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इस महिला नेता ने पहली बार भाजपा के सामने रखा था राम मंदिर का प्रस्ताव, रथ यात्रा इसके बाद ही शुरू हुई

New Delhi. अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण हो गया है. राम मंदिर के लिए इस देश ने बहुत लंबा इंतजार किया है. लेकिन ये सपना आज पूरा हो गया है. पीएम मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास किया. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए लंबा संघर्ष हुआ. क्या आप जानते हैं राम मंदिर को आंदोलन बनाने का पहला प्रस्ताव किसने दिया था. भाजपा में पहली बार राम मंदिर निर्माण का प्रस्ताव कौन लेकर आया था?

1988 में रखा गया था प्रस्ताव
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय से आंदोलन चल रहे थे. लेकिन सोमनाथ से लालकृष्ण आडवाणी के द्वारा निकाली गई रथयात्रा ने इस देश के लोगों को रामजन्मभूमि आंदोलन से जोड़ दिया था. 1988 में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में मंदिर निर्माण के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया पहली बार प्रस्ताव लेकर आईं थीं. इसी प्रस्ताव के बाद राम मंदिर मुद्दा बीजेपी के प्रमुख एजेंडे में शामिल हो गया. राजमाता विजयराजे सिंधिया भाजपा की संस्थापक सदस्य थीं और उनके प्रस्ताव के बाद ही रथ यात्रा का आयोजन किया गया था.

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आंदोलन का प्रमुख हिस्सा रहीं राजामाता
राजमाता विजयाराजे सिंधिया रामजन्भूमि आंदोलन का प्रमुख चेहरा थीं. वो राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय रहीं. बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1990 में जब सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली तो विजयाराजे सिंधिया ने उन्हें पूरा सहयोग दिया था.

कार सेवकों को किया था संबोधित
छह दिसंबर 1992 की कारसेवा के दौरान भी अयोध्या में राजमाता अहम भूमिका में रहीं और राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व किया. अयोध्या के रामकथा कुंज के मंच से राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भी कारसेवकों को संबोधित किया था. राजमाता सिंधिया को बाबरी विध्वंस मामले का आरोपी बनाया गया था.

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भाजपा के घोषणा पत्र में राम
1990 की रथ यात्रा के बाद राम मंदिर का मुद्दा भाजपा के घोषणा पत्र में शामिल हो गया. भाजपा के 8 बार के घोषणा पत्र में राम मंदिर का उल्लेख किया गया. यहां तक की 2019 के घोषणा पत्र में भी राम मंदिर का जिक्र किया गया था.

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