
Ranchi: कोरोना की सेकंड वेब जानलेवा साबित हो रही है. एक के बाद एक कोरोना के मरीज गंभीर हालत में इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं. जहां गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सारी सुविधाएं तो है लेकिन जरूरी इंजेक्शन और प्लाज्मा हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं है. ऐसे में गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए लगातार प्लाज्मा की डिमांड की जा रही है. चूंकि, दवाओं के साथ ही वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की लोगों को ज़रूरत पड़ रही है. इसी के साथ ही कोरोना से जंग जीत चुके लोगों के प्लाज्मा की भी मांग बढ़ी है. सोशल साइट्स और ग्रुप में लोग अपने परिजनों के लिए प्लाज्मा मांग रहे है ताकि उनकी जान बचाई जा सके, लेकिन डोनर्स ही नहीं मिल रहे है.
एक साल तक रखा जा सकता है प्लाज्मा
डोनेट किया गया प्लाज्मा 1 साल तक ब्लड बैंक में सुरक्षित रखा जा सकता है. अगर कोरोना से रिकवर हो चुके लोग ठीक होने के 14 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट करें तो केवल रिम्स में 100 से ज्यादा प्लाज्मा हर समय उपलब्ध होगा. जिससे कि गंभीर मरीजों को तत्काल प्लाज्मा उपलब्ध कराया जा सकेगा. बताते चलें कि प्लाज़्मा से कोरोना संक्रमितों की जान बचाई जा सकती है. प्लाज्मा बनाया नहीं जा सकता, यह सिर्फ डोनेट ही किया जा सकता है. इसके बावजूद लोग प्लाज्मा डोनेशन के लिए आगे नहीं आ रहे है.
डिमांड 50 की आते है 20 डोनर्स
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ सुषमा की मानें तो कोरोना के मरीज़ जिनको हल्के लक्षण हैं. उनका इलाज होम आइसोलेशन में किया जाता है, जबकि गंभीर मरीजों को हॉस्पिटल में एडमिट करते हैं. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के गंभीर मरीज होते है उनको बचाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी है. ऐसे मरीजों के लिए प्लाज़्मा सिर्फ उन्हीं लोगों से दान में मिल सकता है, जो पहले कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं. केवल रिम्स में ही हर दिन 50 यूनिट प्लाज्मा की डिमांड की जा रही है. लेकिन काफी ढूंढने के बाद भी 20 से 25 डोनर से प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आते हैं.
कैंप लगाकर कर रहे जागरूक
रक्तवीर कहे जाने वाले डॉ चंद्रभूषण खुद प्लाज्मा और ब्लड डोनेट करते हैं. वहीं लोगों को भी इसके लिए जागरूक करते है ताकि लोग प्लाज्मा डोनेशन के लिए आगे आएं. इसके लिए रेगुलर एंटी बॉडी टाइटर टेस्ट कैंप भी लगाए जा रहे है, लेकिन अब लोगों से अपील की जा रही है कि जब प्लाज्मा की जरूरत पड़ती है तो लोग दौड़ते हुए आते हैं. अगर यही जज्बा प्लाज्मा डोनेट करने में दिखाएं तो न जाने कितने लोगों को नया जीवन मिल सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान
- कोरोना के संक्रमण से उबर चुका व्यक्ति 14 दिनों के बाद प्लाज्मा दान कर सकता है
- 18 वर्ष से अधिक आयु और उनका न्यूनतम वजन 45 किलो होना चाहिए
- प्लाज़्मा दान करने से पहले अपना आई जीजी टेस्ट अवश्य कराए, अगर ये वैल्यू 4 से ऊपर है तब ही आप दान कर सकत है.
- एक वर्ष में 24 बार प्लाज्मा दान कर सकते हैं. जो लोग भी कोरोना बीमारी से रिकवर्ड हुए हैं, वो हर दो सप्ताह यानी 14 दिन के बाद प्लाज्मा दान कर सकते हैं.
- प्लाज्मा दान करने से डोनर के शरीर से किसी भी तरीके से खून की कमी नहीं होती है. क्योंकि केवल लिक्विड जिसमें एंटीबॉडी होते हैं डोनर के शरीर से लिया जाता है.
- प्लाज्मा देने के मात्र 24 घंटे के अंदर इसकी रिकवरी हो जाती है.
- प्लाज्मा फ्रेसिस के अंतर्गत एक आदमी का 400 एमएल प्लाज़्मा दान करता हैं जिससे 200 एमएल का 2 यूनिट प्लाज़्मा बनता है.जिसे दो अलग अलग लोगों को दिया जा सकता है.




