उनके हेलीकाप्टर में खराबी आने को वजह बतायी गयी. उस कार्यक्रम में रवींद्र पांडेय नहीं गये थे? आश्चर्यजनक रूप से रवींद्र पांडेय के संसदीय क्षेत्र में हुए उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के नहीं आने पर करोड़ों रुपये की योजना का उद्घाटन और शिलान्यास धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने किया. उधर, उसी दिन रवींद्र पांडेय रेल से संबंधित संसदीय समिति की बैठक में उपस्थित हुए, जिसमें साफ बता दिया गया कि अब कतरास-चंद्रपुरा रेल लाइन चालू नहीं हो सकती.

hosp3

इसे भी पढ़ेंः18 साल में 18 घोटालों से राज्य की छवि दागदार, कई गये सलाखों के…

इधर, सांसद पांडेय के खिलाफ जनाक्रोश को हवा देने की बाघमारा के भाजपा विधायक ढुल्लू महतो ने हर संभव कोशिश की है. ढुल्लू ने सांसद के प्रति अपमानजनक भाषा का भी खुलकर प्रयोग किया. इन सबके बाद भी ढुल्लू के अपमान से बचाने के लिए भाजपा का कोई नेता सामने नहीं आया. इस तरह रवींद्र पांडेय पार्टी में अलग-थलग पड़ते गये हैं. प्रशासन के अधिकारी भी उनकी बात नहीं सुनते हैं. उनके कई डंपर जब नक्सलियों ने लेवी नहीं देने पर जलाए थे तो तब प्रशासन के पदाधिकारियों ने वैसी मदद नहीं की, जैसा वह चाहते थे. बताया जा रहा है कि खुद से सब कुछ मैनेज कर उनका काम चल रहा है. भाजपा के शासन में अपनापन जैसी बात नहीं रही है? कतरास-चंद्रपुरा रेल लाइन की बंदी ने तो उनकी राजनीति का आधार ही हिला कर रख दिया. सवाल है कि रेल लाइन की बंदी के खिलाफ कतरास में चल रहे धरने के बीच वह अपनी उपलब्धियां क्या गिनायें ? उस पर ढुल्लू की उनकी मिट्टी पलीद करनेवाली राजनीति, इससे कैसे निबटें? कोई तो मजबूत सहारा चाहिए है ना?

इसे भी पढ़ेंःसबसे बड़ी इस्पात निर्माता कंपनी बनेगी टाटा स्टील, 2025 तक बढ़ायेगी…

पता नहीं क्यों झुंझला गये पांडेयजी

बड़ा ही साधारण सा सवाल था कि क्या आपकी हाल में कांग्रेस नेता रणविजय सिंह से मुलाकात हुई है? इस सवाल में कुछ भी तो ऐसा नहीं कि सांसद रवींद्र पांडेय झुंझला जाएं? लेकिन वह एकदम से आपे बाहर हो गये. हां मुलाकात हुई है…तो. इसीलिए हम पत्रकार लोग से बात नहीं करते. आपको पता होना चाहिए कि उनके यहां छठ हुआ था, उसी का प्रसाद खाने गये थे…और क्या कहना चाहते हैं. कुछ नहीं, यही कन्फर्म होना था और जानना था कि यह मुलाकात राजनीतिक मकसद से तो नहीं थी. सांसद ने इतने में फोन काट दिया.

इसे भी पढ़ेंःस्थापना दिवस की तैयारियां पूरीः क्या, कब और कौन से होंगे कार्यक्रम, पढ़ें पूरी खबर

कौन हैं रणविजय सिंह?

धनबाद के चर्चित देवों में से एक सकलदेव सिंह के पुत्र कतरास विधानसभा क्षेत्र के सिजुआ निवासी हैं. कतरास-चंद्रपुरा रेल लाइन को लेकर इस कांग्रेस नेता ने दूर की राजनीति की. धनबाद से दिल्ली तक की. धनबाद में रेल मंत्री पीयूष गोयल का पुतला जलाया. इसके दूसरे दिन गोयल का धनबाद आने का कार्यक्रम था पर नहीं आये. गोयल नहीं आये तो क्या. रणविजय लाइन बंदी का आंदोलन लेकर दिल्ली पहुंच गये. कार्यक्रम में कांग्रेस के दिग्गज नेता आये. अंत में डा अजय कुमार के साथ गिरफ्तारी दे दी. इस दूर की राजनीति के बाद अचानक से कांग्रेस में उनका वजन बढ़ गया. अभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डा अजय कुमार से उनकी खूब पट रही है. भाजपा के गिरिडीह सांसद रवींद्र पांडेय उनके घर पहुंचे तो राजनीति का एक नया कोण बन गया. भले ढुल्लू के सताये सांसद बोल रहे हैं वह तो प्रसाद खाने गये थे.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: