
Panji: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे को लेकर एकबार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा. पणजी में शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राफेल सौदे से जुड़े ‘गुम’ दस्तावेजों की जांच गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से शुरू होनी चाहिए. जिन्होंने कथित रूप से दावा किया था कि सौदे से संबंधित फाइलें उनके पास हैं. गोवा की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि जैसे इस तटीय राज्य में सरकार ‘लापता’ है, वैसे ही राफेल से संबंधित दस्तावेज गायब हो गये हैं.
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‘पर्रिकर से हो जांच की शुरूआत’
गांधी पणजी में ‘जीत की ओर’ बैनर तले बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा, ‘‘जैसे गोवा में सरकार लापता है, (राफेल से जुड़ी) फाइलें भी लापता हो गई हैं. अगर आप जांच करना चाहते हैं तो इसकी शुरुआत पर्रिकर से होनी चाहिए.’’ गांधी ने गोवा के मंत्री विश्वजीत राणे तथा एक अज्ञात कॉलर के बीच राफेल सौदे के संबंध में बातचीत के कथित ऑडियो टेप के संदर्भ में कहा, ‘‘पर्रिकर ने कैबिनेट से कहा था कि राफेल फाइलें उनके पास हैं.’’ उन्होंने ऑडियो टेप के हवाले से कहा, ‘‘(प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी मुझे मुख्यमंत्री पद से नहीं हटा सकते. जिस दिन उन्होंने मुझे हटाया, मैं फाइलें दिखा दूंगा. अगर फाइलें गुम हुई हैं तो पर्रिकर की जांच कराइए.’’
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‘चौकीदार चोर है’
गांधी ने कहा कि रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने और 2017 में गोवा के मुख्यमंत्री बनने वाले पर्रिकर ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बताया था कि उन्हें नए राफेल सौदे की जानकारी नहीं है. एक दैनिक अखबार में राफेल पर खबर का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी पर हमला बोला और कहा, ‘हिंदुस्तान के चौकीदार ने समानांतर बातचीत की.’ उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जी ‘अच्छे दिन’ कहते तो लोग बोलते थे ‘आएंगे’, अब अगर आप कहे चौकीदार तो लोग कहते हैं ‘चोर है.’ कुछ और कहने की जरुरत नहीं है.’’
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उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार की दलीलों को याद करते हुए गांधी ने कहा, ‘केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि राफेल फाइलें गायब हो गई हैं. फाइलें कहती है कि चौकीदार ने विमान की कीमत बढ़ाई. फाइलों में यह भी जिक्र है कि मोदी जी के कारण राफेल की खरीद में देरी हुई और विमान मिलने में दस और साल का वक्त लगेगा.’ ज्ञात हो कि फ्रांस के साथ जब राफेल सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे तब पर्रिकर रक्षा मंत्री थे और केन्द्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि करोड़ों रुपयों के करार से जुड़े दस्तावेज ‘चोरी’ हो गये हैं.
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